तहख़ाने से हसीन शहर को बचाने की कोशिश

  • लीना शेखौनी
  • बीबीसी मॉनिटरिंग

सीरिया का सबसे पुराना शहर अलेप्पो जब जंग के मैदान में बर्बादी की तरफ़ बढ़ रहा था तो एक आदमी उसके अतीत को तस्वीरों में सहेजने के लिए लगा हुआ था.

अला अल-सईद ने इसके लिए ख़ुद को घर के तहख़ाने में खुद को दशकों नजरबंद रखा. यह घर उनके सास-ससुर का था जहां सालों उनके कमरे में कोई दाख़िल तक नहीं हुआ.

1920 और 30 के दशक में अलेप्पो में रोज़मर्रा की जिंदगी कैसी थी, इसकी तस्वीरें अल-सईद की पत्नी के पूर्वजों ने खीचीं थीं.

वह कहते हैं, "मैंने इन तस्वीरों के इतिहास की जितनी पड़ताल की, मैं शहर और पड़ोस की हर इमारत के बीते कल में उतना ही उतरता गया."

2010 में अल-सईद ने 'तस्वीरों में अलेप्पो का इतिहास' नाम से एक किताब भी प्रकाशित की. और इसके दो साल बाद सीरिया की जंग शुरू हो गई. उनके शहर में होने वाला हर धमाका, फटने वाला हर बम, उन्होंने निजी तौर पर महसूस किया.

इमेज कैप्शन,

अल-सईद

2013 में जब कई महत्वपूर्ण पुस्तकालय जला दिए गए या बर्बाद हो गए तो वह फौरन हरकत में आए. इन पुस्तकालयों में हजारों की संख्या महत्वपूर्ण दस्तावेज़ थे.

इसके बाद से ही ऐतिहासिक महत्व के दस्तावेजों की डिजिटल कॉपी तैयार करना इनका मक़सद हो गया. उन्होंने दस्तावेज़ों की तस्वीर लेकर उसे इंटरनेट पर आनेवाली नस्लों के लिए अपलोड कर दिया.

अल सईद पिछले कुछ सालों से अपने प्रोजेक्ट पर लगे हुए थे लेकिन तीन साथी छात्रों की मदद से उन्होंने इसे रफ्तार दे दी. साल 2014 में अल-सईद ने अलेप्पो नैशनल आर्काइव्स की शुरुआत की और इसके लिए एक फ़ेसबुक पन्ना भी बनाया.

अल-सईद बताते हैं, "हमने युद्ध, संघर्ष और संकट के समय काम किया. यहां तक कि जब बिजली और पानी की आपूर्ति बंद हुई, हमने तब भी काम नहीं रोका. लंबे समय के लिए हमारा इंटरनेट कनेक्शन भी कटा रहा."

बिना किसी बाहरी मदद के अल-सईद ने अपना काम जारी रखा. उन्होंने सरकारी दस्तावेजों से लेकर नक्शों, पारिवारिक तस्वीरों और दुलर्भ किताबों का डिजिटल वर्जन तैयार किया.

अलेप्पो के अख़बारों की डिजिटल कॉपी तैयार करते समय 19वीं सदी के दस्तावेजों का भी आर्काइव्स तैयार किया गया. अल-सईद ने जितनी चीजों का डिजिटल संस्करण तैयार किया उनमें से ज्यादातर चीजें अब नष्ट हो चुकी हैं.

जब सीरिया का संघर्ष तेज होने लगा और उनके स्टूडेंट दोस्त उन्हें छोड़कर जाने लगे तभी अल-सईद का परिवार वहीं बने रहे. इसकी एक वजह यह भी थी कि वे अपनी किताबों से अलग होने के बारे में सोच नहीं सकते थे.

वह कहते हैं, "इनसे अलग होने बहुत मुश्किल है." वे अब भी आर्काइव तस्वीरें कनाडा में मौजूद अपने एक दोस्त की मदद से अपलोड करते हैं. अल-सईद की ये आर्काइव तस्वीरें उनके लिए भी अहम हैं जो शहर में बने हुए हैं और उनके लिए भी जो यहां से जा चुके हैं.

जंग शुरू होने से पहले अलेप्पो में 20 लाख से ज्यादा बड़ी आबादी रहती थी लेकिन अब आंकड़ें बताते हैं कि यह आधी से भी कम रह गई है.

अल-सईद कुछ पंक्तियां पढ़कर सुनाते हैं, "अलेप्पो की रूह को अल्लाह सुकून बख्शे... मैं तुम्हारी हवा के बगैर सांस भी नहीं ले सकता.... खुदा अलेप्पो की पुरानी सुबहें वापस लेकर आएं... यह दुनिया का सबसे हसीन शहर है."

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