तहख़ाने से हसीन शहर को बचाने की कोशिश

  • 16 दिसंबर 2016
इमेज कॉपीरइट ALEPPO NATIONAL ARCHIVES

सीरिया का सबसे पुराना शहर अलेप्पो जब जंग के मैदान में बर्बादी की तरफ़ बढ़ रहा था तो एक आदमी उसके अतीत को तस्वीरों में सहेजने के लिए लगा हुआ था.

अला अल-सईद ने इसके लिए ख़ुद को घर के तहख़ाने में खुद को दशकों नजरबंद रखा. यह घर उनके सास-ससुर का था जहां सालों उनके कमरे में कोई दाख़िल तक नहीं हुआ.

पढ़ें- सीरिया के अलेप्पो में घमासान संघर्ष, संकट में संघर्ष विराम

इमेज कॉपीरइट ALEPPO NATIONAL ARCHIVES

1920 और 30 के दशक में अलेप्पो में रोज़मर्रा की जिंदगी कैसी थी, इसकी तस्वीरें अल-सईद की पत्नी के पूर्वजों ने खीचीं थीं.

वह कहते हैं, "मैंने इन तस्वीरों के इतिहास की जितनी पड़ताल की, मैं शहर और पड़ोस की हर इमारत के बीते कल में उतना ही उतरता गया."

पढ़ें- सीरिया: विद्रोही अलेप्पो छोड़ने पर राज़ी

इमेज कॉपीरइट ALEPPO NATIONAL ARCHIVES

2010 में अल-सईद ने 'तस्वीरों में अलेप्पो का इतिहास' नाम से एक किताब भी प्रकाशित की. और इसके दो साल बाद सीरिया की जंग शुरू हो गई. उनके शहर में होने वाला हर धमाका, फटने वाला हर बम, उन्होंने निजी तौर पर महसूस किया.

पढ़ें- सीरिया ने पूर्वी अलेप्पो में रोका संघर्ष

इमेज कॉपीरइट ALEPPO NATIONAL ARCHIVES
Image caption अल-सईद

2013 में जब कई महत्वपूर्ण पुस्तकालय जला दिए गए या बर्बाद हो गए तो वह फौरन हरकत में आए. इन पुस्तकालयों में हजारों की संख्या महत्वपूर्ण दस्तावेज़ थे.

पढ़ें- अलेप्पो में फंसे लोगों को निकालने का नया समझौता

इमेज कॉपीरइट ALEPPO NATIONAL ARCHIVES

इसके बाद से ही ऐतिहासिक महत्व के दस्तावेजों की डिजिटल कॉपी तैयार करना इनका मक़सद हो गया. उन्होंने दस्तावेज़ों की तस्वीर लेकर उसे इंटरनेट पर आनेवाली नस्लों के लिए अपलोड कर दिया.

इमेज कॉपीरइट ALEPPO NATIONAL ARCHIVES

अल सईद पिछले कुछ सालों से अपने प्रोजेक्ट पर लगे हुए थे लेकिन तीन साथी छात्रों की मदद से उन्होंने इसे रफ्तार दे दी. साल 2014 में अल-सईद ने अलेप्पो नैशनल आर्काइव्स की शुरुआत की और इसके लिए एक फ़ेसबुक पन्ना भी बनाया.

इमेज कॉपीरइट ALEPPO NATIONAL ARCHIVES

अल-सईद बताते हैं, "हमने युद्ध, संघर्ष और संकट के समय काम किया. यहां तक कि जब बिजली और पानी की आपूर्ति बंद हुई, हमने तब भी काम नहीं रोका. लंबे समय के लिए हमारा इंटरनेट कनेक्शन भी कटा रहा."

इमेज कॉपीरइट ALEPPO NATIONAL ARCHIVES

बिना किसी बाहरी मदद के अल-सईद ने अपना काम जारी रखा. उन्होंने सरकारी दस्तावेजों से लेकर नक्शों, पारिवारिक तस्वीरों और दुलर्भ किताबों का डिजिटल वर्जन तैयार किया.

इमेज कॉपीरइट ALEPPO NATIONAL ARCHIVES

अलेप्पो के अख़बारों की डिजिटल कॉपी तैयार करते समय 19वीं सदी के दस्तावेजों का भी आर्काइव्स तैयार किया गया. अल-सईद ने जितनी चीजों का डिजिटल संस्करण तैयार किया उनमें से ज्यादातर चीजें अब नष्ट हो चुकी हैं.

इमेज कॉपीरइट ALEPPO NATIONAL ARCHIVES

जब सीरिया का संघर्ष तेज होने लगा और उनके स्टूडेंट दोस्त उन्हें छोड़कर जाने लगे तभी अल-सईद का परिवार वहीं बने रहे. इसकी एक वजह यह भी थी कि वे अपनी किताबों से अलग होने के बारे में सोच नहीं सकते थे.

इमेज कॉपीरइट ALEPPO NATIONAL ARCHIVES

वह कहते हैं, "इनसे अलग होने बहुत मुश्किल है." वे अब भी आर्काइव तस्वीरें कनाडा में मौजूद अपने एक दोस्त की मदद से अपलोड करते हैं. अल-सईद की ये आर्काइव तस्वीरें उनके लिए भी अहम हैं जो शहर में बने हुए हैं और उनके लिए भी जो यहां से जा चुके हैं.

इमेज कॉपीरइट ALEPPO NATIONAL ARCHIVES

जंग शुरू होने से पहले अलेप्पो में 20 लाख से ज्यादा बड़ी आबादी रहती थी लेकिन अब आंकड़ें बताते हैं कि यह आधी से भी कम रह गई है.

इमेज कॉपीरइट ALEPPO NATIONAL ARCHIVES

अल-सईद कुछ पंक्तियां पढ़कर सुनाते हैं, "अलेप्पो की रूह को अल्लाह सुकून बख्शे... मैं तुम्हारी हवा के बगैर सांस भी नहीं ले सकता.... खुदा अलेप्पो की पुरानी सुबहें वापस लेकर आएं... यह दुनिया का सबसे हसीन शहर है."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार