पुतिन अमरीकी चुनाव हैकिंग में सीधे शामिल: व्हाईट हाउस

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व्हाईट हाउस का कहना है कि अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव के हैकिंग ऑपरेशन में रूसी राष्ट्रपति व्लादामीर पुतिन सीधे तौर पर शामिल थे.

राष्ट्रपति बराक ओबामा के सलाहकार बेन रोड्स ने कहा है कि सरकार के कामकाज पर पुतिन का शिकंजा मज़बूत है, जिससे ये साफ़ ज़ाहिर है कि उन्हें इस बात की ख़बर थी.

व्हाईट हाउस के प्रेस सचिव जोश अर्नेस्ट ने कहा है कि 'ये बिल्कुल साफ़ है' कि पुतिन इसमें शामिल थे.

अमरीका राष्ट्रपति चुनाव के बीच ये आरोप लगता रहा था कि रूस रिपब्लिकन उम्मीदवार और नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को जीतवाना चाहता है और चुनाव को प्रभावित करने के लिए हैकरों का सहारा लिया जा रहा है.

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Image caption जॉन पोदेस्ता के ई-मेल हैक हुए और वो पूरे चुनाव प्रचार के दौरान टुकड़ों-टुकड़ों में सामने आते रहे.

रूस इन आरोपों से इंकार करता है.

रोड्स ने कहा, "हम जानते हैं कि रूस में कामकाज किस तरह से चलता है और उसपर पुतिन की पकड़ कितनी मज़बूत है, और फिर आप जब इतने अहम साईबर अटैक की बात कर रहे हैं, तो हम बात कर रहे हैं हुकूमत के सबसे टॉप लेवल की."

उन्होंने कहा, "और आख़िरकार, व्लादामीर पुतिन ही वो अधिकारी हैं जो रूसी सरकार के कामों के लिए ज़िम्मेदार हैं."

राष्ट्रपति पुतिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने समाचार ऐजेंसी एपी से कहा कि रूस के हैकिंग की ख़बरें "हंसे जा सकनेवाला बकवास" है.

वाशिंगट से बीबीसी संवाददाता एंतनी ज़रकर का कहना है डेमोक्रेटिक पार्टी अपनी हार के कारणों को समझने के लिए जूझ रही है. क्या इसीलिए 'फ़र्जी ख़बरों' को फैलाया जा रहा है?

क्या मिडवेस्टर्न स्टेट में डेमोक्रेटिक पार्टी का कमज़ोर होना या अंतिम क्षण में एफबीआई डायरेक्टर जेम्स कोमी का बयान हिलेरी क्लिंटन पर भारी पड़ा?

कारण चाहे जो भी हो लेकिन यह स्पष्ट है कि डोनल्ड ट्रंप की अपील हिलेरी क्लिंटन के मुक़ाबले ज्यादा असरदार रही.

क्या डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए रूसी हैकर्स ताज़ा वजह हैं या उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है? रूस इस मामले में एक आकर्षक टारगेट है.

एक बात तो है कि हिलेरी क्लिंटन को ईमेल्स कैंपेन के कारण दिक्क़तों का सामना करना पड़ा लेकिन ऐसा नहीं कहा जा सकता है कि इसी वजह से डेमोक्रेटिक पार्टी को हार का सामना करना पड़ा.

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Image caption ट्रंप रूस के हैकिंग की ख़बर को ग़लत बताते हैं

नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ट्रंप भी रूसी हैकिंग की बात को सिरे से ख़ारिज करते रहे हैं.

अमरीका में लग रहे ऐसे आरोप को लेकर यूरोपीय देशों में भी चिंता शुरू हो गई है, जहां फ्रांस और जर्मनी जैसे मुल्कों में साल 2017 में चुनाव होने हैं.

जर्मनी में अगले साल चुनाव होना है. चांसलर एंगेला मेर्केल और अन्य शीर्ष अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि चुनाव के दौरान रूसी हैकर्स साइबर हमला कर सकते हैं. जर्मनी की विदेश खुफिया सर्विस ने आगाह किया है कि रूस यूरोप पर साइबर अटैक कर सकता है और जर्मनी को इस मामले में ज़्यादा ख़तरा है.

ब्रिटेन में अभी कोई चुनाव नहीं होने वाला है पर पिछले हफ्ते MI6 खुफिया चीफ़ अलेक्स योंगर ने साइबर अटैक की चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा कि यह पश्चिमी देशों के लोकतंत्र के लिए ख़तरा है. उन्होंने इसके लिए अप्रत्यक्ष रूप से रूस पर निशाना साधा था. फ्रांस में भी अगले साल 23 अप्रैल को राष्ट्रपति चुनाव होने जा रहा है. यहां के भी टॉप अधिकारी रूसी साइबर हमले को लेकर सतर्क हैं.

पुतिन को हिलेरी से समस्या इसलिए ट्रंप पंसद?

हिलरी क्लिंटन जब अमरीका की विदेश मंत्री थीं तो उन्होंने 2011 में रूस में हुए संसदीय चुनाव को लेकर सवाल खड़ा किया था. इसे लेकर पुतिन बूरी तरह से हिलेरी क्लिंटन पर भड़क गए थे. उन्होंने सार्वजनिक रूप से हिलेरी क्लिंटन पर इलजाम लगाया था कि वह रूस में विरोध-प्रदर्शनों को भड़का रही हैं. अभी तक इसका कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है, जिससे पता चले कि हिलरी क्लिंटन के ईमेल्स हैकिंग में पुतिन का हाथ है.

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