पर्ल हार्बर: जिसने बदल दी दो मुल्कों की किस्मत

शिंज़ो आबे
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शिंज़ो आबे

जापानी प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे अमरीकी द्वीप हवाई में पर्ल हार्बर का दौरा करने वाले हैं. इस मौके पर उनके साथ अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा भी साथ होंगे.

क्या है पर्ल हार्बर का किस्सा

75 साल पहले दूसरे विश्व युद्ध के दौरान साल 1941 में अमरीकी नौसैनिक अड्डे पर्ल हार्बर पर जापान ने हमला किया था. द्वितीय विश्व युद्ध में अमरीकी ज़मीन पर यह पहला हमला था.

जापान के इस हमले में 2400 से ज्यादा अमरीकी जवान मारे गए थे और 19 जहाज जिसमें आठ जंगी जहाज़ थे, नष्ट हो गए थे.

इसके अलावा 328 अमरीकी विमान भी या तो क्षतिग्रस्त हुए थे या फिर पूरी तरह से नष्ट हो गए थे.

जापान ने एक घंटे और 15 मिनट तक पर्ल हार्बर पर बमबारी की थी.

इस हमले में सौ से ज्यादा जापानी सैनिक भी मारे गए थे. इसके बाद अमरीका सीधे तौर पर दूसरे विश्व युद्ध में शामिल हो गया था और मित्र राष्ट्रों की ओर से मोर्चा संभाल लिया था.

1945 में अमरीका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर जब परमाणु बम गिराए तब इसे पर्ल हार्बर का बदला माना गया था.

द रिलक्टैंट फ़ंडामेंटलिस्ट के लेखक मोहसिन हामिद ने एक बार कहा था, "जब जापानी सेना ने सात दिसंबर 1941 की सुबह पर्ल हार्बर पर हमला किया तो वह महज एक घटना नहीं थी. पर्ल हार्बर में कई अन्य चीजें भी शामिल थीं. ये एक चुंबन था, एक झील में तैरना था, यह मछुआरों का आश्चर्य भी था आख़िर कैसा हंगामा है, यह उड़ान लेने को तैयार पक्षियों का एक झुंड था."

ये हमला अमरीका के लिए बेहद चौंकाने वाला था क्योंकि उस दौरान वॉशिंगटन में जापानी प्रतिनिधियों की अमरीकी विदेश मंत्री कॉर्डेल हल के साथ जापान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को ख़त्म करने को लेकर बातचीत चल रही थी.

अमरीका ने ये प्रतिबंध चीन में जापान के बढ़ते हस्तक्षेप के बाद लगाए थे.

ख़ुद पर लगे अमरीकी प्रतिबंधों और चीन को मित्र सेना की मदद से नाराज़ हो कर ही जापान ने अमरीका के ख़िलाफ़ युद्ध का ऐलान कर दिया था.

उसके बाद अमरीकी राष्ट्रपति फ़्रैंकलीन डी रूज़वेल्ट ने भी जापान के ख़िलाफ़ लड़ाई की घोषणा कर दी थी.

इस हमले के 75 साल बाद पहली बार जापान और अमरीका के सर्वोच्च नेता एक साथ यहां पहुंच रहे हैं.

इस साल मई में बराक ओबामा जापान के शहर हिरोशिमा जा चुके हैं. ये हिरोशिमा की किसी भी अमरीकी राष्ट्रपति की पहली यात्रा थी.

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