सू ची के ख़िलाफ़ क्यों हैं 13 नोबेल विजेता?

  • 4 जनवरी 2017
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को लिखी चिट्ठी में 13 नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने म्यांमार में मुसलमानों के साथ हो रहे बर्ताव पर चिंता जताई है.

उन्होंने इसे 'मानवीय' त्रासदी बताते हुए नस्लीय सफ़ाया और मानवता के ख़िलाफ़ अपराध क़रार दिया.

रोहिंग्या बांग्लादेश के मूल निवासी हैं और उनमें से अधिकतर इस्लाम मानते हैं. लेकिन वे बड़ी तादाद में म्यांमार में रहते हैं, जहां बौद्ध बहुसंख्यक हैं.

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चिट्ठी में लिखा गया है, "बीते दो महीने में रोहिंग्या अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ म्यांमार सेना की कार्रवाई में सैकड़ों लोग मारे गए हैं और 30,000 से अधिक लोग बेघर हो गए हैं."

इस चिट्ठी पर दस्तख़त करने वालों में आर्चबिशप डेसमंड टूटू, मोहम्मद यूनुस, मलाला युसुफ़ज़ई, ज़ूसे रामोस होर्टा और ऑस्कर एरियास भी शामिल हैं.

चिट्ठी में कहा गया है, "घर जलाए गए, महिलाओं से बलात्कार किया गया और बच्चों की हत्या की गई. महत्वपूर्ण यह है कि वहां मानवीय सहायता भी नहीं जाने दी जा रही."

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इस ख़त में म्यांमार की नेता और नोबेल पुरस्कार विजेता आंग सांग सू ची की खुल कर आलोचना की गई है.

चिट्ठी में कहा गया है, "सू ची को बार-बार अपील करने का कोई नतीजा नहीं निकला. उन्होंने रोहिंग्या मुस्लिमों के अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए कोई क़दम नहीं उठाया है."

सू ची दो दशकों तक जेल में रहने के बाद रिहा हुईं, उनकी पार्टी ने म्यांमार में लोकतांत्रिक चुनाव में बहुमत हासिल किया और दशकों के सैनिक शासन के बाद सत्ता में आने वाली पहली लोकतांत्रिक पार्टी बनी.

वे चांसलर और राज्य की सलाहकार हैं. वे देश की असली नेता समझी जाती हैं.

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