ट्रंप की नीतियों के ख़िलाफ़ न्यूयॉर्क में प्रदर्शन

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न्यूयॉर्क समेत अमरीका के कई शहरों में हज़ारों लोगों ने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की आप्रवासी नीतियों के ख़िलाफ़ ज़बदरस्त विरोध प्रदर्शन किया है.

ट्रंप ने अमरीका में ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से रहने वाले आप्रवासियों के बारे में क़ानून सख़्ती से लागू करने का आदेश जारी कर दिया है.

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ट्रंप के विरोध में प्रदर्शनों का सिलसिला जारी

भारतीय मूल के फ़िल्म अभिनेता सम्राट चक्रवर्ती भी न्यूयॉर्क में आयोजित एक विरोध रैली में शामिल थे.

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'ट्रंप अमरीका को न बांटें'

सम्राट चक्रवर्ती ने कहा, "मैं भी न्यूयॉर्क वासी हूं. अमरीका तो आप्रवासियों से ही बना है. न्यूयॉर्क शहर में अगर आप्रवासी नहीं रहेंगे तो कहां जाएंगे? आप्रवासियों के बारे में ट्रंप के फ़ैसलों से मुझे बहुत दुख हुआ है."

उन्होंने आगे कहा, "अब यह दिन आ गया है कि मेक्सिको के लोगों और मुसलमानों के ख़िलाफ़ फ़ैसले लिए जा रहे हैं. मुझे नहीं पता था कि ऐसा भी दिन देखना पड़ेगा. मैं ट्रंप से विनती करता हूं वह अमरीका को न बांटे."

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न्यूयॉर्क में रहने वाली अनीका फ़िरदौस बांग्लादेशी मूल की अमरीकी हैं. वे भी ट्रंप की नीतियों का विरोध करने के लिए रैली में शामिल हुई थीं.

फ़िरदौस ने कहा, "हम लोग बहुत डरे हुए हैं. अमरीकी मुस्लिम भी देश के अंदर डरे हुए ही हैं. ट्रंप ने ऐसा माहौल बना दिया है कि मुसलमान कहीं सफ़र करने में भी डरते हैं."

उन्होंने आगे कहा, "विदेशी मुस्लिम अमरीका आने से डर रहे हैं कि कहीं उनको पकड़कर बंद न कर दिया जाए. जिनके पास वैध वीज़ा है, उन्हें भी नौकरियों में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. ट्रंप को सबका ख़्याल रखकर नीतियां बनानी चाहिए थीं."

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Image caption बांग्लादेश मूल की अमरीकी अनीका फ़िरदौस का मानना है कि अमरीका में मुसलमान सफ़र करने से भी डर रहे हैं

भारतीय मूल की अमरीकी सीनेटर कमला हैरिस ने ट्रंप को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उनकी नीतियों की वजह से आम लोगों की सुरक्षा के लिए ख़़तरा पैदा हो सकता है.

सीनेटर हैरिस ने कहा, "आप्रवासियों के परिवारों को निशाना बनाना कोई ताक़त की बात नहीं है. जो लोग अमरीका के समाज में योगदान दे रहे हैं, दीवार बनाना और उसके लिए उन्हीं से धन मांगना किसी समस्या का हल नहीं. शहरों से कहना कि वह आप्रवासियों को सुविधाएं न दें, ग़ैर ज़िम्मेदाराना और क्रूरतापूर्ण है."

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पहली बार सीनेटर चुनी जाने वाली भारतीय मूल की अमरीकी सांसद प्रमिला जयपाल ने भी ट्रंप की आप्रवासी नीतियों की आलोचना की है.

उन्होंने कहा, "डोनल्ड ट्रंप ने लोगों को बांटने वाला अपना एजेंडा तेज़ कर दिया है. वे मां को मां के खिलाफ़, पड़ोसी को पड़ोसी के खिलाफ़ खड़ा कर रहे हैं. इससे हमारे समाज का ताना-बाना बिखर जाएगा."

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ट्रंप की नीतियों के विरोध में आयोजित रैलियों में शामिल बहुत से लोगों का कहना है कि वह विरोध करना जारी रखेंगे.

न्यूयॉर्क में रैली में शामिल अधेड़ उम्र के डेविड कहते हैं कि अब समय आ गया है कि लोगों को संगठित तरीके से ट्रंप की नीतियों का विरोध करना होगा.

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डेविड कहते हैं, "ट्रंप जो नीतियां अपना रहे हैं, वह संविधान का उल्लंघन हैं. हमें संगठित तरीके से विरोध करना होगा और लगातार करते रहना होगा. हम सुबह उठें तो अपने इलाके के सांसद को फ़ोन करके रोज़ अपना विरोध दर्ज कराएं."

उन्होंने आगे कहा, "अमरीका में फ़ासीवादी युग की शुरूआत हो गई है. लेकिन लोग बाहर निकल रहे हैं और विरोध कर रहे हैं."

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