ईरान की बेहनाज़ ने यूं मचाई सनसनी

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Image caption तीन सालों के संघर्ष के बाद महिलाओं को मिला यह हक़

शुक्रवार को जब बेहनाज़ शफियाई ने तेहरान के पास कराज में धूल भरे और ऊबड़-खाबड़ ट्रैक पर अपनी रेस पूरी की तो यह किसी इतिहास रचने से कम नहीं था.

तीन सालों से ईरान में महिला अधिकारों के लिए चल रहे कैंपेन का यह अहम वाकया था. चाहे बेहनाज़ ने रेस जीती या नहीं, लेकिन वाकई यह एक किस्म का फ़तह था.

बेहनाज़ ने रचा इतिहास

27 साल की बेहनाज़ को देश में आयोजित पहली मोटरबाइक रेस में हिस्सा लेने के लिए ईरान के खेल मंत्रालय से छूट दी गई थी. ईरान में इस्लामिक नियमों के तहत कोई महिला मोटरबाइक नहीं चला सकती है.

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महिलाओं को मोटबाइक रेस की अनुमति नहीं

30 आवेदकों में से 15 महिलाएं इस रेस में शामिल हुईं. इनमें से ज़्यादातर महिलाएं इस रेस में पहली बार शामिल हुईं. यह सब कुछ बिना कोई धूमधड़ाके के हुआ. इस दौरान पुरुषों को रेस ट्रैक पर आने की अनुमति नहीं थी. यह आदेश ईरान के खेल मंत्रालय की तरफ से जारी किया गया था.

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बेहनाज़ ने कहा, ''इस आयोजन का संचालन केवल महिलाओं ने किया. इसमें आयोजक, दर्शक से लेकर रेसर्स तक सभी महिलाएं थीं. ख़ुदा ने चाहा तो आने वाले वक़्त में यह फिर से होगा.'' हालांकि ईरान में यह लड़कियों के लिए अब भी बहुत जोखिम भरा है.

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ठीक पिछले हफ़्ते ईरान के देज़फूल शहर में दो लड़कियों को मोटरबाइक चलाने के मामले में गिरफ़्तार किया गया है. पुलिस ने इन पर अश्लीलता का आरोप लगाया है.

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जब बेहनाज़ रेस ट्रैक से वापस घर पहुंचीं तब तक मामला ठंडा पड़ चुका था. हालांकि वह अब भी सड़क पर मोटरबाइक नहीं चला सकती हैं.

विरोध से मिलती है प्रेरणा

बेहनाज़ जब 15 साल की थीं, तभी उन पर मोटरबाइक चलाने का जुनून परवान चढ़ा था. तब बेहनाज़ अपने परिवार के साथ उत्तर-पश्चिमी ईरान के ज़ंजान शहर में छुट्टियां मनाने गई थीं. उसी दौरान उन्होंने एक महिला को मोटरबाइक पर देखा था. ऐसा बेहनाज़ ने पहली बार देखा था. उसी वक्त से बेहनाज़ मोटरबाइक को लेकर सम्मोहित थीं.

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अलबोर्ज़ प्रांत में बेहनाज़ पली-बढ़ी थीं. वह वहीं अपने भाई की बाइक से ट्रेनिंग ले सकती थीं. कुछ साल बाद बेहनाज़ ने एक सुनसान सड़क पर पहली बार बाइक चलाने का साहस किया. बेहनाज़ ने इस दौरान ख़ुद को सिर से लेकर पांव तक ढंक लिया ताकि कोई पहचान नहीं सके कि बाइक को लड़की चला रही है.

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बेहनाज़ ने कहा, ''जब किसी बच्चे को कहा जाता है कि यह गर्म है और इसे टच मत करो तो उसे और छूने का मन करता है. मेरे साथ भी बिल्कुल ऐसा ही था. मेरे लिए मोटरबाइक चलाना एक सामान्य सी बात थी. ऐसा महिलाएं भी आराम से कर सकती हैं. जब मैं किसी को इस मामले में हैरानी व्यक्त करते देखती हूं तो यह मेरे लिए प्रेरणा की तरह होती है.''

पुरुष चाहतें हैं कि महिलाएं रसोई तक ही सीमित रहें

इस मामले में बेहनाज़ ने ईरान के खेल मंत्रालय से संपर्क साधा था. उन्होंने कहा, ''मैंने ख़ुद से पूछा कि क्यों महिलाओं को रेस की अनुमति नहीं है? इसका कोई माकूल जवाब नहीं मिला. मोटरबाइक रेस में महिलाओं के शामिल होने का विरोध ज़्यादातर पुरुष ही करते हैं. पुरुष हमें खाना बनाने और सफाई कराने तक ही सीमित रखना चाहते हैं. वे कहते हैं कि यह महिलाओं का काम नहीं है. पुरुषों की इस भावना से मुझे और ताकत मिलती है ताकि उन्हें मैं ग़लत साबित कर सकूं.''

खेल मंत्रालय ने बेहनाज़ से कहा था कि उन्हें हिजाब पहनना होगा. इसके बाद बेहनाज़ ने महसूस किया कि मोटरबाइक में अन्य खेलों के मुकाबले पहले से ही काफी हिजाब होता है. बाद में मंत्रालय ने शिकायत की कि हिजाब सही से नहीं पहना गया.

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खेल मंत्रालय ने कहा कि मोटरसाइकिल रेस महिलाओं का खेल नहीं है. इस मामले में तीन साल बाद मंत्रालय मोटरबाइक रेस में महिलाओं के शामिल होने को लेकर नरम पड़ा.

तीन सालों के संघर्ष का नतीजा

गुरुवार को कराज में इस रेस को पुरुषों ने रोकने की काफी कोशिश की लेकिन महिलाएं इस रेस को लेकर संकल्पित थीं. यह रेस ट्रैक गुरुवार को बर्फ़ की चादर से ढंक गया था. महिलाओं ने ट्रैक को साफ किया. उन्होंने ट्रैक की चारों तरफ टायर रखा. वहां मौजूद हर महिला की यही ख़्वाहिश थी कि किसी भी सूरत में रेस पूरी होनी चाहिए.

ईरान में खेल में महिला एक संवेदनशील मुद्दा है. महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है तो दूसरी तरफ महिलाओं के लेकर सख्ती में कोई कमी नहीं आई है. धार्मिक कट्टरपंथी महिलाओं को समान अधिकार दिलाने के मामले में बड़ी अड़चन हैं. महिलाओं को पुरुषों के खेल देखने की अनुमति नहीं होती है.

राष्ट्रपति रोहानी ने 2013 के चुनाव में महिलाओं पर सामाजिक पाबंदी में ढील देने का वादा किया था. इसी के तहत उन्होंने 2014 में महिलाओं को पुरुषों के कुछ खेलों को देखने की अनुमति दी थी. इसे लेकर काफी विवाद भी हुआ. 2015 में तेहरान में महिलाओं को स्टेडियम में वॉलिबॉल मैच देखने पर पाबंदी लगा दी गई थी.

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