पाक में चरमपंथ की जड़ पर सेना का निशाना

  • श्रुति अरोड़ा
  • बीबीसी मॉनिटरिंग, दिल्ली
जनरल क़मर जावेद बाजवा

पाकिस्तानी सेना ने देश से चरमपंथ के ख़ात्मे के लिए नया अभियान शुरू किया है रद्द-उल-फ़साद. पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा की निगरानी में चरमपंथ के ख़िलाफ़ ये पहला देशव्यापी अभियान है.

22 फरवरी को किए गए अभियान के ऐलान के अगले ही दिन पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की राजधानी लाहौर में बम धमाका हुआ और जिसमें छह लोगों की मौत हुई है और 30 लोग घायल हुए हैं.

रद्द-उल-फ़साद ऑपरेशन के निशाने पर पंजाब

रद्द-उल-फ़साद नाम में ही पाक सेना के अभियान का मक़सद नज़र आ जाता है. रद्द यानी हटाना, औऱ फ़साद यानी झगड़ा या हिंसा.

पाकिस्तान में फरवरी महीने में हुए हमलों और धमाकों में 100 से ज़्यादा लोग मारे गए, लिहाज़ा सेना ने रद्द-उल-फ़साद अभियान के तहत देश के अलग-अलग हिस्सों से चरमपंथियों का ख़ात्मा करने की योजना बनाई.

पाकिस्तानी सेना ने उत्तरी वज़ीरिस्तान में ऑपरेशन ज़र्ब-ए-अज़्ब चलाया था. ये अभियान जून 2015 में किया गया था.

इससे पहले भी पाकिस्तानी सेना देश के क़बायली इलाक़ों और स्वात घाटी क्षेत्र में सैन्य अभियान चला चुकी है.

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सेहवन शहर की दरगाह में पिछले हफ्ते बम हमला

रद्द-उल-फ़साद अभियान की अहम बात ये है कि ये पंजाब पर भी फोकस करेगा. जो कि देश के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ का गृहनगर है.

पंजाब के कुछ इलाक़े लंबे समय से कट्टरपंथियों और चरमपंथी संगठनों के गढ़ रहे हैं, जो देशभर में चरमपंथी योजनाओं को बनाने और उनको मदद पहुंचाने के केन्द्र भी हैं.

ये प्रांत सैन्य या अर्धसैनिक बलों के अभियानों को अनुमति देने के ख़िलाफ़ रहा है, अब तक राजनीतिक या अन्य कारणों से इस प्रांत को ऐसी कार्रवाईयों से अलग रखा गया है.

पाकिस्तान सेना के जनसंपर्क विभाग की ओर से 22 फरवरी को नए अभियान की घोषणा करते हुए कहा गया ' पंजाब में पुलिस रेंजर सुरक्षा /आतंकविरोधी अभियान की कोशिशों पर ज़ोर देंगे. इस ऑपरेशन को जारी रखा जाएगा और इसका फोकस सीमा सुरक्षा प्रबंधन रहेगा. अभियान का मक़सद देश में हिंसा ख़त्म करना और गोलाबारूद पर नियंत्रण करना भी है.'

पाकिस्तानी मीडिया की प्रतिक्रिया

पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक़ पंजाब पर ध्यान देना सेना प्रमुख के बदले हुए दृष्टिकोण को दर्शाता है, हो सकता है देश में आतंकवाद विरोधी रणनीति पर वो अपनी छाप छोड़ना चाहते हों.

23 फरवरी को द नेशन ने लिखा ' जनता का एक बड़ा वर्ग मीडिया से प्रभावित है, जिन्हें असल जीत ना सही तो जीत की छवि की बेहद भूख है, निश्चित तौर पर देश में हाल में हुए तबाह कर देने वाले आतंकी हमलों से जनता बेचैन है. सैन्य और ख़ुफ़िया अभियानों को दोबारा नए तरीके से पेश करना दरअसल नए नेतृत्व के तहत नई सत्ता का ऐलान है.'

विश्लेषक इकरम सहगल ने निजी टीवी चैनल डॉन न्यूज़ के एक इंटरव्यू में कहा 'ये बहुत असरदार साबित होगा. इस फ़ैसले की सख़्त ज़रूरत थी, आंतकवाद की जड़ें या बुनियादी ढांचा पंजाब में हैं, सिर्फ बुनियादी ढांचा ही नहीं बल्कि उनपर पैसा लगाने वालों, मददगारों और ख़ुद आतंकवादियों को जड़ से उखाड़ देना चाहिए. इसमें किसी तरह की राजनीतिक दख़लअंदाज़ी नहीं होना चाहिए.'

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