नौ साल का ये लड़का क्यों है आईएस का समर्थक

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हारून, ब्रिटेन बच्चा, बदला हुआ नाम
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हारुन (बदला हुआ नाम) ने बताया कि वो सप्ताहांत आईएस के वीडियो देखा करते थे, जब घर पर अकेले होते थे

छोटा मुंह, गोल चेहरा और सुंदर आंखें. वह स्मार्ट है और बीच-बीच में सवाल दागता है. दरअसल, सवाल की वजह से ही उसने अपने लिए मुसीबत खड़ी कर ली.

हारुन (बदला हुआ नाम) पश्चिमी लंदन के एक प्राइमरी स्कूल में पढ़ता है. अपनी मां और कई भाइयों के साथ लंदन में ही रहता है.

अधिकारियों के मुताबिक़, उसने क़रीब साल भर पहले एक दिन भरी क्लास में खड़े होकर कह दिया कि वह ख़ुद को इस्लामिक स्टेट कहने वाले चरमपंथी संगठन का समर्थन करता है.

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हारुन ने पेरिस हमलों की ख़बर टेलीव़जिन पर देखी थी.

स्कूल प्रशासन ने सरकार से संपर्क किया और उसे सुधारने के लिए एक कार्यक्रम में डाला गया. इस कार्यक्रम के तहत उन लोगों को ठीक किया जाता है, जिनके कट्टरपंथी बनने का ख़तरा रहता है.

हारुन कहता है, "मैंने पेरिस हमलों की ख़बर देखी थी. कंप्यूटर के सामने बैठ गया और गूगल पर आईएसआईएस तलाशने लगा. गूगल मुझे बीबीसी न्यूज़ पर ले गया. मैं सब कुछ पढ़ गया और चैनल 4 की साइट पर आईएस के लड़ाकों को देखा." हारुन इसके बाद दूसरी वेबसाइटों पर भी गया.

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हारून वेबसाइटों पर खबरें तलाशा करते थे

जिहादियों की क्रूरता

सोशल मीडिया से जुड़े लोगों का कहना है कि वहां जिहादियों और उनकी क्रूरता को देखकर ही हारुन के 'कट्टरपंथी बनने का ख़तरा बढ़ गया.' हारुन ने बताया, "मैंने क्रूरता से मारने के कुछ वीडियो देखे. मैंने उन्हें लोगों को जलाते हुए देखा."

उन्होंने कहा, लोगों को हाथ पीछे बांध कर लाया जा रहा था, उन्हें पीट कर ज़बरन नीचे बैठाया जा रहा था. हारुन ने बग़ैर पलक झपकाए कहा, "उसके बाद उन्होंने उन लोगों के सिर काट दिए."

लोगों को कट्टर बनने से रोकने के लिए कार्यक्रम 2012 में शुरू किया गया था. उसके बाद से अब तक वहां 1,000 मामले आ चुके हैं. इनमें किशोर थे और वयस्क भी.

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इस्लाम को ग़लत तरीके से दिखाने का असर

दरअसल, धुर दक्षिणपंथी साइटों पर इस्लाम को ग़लत तरीके से दिखाया गया और हारुन ने वे साइटें ही देखीं.

हारुन आगे कहता है, "मैं हफ़्ते के आख़िर में इन सारी चीज़ों को पढ़ा करता था. तब तमाम लोग बाहर चले जाते थे और घर बिल्कुल खाली हो जाता था. मैं स्कूल में कंप्यूटर के सामने बैठ तफ़्तीश किया करता था."

बच्चे आपस में लड़ते थे तो वह कहता था कि इस्लामिक स्टेट से ज़्यादा ताक़तवर हिज़्बुल्ला है. क्लास के कई बच्चे आईएस के बारे में जानते थे, क्योंकि वे मध्य पूर्व से आए हुए थे.

विशेषज्ञों ने बाद में पता लगाया कि हारुन को परेशान किया जाता था. इनका मानना है कि परेशान किए जाने की वजह से हारुन अलग-थलग पड़ता गया और इस्लामिक स्टेट में उनकी दिलचस्पी बढ़ती चली गई.

हारुन याद करता है कि एक दिन मरियम नाम की एक महिला उसके घर आई. मरियम ऐसे बच्चों तो ठीक करने काम करती हैं. सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हारुन से कहा कि वह उन चीजों की सूची बनाए जिनसे उसे ख़ुशी मिलती हो.

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'इस्लामिक स्टेट' से डर

इस बच्चे ने इस सूची में लिखा, 'शांति', 'परिवार', 'इस्लाम' और 'युद्ध'. उसे एक दूसरी सूची बनाने को कहा गया, जिनसे उसे डर लगता हो. उसमें लिखा, 'इस्लामिक स्टेट', 'स्कूल'.

सुधार कार्यक्रम में हारुन को यह बताया गया कि किसी को बुरी चीज़ें, बुरी साइटें नहीं देखनी चाहिए. मरियम ज़ोर देकर कहती हैं, "हम यह नहीं कहते कि हारुन आतंकवादी बन ही जाएगा. हम यह कहते हैं कि उसके साथ ऐसा होने की आशंका है."

हारुन पहले की तरह ही अब भी कौतूहल से भरे हुआ बच्चा है. हारुन का कहना है कि वह अकाउंटेंट या वक़ील बनना चाहता है. वह थोड़ा रूकता है और मुस्करा कर इस कड़ी में पत्रकार भी जोड़ता है.

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