अमरीका ने क्यों गिराया अफ़ग़ानिस्तान में बम?

  • तारीक़ अता और देवांशु गौर
  • बीबीसी मॉनिटरिंग
अमरीकी बम

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अमरीका ने अफ़ग़ानिस्तान में अपना सबसे बड़ा ग़ैर परमाणु बम गिराया है , लेकिन इसके लिए अमरीका ने यही समय क्यों चुना है?

कई सालों से युद्ध की मार झेल रहे अफ़ग़ानिस्तान में शांति लाने के मक़सद से रूस ने कई देशों के एक सम्मेलन का आयोजन किया है और इससे ठीक पहले अमरीका ने अफ़ग़ानिस्तान के नांगरहार में बम गिराया.

ये वॉशिंगटन और मॉस्को के बीच बड़ी भूराजनीतिक होड़ का संकेत है.

चीन, पाकिस्तान, ईरान, भारत और पांच मध्य एशियाई देशों समेत कई देश मॉस्को में शुक्रवार से शुरू हो रहो दो दिवसीय सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं.

लेकिन अमरीका इस सम्मेलन में हिस्सा लेने से इनकार कर चुका है.

इससे कहीं न कहीं ये साफ़ होता है कि अफ़ग़ानिस्तान से अमरीकी सेना की वापसी के बाद रूस की बढ़ी भूमिका को लेकर अमरीका में संशय बना हुआ है.

वॉइस ऑफ़ अमरीका का कहना है, "अमरीका के सैन्य अधिकारियों को शक है कि रूस की तरफ़ से अफ़ग़ानिस्तान के लिए तथाकथित शांति प्रक्रिया के प्रयास का लक्ष्य नैटो गठबंधन को कमज़ोर करने की कोशिश करना है. अमरीका ने रूस पर तालिबान को हथियार देने का भी आरोप लगाया है. "

'आईएस से डर, तालिबान से नज़दीकी?'

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कुछ विश्लेषकों के मुताबिक रूस पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान में तथाकथित इस्लामिक स्टेट के उदय को रोकने के लिए तालिबान की तरफ़ हाथ बढ़ा रहा है, क्योंकि रूस को डर है कि मध्य एशिया से होते हुए इस्लामिक चरमपंथी हिंसा कहीं रूस तक न पहुंच जाए.

कई रिपोर्टों के अनुसार रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और विदेश मंत्री सेर्गेई लावरोव ने अफ़ग़ानिस्तान की सरकार से तालिबान से बातचीत की अपील की है.

इसके अलावा ऐसी रिपोर्टें भी हैं कि मॉस्को में रूस, अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के अधिकारियों के बीच मुलाकातें भी हुई हैं.

कथित तौर पर रूस पर तालिबान को फंड मुहैया कराने के आरोप भी लगे हैं लेकिन मॉस्को ने इन आरोपों से इनकार किया है.

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और ये सब तालिबान की कमर तोड़ने के लिए अमरीका की कोशिशों को कमज़ोर करने जैसा है.

अमरीका कथित तौर पर तालिबान पर इसलिए वार कर रहा है ताकि शांति प्रक्रिया में उसका पक्ष कमज़ोर किया जा सके.

इस लिहाज़ से अफ़ग़ानिस्तान में अमरीका की बमबारी अहम हो जाती है क्योंकि ये रूस के तालिबान का समर्थन करने के कथित कारण पर ही वार है.

'अफ़ग़ानिस्तान की लड़ाई में अमरीका फिर सक्रिय'

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अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप

अमरीकी सेना के मुख्यालय पेंटागन ने गुरुवार को कहा था कि अमरीकी सेना ने नांगरहार प्रांत के अचिन ज़िले में मैसिव ऑर्डिनेंस एयर ब्लास्ट बम (एमओएबी) या 'मदर ऑफ़ ऑल बॉम्बज़', जिसे सबसे बड़ा बम बताया जा रहा है, गिराया था.

इस बम का निशाना अचिन ज़िले में कथित इस्लामिक स्टेट के सुरंगों का नेटवर्क था.

अफ़ग़ानिस्तान के निजी चैनल अरियाना न्यूज़ के मुताबिक, " ये अफ़ग़ानिस्तान में आईएस के ख़िलाफ़ पहला क़दम है और इससे पता चलता है कि अफ़ग़ानिस्तान की लड़ाई में अमरीका फिर से सक्रिय हो गया है. "

अफ़ग़ानिस्तान के एक विश्लेषक हाशेम वाहदात्यार ने चैनल को बताया, " इससे आईएस को बड़ा झटका लगा है और इससे सभी चरमपंथियों को संदेश गया है कि उनके खिलाफ़ भी ऐसी कार्रवाई की जा सकती है. "

तालिबान पर अमरीका की नज़र

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तालिबान को शांति प्रक्रिया में शामिल करने के लिए अमरीका की कोशिशें नाकाम होने के बाद अफ़ग़ानिस्तान को लेकर रूस की बहुपक्षीय कूटनीति में तेज़ी आई है.

2016 में, अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन ने तालिबान को शांति प्रक्रिया में शामिल करने के लिए राज़ी करने के लिए अमरीका, अफ़ग़ानिस्तान, चीन और पाकिस्तान वाले समन्वय समूह बनाया था. इससे ख़ास तौर पर रूस, ईरान और अन्य क्षेत्रीय देशों को बाहर रखा गया था.

लेकिन काफ़ी कोशिशों के बावजूद अमरीका इसमें नाकाम रहा था.

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अमरीका के पूर्व राष्ट्रपरति बराक ओबामा

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