एच1बी वीज़ा पर लगाम लगाने की मुहिम शुरू

  • ब्रजेश उपाध्याय
  • बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन
अपनी पत्नी के साथ डोनल्ड ट्रंप.

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अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने उस आदेश पर दस्तख़त कर दिए हैं जिसके तहत एच1बी वीज़ा कार्यक्रम की समीक्षा की जाएगी.

असल में इसे इस वीज़ा कार्यक्रम पर लगाम कसने की शुरुआत माना जा रहा है.

डोनल्ड ट्रंप ने आदेश पर दस्तख़त करने के बाद कहा, "हमारे इमिग्रेशन सिस्टम में गड़बड़ी की वजह से हर तबके के अमरीकियों की नौकरियां विदेशी कामगारों के हिस्से जा रही हैं. कंपनियां, कम वेतन देकर विदेशियों को नौकरी पर रख लेती हैं जिससे अमरीकियों की नौकरियां मारी जा रही हैं. ये सब अब ख़त्म होगा. लंबे समय से अमरीकी कर्मचारी वीज़ा सिस्टम के दुरुपयोग को ख़त्म करने की मांग करते रहे हैं. आज उनकी मांगों पर पहली दफ़ा अमल किया जा रहा है."

एच1बी वीज़ा की समीक्षा में सरकारी विभागों से सुधार के सुझाव मांगे जाएंगे.

साथ ही संस्थाओं को निर्देश दिए गए हैं कि सरकारी प्रोजेक्ट्स से विदेशी कंपनियों को दूर करने के सरकारी नियम सख्ती से अमल में लाए जाएं.

अमरीकी राज्य विसकॉन्सिन की एक फ़ैक्टरी में यात्रा के दौरान ट्रंप ने सरकारी सामानों की खरीदारी में अमरीका में निर्मित वस्तुओं की बिक्री बढ़ाने के लिए भी एक आदेश जारी किया.

व्हाइट हाउस के दो अधिकारियों के अनुसार ये दोनों आदेश ट्रंप के "बाय अमेरिकन, हायर अमेरिकन (Buy American, Hire American) नीति के तहत जारी किए गए.

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ट्रंप का ये फ़ैसला राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दौरान उनके 'अमेरिकन फ़र्स्ट' चुनावी वादे को पूरा करने की दिशा में उठाया गया क़दम बताया जा रहा है.

हालांकि उन्होंने प्रचार के दौरान एच1बी वीज़ा कार्यक्रम को पूरी तरह से ख़त्म करने की बात कही थी लेकिन अब तक वो ऐसा नहीं कर पाए हैं.

एच1 बी वीज़ा के तहत अमरीका में हाइ स्किल्ड नौकरियों के लिए कंपनियां विदेशी लोगों को भेजती हैं. इस वीज़ा कार्यक्रम के तहत आईटी संबंधित नौकरियों के लिए बड़ी संख्या में भारतीय इंजीनियरों को सॉफ़्टवेयर कंपनियां अमरीका भेजती हैं.

डोनल्ड ट्रंप तर्क देते रहे हैं कि इस वजह से अमरीकियों को ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ता है क्योंकि उनकी नौकरियां विदेशी लोगों के हिस्से आ जाती हैं.

कामगारों के हित

एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार एच1बी से जुड़े ट्रंप के आदेश में श्रम, न्याय, गृह और विदेश मंत्रालय से कहा जाएगा कि वो अमरीकी आप्रवासन तंत्र में चल रही "धांधली" को रोकने के लिए कदम उठाएं जिससे अमरीकी कामगारों के हितों की रक्षा हो सके.

इस आदेश में ये भी कहा जाएगा कि वो ऐसे सुधार लाएं जिसके तहत ये सुनिश्चित किया जा सके कि एच1बी वीज़ा सबसे ज़्यादा दक्षता या सबसे ज़्यादा वेतन पाने वाले आवेदकों को ही मिले.

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अमरीका में काफ़ी समय से ये बहस चल रही है कि एच1बी वीज़ा क़ानून का ग़लत इस्तेमाल हो रहा है और और ख़ासतौर से भारत से बेहद कम वेतन पर लोगों को लाकर अमरीकी नागरिकों को नौकरियों से वंचित किया जा रहा है.

अमरीकी सरकार हर साल 65,000 एच1बी वीज़ा लॉटरी के ज़रिए जारी करती है. लेकिन कई आउटसोर्सिंग कंपनियों की इस बात के लिए आलोचना हो रही है कि वो भारी संख्या में वीज़ा आवेदन डालती हैं और ज़्यादा से ज़्यादा वीज़ा हासिल करके टेक्नॉलॉजी से जुड़ी निचले स्तर की नौकरियों में अपने लोगों को भर देती हैं.

अमरीकी आप्रवासन विभाग के अनुसार इस बार एच1बी वीज़ा आवेदकों की संख्या में 2016 के मुकाबले बड़ी गिरावट आई है. पिछले साल दो लाख छत्तीस हज़ार लोगों ने इसके लिए आवेदन पत्र भरे थे जबकि इस बार ये संख्या एक लाख निन्यानबे हज़ार थी.

अंदाज़ा है कि वीज़ा नियम में इन बदलावों से कई भारतीय कंपनियों को ख़ासा नुकसान हो सकता है.

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