नज़रिया: हसन रूहानी की जीत के ऐतिहासिक मायने

  • 22 मई 2017
इमेज कॉपीरइट AFP GETTY

ईरान के राष्ट्रपति चुनाव में हसन रूहानी की जीत बड़ी ऐतिहासिक है जो वहां के कट्टरपंथियों के लिए एक बड़ा झटका है.

हसन रूहानी की जीत का मतलब है कि ईरान की जनता ने तय कर लिया है कि वो कट्टरपंथ नहीं बल्कि तुलनात्मक रूप से उदारवाद पर ही कायम रहेंगे.

ईरान ने पिछले साल अमरीका और दुनिया की बाक़ी ताकतों के साथ परमाणु समझौता किया था जिसका विरोध भी हुआ था.

विरोधियों की हार

इमेज कॉपीरइट AFP GETTY

रूहानी की जीत उन लोगों की बड़ी हार है जो अमरीका और दुनिया की बाक़ी ताकतों के साथ परमाणु समझौते की आलोचना कर रहे थे.

ऐसा लगता है कि ईरान ने एक कूटनीतिक निर्णय लिया है कि वो अमरीका, फ्रांस, ब्रिटेन, यूरोप समेत तमाम देशों से अच्छे संबंध रखेगा. साथ ही राजनीतिक और क्षेत्रीय मतभेदों को भी ध्यान में रखेंगे.

हसन रूहानी अब अगले चार साल में ना केवल पश्चिम के देशों बल्कि सऊदी अरब जैसे खाड़ी देशों के साथ भी अच्छे संबंध बनाने की कोशिश करेंगे.

चबहार से होगी बहार

इमेज कॉपीरइट AFP GETTY

ईरान अब मध्य एशिया में एक बड़ा औद्योगिक केंद्र बनना चाहता है, और इसी सिलसिले में संपर्क बढ़ाने के इरादे से चाबहार बंदरगाह बनाया जा रहा है.

विकास के मुद्दे पर ईरान में आम सहमति बनी है जो नज़र आ रही है. ईरान अब तेल क़ारोबार पर अपनी निर्भरता ख़त्म करना चाहता है.

अब इस बात की आशंका कम है कि अमरीका ईरान पर और प्रतिबंध लगाएगा. रूहानी के दोबारा राष्ट्रपति बनने से भारत-ईरान के रिश्ते भी आगे बढ़ेंगे.

भारत का फ़ायदा

भारत को डर लगा रहता था कि अमरीका ईरान पर और प्रतिबंध ना लगा दे, लेकिन अब ईरान के संबंध पश्चिमी देशों से अच्छे होंगे.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

भारत और भारतीय कंपनियों के लिए ये अच्छी बात होगी. चाबहार बंदरगाह के काम में अब तेज़ी आएगी. चबहार से अफ़ग़ानिस्तान की कनेक्टिविटी भी हो जाएगी.

जापान और दक्षिण कोरिया का निवेश भारत चाबहार में लाने की कोशिश कर रहा है. भारत को मध्य एशिया के लिए दरवाज़ा मिल जाएगा. अगले चार साल में ईरान के साथ भारत के संबंध प्रगाढ़ होंगे.

ऐतिहासिक रूप से, भारत के संबंध ईरान के उदार नेतृत्व से अधिक अच्छे रहे हैं. रूहानी की जीत से ईरान में लोकतंत्र और मज़बूत होगा.

सवाल सुप्रीम लीडर का

इमेज कॉपीरइट EPA

रूहानी के दूसरे कार्यकाल में जो एक ख़ास बात होने वाली है, वो ये है कि अगले 4 साल के भीतर ईरान के नए सुप्रीम लीडर का चुनाव होना है.

चुनाव में जीत के साथ ही तय हो गया है कि ईरान के अगले सुप्रीम लीडर के चुनाव में रूहानी की बड़ी भूमिका होगी.

(बीबीसी संवाददाता संदीप सोनी के साथ बातचीत पर आधारित)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

मिलते-जुलते मुद्दे