क़तर संकट और ट्रंप: पहले छेड़ा, अब मदद के लिए बढ़ाए हाथ

क़तर

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन,

फ़लस्तीन के गाज़ा शहर की हारुन अल-राशिद सड़क पर मरम्मत में क़तर ने आर्थिक मदद की है

क़तर और बाकी अरब देशों के बीच राजनयिक संकट दूर किए जाने की कोशिशें हो रही हैं.

क़तर के टेलीविज़न नेटवर्क अल जज़ीरा के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप ने क़तर के नेता को बताया है कि वह क्षेत्र में पैदा हुए इस संकट का हल खोजने के लिए तैयार हैं.

जर्मनी के विदेश मंत्री ज़िगमार गैब्रियल ने अपने सऊदी समकक्ष से बैठक के बाद कहा कि उन्होंने साफ़ कर दिया है कि यूरोप नहीं चाहता कि कोई पक्ष अब मामला आगे बढ़ाए.

उधर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सफ़ाई देते हुए कहा कि अरब देश क़तर में सत्ता परिवर्तन नहीं चाहते हैं.

लेकिन यूएई ने अपने यहां यह धमकी भी दी है कि क़तर की सहानुभूति में कुछ छापने वाले को 15 साल जेल की सज़ा सुनाई जाएगी.

इमेज स्रोत, AFP

क़तर सरकार

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
पॉडकास्ट
बात सरहद पार

दो देश,दो शख़्सियतें और ढेर सारी बातें. आज़ादी और बँटवारे के 75 साल. सीमा पार संवाद.

बात सरहद पार

समाप्त

क़तर प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि क़तर ने ईरान और तुर्की से खाने की आपूर्ति के संबंध में बात की है.

तुर्की की संसद ने क़तर में सैनिकों की तैनाती से जुड़े एक ड्राफ्ट बिल को भी मंजूरी दे दी है.

इससे पहले क़तर के विदेश मंत्री शेख़ मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी ने 'अल जज़ीरा' से कहा कि उनका देश इसका जवाब देने नहीं जा रहा है. लेकिन वह इस बात से ख़ुश नहीं हैं कि क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी क़तर पर अपनी इच्छा थोपने और उसके अंदरूनी मामलों में दख़ल देने की कोशिश कर रहे हैं.

बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनका देश इस 'घेराबंदी' से निपटने के लिए तैयार है.

उन्होंने ये भी शिकायत की कि क़तर के लोगों को बाकी अरब देश मिलकर सज़ा दे रहे हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से हालिया मध्य-पूर्व यात्रा के दौरान क़तर सरकार ने कहा था कि इस बात के सबूत नहीं हैं कि क़तर चरमपंथी ताक़तों का समर्थन कर रहा है. उन्होंने इन आऱोपों को 'गढ़े हुए सबूतों और झूठों' पर आधारित बताया.

ऑडियो कैप्शन,

क़तर संकट आगे क्या होगा?

बीबीसी वाशिंगटन संवाददाता बार्बरा प्लेट यूशर का विश्लेषण

जहां तक आतंकवाद की फंडिंग की बात है, किसी के हाथ साफ़ नहीं हैं. क़तर, सऊदी और कुवैत- तीनों देशों के लोगों ने सीरिया विवाद में चरमपंथियों की आर्थिक मदद की है और फिर सभी ने अमरीका के दबाव में हाथ वापस खींच लिए.

लेकिन क़तर की गतिविधियां बाक़ियों के मुक़ाबले ज़्यादा शक के दायरे में हैं क्योंकि वह ख़ुद को एक तटस्थ खिलाड़ी के तौर पर देखता है जो ईरान और सऊदी अरब के बीच एक मध्यस्थ के तौर पर काम कर सकता है.

जो भी मामला हो, अमरीकी रक्षा मंत्रालय का स्वर राष्ट्रपति ट्रंप की तरह विजेता जैसा नहीं है. अमरीका का मध्य पूर्व में सबसे बड़ा हवाई अड्डा क़तर में बन रहा है, जो इराक़ और सीरिया में इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ मुख्य केंद्र होगा.

इमेज स्रोत, AFP

ट्रंप की कोशिश

इससे पहले अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि उनके कहने पर ही कथित तौर से आतंकवाद का समर्थन करने वाले क़तर को मुस्लिम देशों ने अलग-थलग कर दिया है.

ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने अपनी हालिया यात्रा के दौरान सऊदी अरब को कहा था कि क़तर "अतिवादी विचारधारा" का समर्थन कर रहा है और उन्हें फ़ंड दे रहा है.

ट्रंप ने कहा कि उनके लौटते ही, उनकी हालिया सऊदी अरब यात्रा का असर भी दिखने लगा है.

सऊदी अरब की राजधानी रियाद में दिए अपने भाषण में ट्रंप ने ईरान को मध्य-पूर्व में अस्थिरता का दोषी ठहराया था. साथ ही मुस्लिम देशों से कट्टरपंथ के ख़िलाफ़ खड़े होने का आग्रह किया था.

वीडियो कैप्शन,

क़तर क्यों पड़ा अलग और भारत के लिए वो ज़रूरी क्यों?

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)