'ईरानियों ने ही किया तेहरान पर हमला'

ईरान के सुरक्षाकर्मी

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ईरान ने कहा है कि राजधानी तेहरान में हमला करके 12 लोगों की जान लेने वाले दरअसल वो ईरानी हैं, जो तथाकथित इस्लामिक स्टेट (आईएस) में शामिल हो गए हैं.

ईरान के सरकारी टेलीविज़न को दिए एक साक्षात्कार में ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के उप प्रमुख रज़ा सैफ़ुल्लाही ने कहा कि हमलावर वो थे जो ''ईरान के ही कई क्षेत्रों से आईएस में शामिल हो गए.''

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इससे पहले इस्लामिक स्टेट ने इस हमले की ज़िम्मेदारी लेते हुए ईरान में शिया मुसलमानों पर और हमले करने की चेतावनी दी थी.

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ईरान के रेवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने इसका मुंहतोड़ जबाव देने का प्रण लेते हुए अमरीका और सऊदी अरब पर उंगली उठाई है. अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में सऊदी अरब का दौरा किया था.

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तेहरान में संसद के भीतर और धार्मिक नेता अयातुल्लाह ख़ुमैनी की मज़ार पर गोलीबारी.

अमरीका और सऊदी अरब दोनों ने ही इस हमले की भर्त्सना की है.

शिया-सुन्नी विवाद

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पश्चिम एशिया मामलों के जानकार क़मर आग़ा का कहना है कि दुनियाभर में शिया-सुन्नी विवाद बढ़ रहे हैं जो आने वाले समय में और भी गंभीर रूप लेंगे. ये झगड़ा कम होता दिखाई नहीं दे रहा है.

मध्यपूर्व में इस समय सुन्नियों में दो तरह की विचारधाराएं हैं- एक वहाबी सलाफ़ी और दूसरी है अख़्वाने मुसलमीन यानी मुस्लिम ब्रदरहुड.

दोनों में ही काफ़ी प्रतिद्वंदिता है और दोनों का ही प्रभाव बढ़ रहा है. सऊदी अरब नहीं चाहता है कि इस क्षेत्र में मुस्लिम ब्रदरहुड का प्रभाव बढ़े.

क़तर के साथ भी राजनयिक संबंध मुस्लिम ब्रदरहुड की वजह से ही ख़त्म किए गए हैं, क्योंकि क़तर लगातार मुस्लिम ब्रदरहुड का समर्थन करता रहा है.

दूसरी ओर सऊदी अरब इराक़ में शिया सरकार को मान्यता नहीं देना चाहता है. भले ही वहां शिया बहुसंख्यक हों.

सऊदी का मानना है कि यह क्षेत्र सुन्नियों के प्रभाव वाला है.

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