छह महीने में 400 से अधिक एसिड अटैक

  • 19 जुलाई 2017

बीते गुरुवार को पूर्वी लंदन में पांच लोगों पर तेजाब फेंकने की घटनाओं के बाद एसिड से संबंधित कड़े कानून की मांग तेज़ हो गई है. इन मांगों में एसिड की बिक्री पर पाबंदी की मांग भी शामिल है.

पुलिस के मुताबिक़ एसिड फेंके जाने की घटनाओं में साल 2012 की तुलना में दो गुना वृद्धि हुई है और ऐसी घटनाएं ज्यादातर लंदन में हुई हैं.

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लंदन के नाइट क्लब में 'एसिड अटैक'

एसिड अटैक के लिए पहले से ही इंग्लैंड में उम्र कैद की सज़ा का प्रावधान है. गृहमंत्री एम्बर रड ने संडे टाइम्स ने कहा, "वो चाहती हैं एसिड अटैक के दोषियों को इस क़ानून की ताकत का एहसास हो."

कठोर दंड की मांग

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राजनेता और एसिड अटैक से पीड़ित लोग इन हमलों में शामिल लोगों को और कठोर दंड देने की मांग कर रहे हैं.

एसिड अटैक में शामिल लोगों के ख़िलाफ़ मामले में मौजूदा क़ानून की समीक्षा की जाएगी और इस बात पर विचार किया जाएगा कि एसिड अटैक के पीड़ितों को कैसे मदद प्रदान की जा सकती है.

इसके अलावा किसी के पास एसिड बरामद होने या फिर किसी की मदद से हमले करने के इरादे साबित होने की स्थिति में चार साल तक कैद की सज़ा हो सकती है.

नेशनल पुलिस चीफ़ कौंसिल (एनपीसीसी) का कहना है कि छह महीने के दौरान इंग्लैंड और वेल्स में 400 से अधिक एसिड अटैक किए गए हैं.

भयानक अपराध

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Image caption एम्बर रड

एम्बर रड ने एसिड अटैक से प्रभावित लोगों के बारे में कहा, "एसिड अटैक एक भयानक अपराध हैं. इसमें पीड़ितों पर शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है."

उन्होंने कहा, "यह बहुत जरूरी है कि इस तरह के हमलों को रोकने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएं."

एम्बर रड ने कहा है कि एसिड अटैक से संबंधित क़ानून पहले से ही काफी सख़्त है. कई मामलों में एसिड अटैक के दोषी उम्र कैद तक की सज़ा काट रहे हैं, लेकिन हम अपनी जवाबदेही को और बेहतर कर सकते हैं और इसे करेंगे.

मौजूदा क़ानून

Image caption एसिड अटैक की पीड़ित केटी पाइपर

इंग्लैंड में मौजूदा क़ानून के तहत अगर पुलिस किसी ऐसे व्यक्ति को रोकती है जिसके पास एसिड है तो पुलिस को यह साबित करना पड़ता है कि एसिड का उपयोग ग़लत उद्देश्यों के लिए किया जाना था.

एसिड अटैक की एक पीड़ित केटी पाइपर कहती हैं, "इन हमलों के पीड़ितों को ताउम्र इसके दुष्परिणामों को झेलना पड़ता है. ऐसे हमलों में शामिल लोगों को इतने कड़े दंड मिलने चाहिए कि उनके अंदर डर पैदा हो."

स्कार्स, बर्न्स और हीलिंग मेडिकल जर्नल में छपे एक ख़त में उन्होंने लिखा है, "मुझे हमेशा ऑपरेशन और थेरेपी से गुजरना पड़ता है. एसिड अटैक के पीड़ितों की ऐसी स्थिति हो जाती है जैसे कि वो उम्रकैद झेल रहे हों."

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