अगर उत्तर कोरिया से युद्ध हुआ तो क्या हैं विकल्प

  • 30 अगस्त 2017
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Image caption रॉकेट लॉन्च की इस तस्वीर को उत्तर कोरिया ने जारी किया है

उत्तर कोरिया द्वारा जापान के ऊपर से मिसाइल दागने के बाद अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि 'मेज़ पर सभी विकल्प मौजूद' हैं. तो किम जोंग उन शासन के ख़िलाफ़ क्या सैन्य कार्रवाई की जा सकती है?

जापान के होक्कैदो आइलैंड के ऊपर से मिसाइल दागने को एक भड़काऊ कदम माना जा रहा है. वहीं, उत्तर कोरिया ने कहा है कि यह तो अभी पहला कदम है.

वहीं, संयुक्त राष्ट्र द्वारा कई प्रतिबंध लगाने के बावजूद अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि वह दूसरे कदमों पर विचार कर रहे हैं. उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ क्या-क्या कार्रवाई हो सकती है. आइए डालते हैं उन पर नज़र.

उत्तर कोरिया के साथ कैसे रह पाएगी दुनिया

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Image caption दक्षिण कोरिया का सहयोगी है अमरीका

पहला विकल्प: ज़मीनी हमला

यह कार्रवाई सबसे कम घातक और सबसे कम प्रभावी कार्रवाई का विकल्प हो सकती है. इसके द्वारा उत्तर कोरिया के बैलिस्टिक मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों को रोकने में कम ही सफ़लता मिलेगी.

इसमें अमरीका अपनी ज़मीनी सेना को दक्षिण कोरिया में स्थापित कर सकता है. साथ ही ज़मीनी मिसाइल और भारी हथियारों को भी तैनात कर सकता है. हालांकि, दक्षिण कोरिया ऐसा कम ही करना चाहेगा.

पहली वजह यह है कि दक्षिण कोरिया ने अपनी थाड मिसाइलों को तैनात कर रखा है और अमरीकी फ़ौजों के उसकी ज़मीन पर आने से उत्तर कोरिया भड़क सकता है. वैसे अमरीका और दक्षिण कोरिया युद्धाभ्यास करते रहे हैं और उस पर उत्तर कोरिया की प्रतिक्रिया भी आती रही है.

ऐसी कार्रवाई पर चीन और रूस अमरीका की आलोचना भी कर सकते हैं. अमरीका अपनी नौसेना के ज़रिए कोरिया के नज़दीक समुद्र में मौजूद है. वह अपने युद्धपोतों के अलावा अपनी वायुसेना का प्रयोग भी उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ कर सकता है.

उत्तर कोरिया की मिसाइल से डरना ज़रूरी क्यों?

इसके अलावा उत्तर कोरिया की क्षमता पर भी शक नहीं करना चाहिए क्योंकि कोरियाई समुद्र में अमरीका की ताक़त सीमित ही है जबकि उत्तर कोरिया के पास काफ़ी संख्या में बैलिस्टिक मिसाइल हैं.

इस तरह की नीति काफ़ी ख़र्चीली हो सकती है. साथ ही इसमें शक है कि यह उत्तर कोरिया को अधिक चुनौती दे पाए.

300 शब्दों में उत्तर कोरिया का मिसाइल कार्यक्रम

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Image caption दक्षिण कोरिया और अमरीका करते रहे हैं युद्धाभ्यास

दूसरा विकल्प: सर्जिकल स्ट्राइक

अमरीका की नौसेना और वायुसेना के पास इस धरती के किसी भी हिस्से में सबसे उन्नत सर्जिकल स्ट्राइक करने की क्षमता है. टॉमहॉक मिसाइल और बी-2 बॉम्बर्स के हमले से उत्तर कोरिया के परमाणु स्थल नष्ट हो सकते हैं.

हालांकि, उत्तर कोरिया का एयर डिफेंस नेटवर्क भी बड़ा है जिसमें सोवियत संघ और वर्तमान रूस के मिश्रित हथियार हैं. साथ ही उसके पास ज़मीन से हवा मे मार करने वाली मिसाइल और उन्नत रडार सिस्टम है.

उत्तर कोरिया की रक्षा प्रणाली भी खासी मज़बूत है. अगर अमरीकी विमान उत्तर कोरिया में गिरते हैं तो उसके चालक दल को निकालना मुश्किल होगा. उत्तर कोरिया की पीपुल्स आर्मी अमरीका की साथी दक्षिण कोरिया से बदला भी ले सकती है.

उत्तर कोरिया के पास लाखों सैनिक हैं जिसमें से केवल 60 लाख रिज़र्व और पैरामिलिट्री के जवान हैं. उत्तर कोरिया अगर दक्षिण कोरिया पर हमला कर देता है तो उसके निशाने पर राजधानी सियोल के एक करोड़ लोग होंगे.

इस बार जापान के ऊपर से उड़ी उत्तर कोरिया की मिसाइल

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Image caption उत्तर कोरिया की सेना भी है मज़बूत

तीसरा विकल्प: व्यापक हमला

उत्तर कोरिया पर हमला करने के लिए अमरीका को एक महीने की तैयारी करनी होगी और साथ ही उसको इसमें दक्षिण कोरिया का पूरा सहयोगा चाहिए होगा. इसके अलावा उत्तर कोरिया की रहस्यमय परमाणु क्षमताओं को विफल करने की भी पूरी जानकारी ज़रूर होनी चाहिए.

इसमें दोनों ओर की हज़ारों जानें भी जा सकती हैं.

साथ ही भारी बमबारी की भी आवश्यकता पड़ेगी. वहीं, उत्तर कोरिया की पीपुल्स आर्मी के पास दक्षिण कोरिया में घुसपैठ की लंबी ट्रेनिंग है जिसका पता लगा पाना काफ़ी मुश्किल है. इसके कारण बड़े पैमाने पर संघर्ष की स्थिति पैदा हो जाएगी. हालांकि, उच्च तकनीक वाले अमरीका और दक्षिण कोरियाई सेना को भी नुकसान होगा.

1950 में कोरियाई युद्ध के समय अमरीका और उसके सहयोगियों ने उत्तर कोरिया पर बढ़त बनाई थी. वहीं, उत्तर कोरिया की ओर से चीन युद्ध में शामिल हुआ था. इस तरह की तस्वीर अगर इस बार बनती है तो इस बार चीन इसमें शामिल होता नहीं दिखेगा.

आपको मालूम है महात्मा गांधी का उत्तर कोरिया से कनेक्शन?

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