क्या उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन की हत्या की साज़िश हो रही है?

  • डॉ. जॉन निलसन-राइट
  • चैटम हाउस
किम जोंग उन

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उत्तर कोरिया के तीन सितंबर को किए गए परमाणु परीक्षण के बाद आई रिपोर्टों के मुताबिक दक्षिण कोरिया ने किम जोंग उन की हत्या के लिए विशेष दल की स्थापना को हरी झंडी दी है.

अगर ऐसा है तो ये साफ़ संकेत मिलता है कि ये क़दम दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन की विदेश नीति में आया एक अहम मोड़ है.

उत्तर कोरिया ने तीन सितंबर को सफल परमाणु परीक्षण करने का दावा किया. यह उत्तर कोरिया का छठा परमाणु परीक्षण है.

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन ने इसी साल जुलाई में जर्मनी की राजधानी बर्लिन में कोरियाई प्रायद्वीप में स्थाई शांति स्थापित करने, उत्तर कोरिया का विनाश रोकने और उसके ख़िलाफ़ लगे आर्थिक और रक्षा क्षेत्र के प्रतिबंधों में ढील देने की बात कही थी. लेकिन रिपोर्टों के मुताबिक उनका रुख़ एक आक्रामक मोड़ लेता दिखता है.

नीति में बदलाव क्यों?

तो उत्तर कोरिया के साथ बातचीत की पैरवी करने वाले प्रगतिशील नेता मून जे इन की नीति में अचानक ये बदलाव क्यों आया है?

उत्तर कोरिया को रोकने में सैन्य उपायों और अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के आग उगलने वाले बयानों के नाकाम रहने से सियोल के नेता डरे हुए हैं क्योंकि इनमें से कोई भी तरीका प्योंगयांग को अपनी सेना के आधुनिकीकरण से रोकने में कामयाब नहीं हो पाया है.

लगभग तय ही माना जाए कि आने वाले दिनों में उत्तर कोरिया और परमाणु परीक्षण करेगा.

ऐसी रिपोर्टें भी हैं कि उत्तर कोरिया की परमाणु परीक्षण फ़ैसिलिटी 'पुनग्ये-री' में कुछ हलचल जारी है. ये सातवें परमाणु परीक्षण की तैयारी का संकेत भी हो सकता है.

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दुनिया आगे भी उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल परीक्षण की संभावना से इनकार नहीं कर सकती

अगर उत्तर कोरिया स्पष्ट रूप से शक्तिशाली और लघु परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता वाली लंबी दूरी की मिसाइलें अमरीका के शहरों पर दागने में सक्षम हो गया, तो न चाहते हुए भी अमरीकी योजनाकारों को कोरियाई प्रायद्वीप पर सैन्य कार्रवाई की ज़रूरत को मानना पड़ेगा.

रिपब्लिकन सांसद लिंडसे ग्राहम ने कई बार कहा है कि अमरीकी शहरों को उत्तर कोरिया के निशाने पर आने से रोकने के लिए ये ख़तरा उठाना होगा जिसमें दक्षिण कोरिया के बड़े पैमाने पर नागरिकों और सैनिकों की जानें जोख़िम में पड़ जाए.

कहीं न कहीं साफ़ तौर पर लिंडसे ग्राहम की सोच का गहरा असर डोनल्ड ट्रंप पर दिखा भी है.

उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन को जान का ख़तरा दिखाकर शायद सियोल अपने ऊपर मंडरा रहे इस जोख़िम को टालने की उम्मीद करता है.

लेकिन क्या हत्या की इस धमकी में कोई वज़न है और क्या इससे उत्तर कोरिया डर जाएगा?

उन्मादी नेतृत्व

इससे पहले, उत्तर कोरिया के नेताओं ने इस तरह के ख़तरों को गंभीरता से लिया है.

उदाहरण के तौर पर, मार्च 1993 में जब उत्तर कोरिया और अमरीका के बीच तनाव चरम पर था, किम जोंग-उन के पिता किम जोंग-इल ने क़रीब पूरा महीना एक सुरक्षित बंकर में ही गुज़ारा था. ये वो वक्त था जब उत्तर कोरिया ने परमाणु अप्रसार संधि से पीछे हटते हुए युद्ध जैसे हालात खड़े कर दिए थे.

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अमरीका को भड़काने के डर से किम जोंग-इल को छुपना पड़ा था, लेकिन इसके बावजूद उत्तर कोरिया के रवैये में कोई बदलाव नहीं आया, उसने आक्रामकता के साथ कई अंतरराष्ट्रीय नियमों और पहले के समझौतों का धड़ल्ले से उल्लंघन जारी रखा.

उत्तर कोरिया का इतिहास देखें तो विदेश से दबाव को देखते हुए नेताओं ने कई रचनात्कमक तरीके अपनाए हैं. जब भी विदेश से हमलों का ख़तरा मंडराता दिखा है तो इस देश के उन्मादी नेताओं का हौसला बढ़ा है.

पहले ही नहीं आज भी, उत्तर कोरिया के नेता को किसी भी औचक हमले से बचाने के लिए डमी गाड़ी का इस्तेमाल होता है. ये नेता सार्वजनिक स्थलों पर बड़े घेरे में जाते रहे हैं ताकि किसी भी हमले की स्थिति से झांसा देकर बचा जा सके.

मई में कुछ महीनों पहले उत्तर कोरिया ने अमरीका पर उत्तर कोरियाई नागरिकों को किम जोंग उन पर जैविक हमला करने के लिए रिश्वते देने के लिए सीआईए को भड़काने का आरोप लगाया था.

प्रोपेगैंडा?

उत्तर कोरिया के दावों की पुष्टि करना तो मुश्किल है, लेकिन ये उत्तर कोरिया की खुद की साज़िशों से ध्यान हटाने का प्रोपेगैंडा भी हो सकता है. उदाहरण के तौर पर फ़रवरी में मलेशिया में किम जोंग उन के बड़े भाई किम जोंग-नम की एक जानलेवा नर्व एजेंट से की गई हत्या का मामला.

किम जोंग उन पर वार की योजना को लेकर दक्षिण कोरिया को बहुत सचेत रहना होगा क्योंकि अगर किम की हत्या की कोशिश नाकाम रहती है तो उत्तर कोरिया की तरफ़ से सीमित सैन्य कार्रवाई जैसे कदम उठाया जा सकता है. ऐसे किसी संघर्ष के पूर्ण परमाणु युद्ध में बदलने का ख़तरा हो सकता है.

किम को सीधे धमकी देने के पीछे दक्षिण कोरियाई नीतिकारों का गणित ये भी हो सकता है कि प्योंगयांग में किम जोंग उन के इर्द-गिर्द रहने वाले राजनीतिक इलीट को तख्तापलट के लिए उकसाया जा सके. हालांकि किम जोंग उन की छवि बेहद कठोर नेता की है जिससे उनके सिपहसालार काफ़ी डरते हैं.

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किम जोंग उन ने 2011 दिसंबर में अपने पिता की मौत के बाद सत्ता संभाली थी

हाल ही में उत्तर कोरिया से भागे एक जाने-माने शख्स ने बताया कि तख्तापलट की संभावना काफ़ी कम है.

उत्तर कोरिया के उच्च वर्गीय नेता किम जोंग उन से जितना डरते हैं और जितनी नफ़रत करते हैं उतने ही आशंकित वो अपने ही देश में अपने विरोधियों से होने वाले ख़तरे को लेकर हैं.

कोई विकल्प नहीं

तो इन हालातों में किम जोंग की हत्या की योजना के सफल होने की संभावना कम नज़र आती है.

ये भी हो सकता है कि मून प्रशासन उत्तर कोरिया के ख़तरे के बीच दक्षिण कोरिया में परमाणु क्षमता बढ़ाने की रूढ़िवादी तबके की मांग को दबाने की उम्मीद भी कर रहा हो.

दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री ने हाल ही में देश में सामरिक परमाणु हथियारों को फिर से लाने का समर्थन किया था, हालांकि सरकार इस क़दम के पक्ष में नहीं है क्योंकि मून जे इन की सरकार को डर है कि इससे क्षेत्र में हथियारों की होड़ बढ़ेगी जो नुकसानदेह और अस्थिर करने वाली साबित हो सकती है.

राष्ट्रपति मून जे इन उत्तर कोरिया से बातचीत की संभावना को अभी ख़त्म करना नहीं चाहते हैं.

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सियोल को कोरियाई प्रायद्वीप में परमाणु हथियारों की होड़ की चिंता है

मून जे इन को उत्तर कोरिया की सेना के आधुनिकीकरण को टालने और देरी करने और अमरीकी नीति में सैन्य ताकत के इस्तेमाल के विकल्प को अनाकर्षक बनाने के लिए समय चाहिए.

तो ऐसे में जब उत्तर कोरिया की चुनौती से निपटने के लिए कोई नीति बेहतर साबित नहीं होती नज़र आती, तब हत्या की धमकी देना ही इस ख़तरनाक सामरिक जुए में एक कारगर कार्ड नज़र आता है.

(इस लेख के लेखक डॉ. जॉन निलसन-राइट उत्तर पूर्व एशिया, एशिया प्रोग्राम, चैटम हाउस, यूनिवर्सिटी ऑफ़ केम्ब्रिज में जापानी राजनीति और पूर्वी एशिया अंतरराष्ट्रीय संबंधों के वरिष्ठ लेक्चरर हैं. )

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