प्रतिबंधों के बाद क़तर पर अरबों डॉलर का बोझ

  • 14 सितंबर 2017
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एक रेटिंग एजेंसी के मुताबिक अरब देशों की पाबंदी के बाद अपनी अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से चलाए रखने के लिए क़तर ने 38 अरब डॉलर ( क़रीब 2432 अरब रूपये) खर्च किए हैं.

रेटिंग एजेंसी मूडी के मुताबिक जून में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र और बहरीन की ओर से पाबंदी लगाए जाने के बाद क़तर का कारोबार, पर्यटन और बैंकिंग सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हुआ था.

एजेंसी के अनुमान के मुताबिक क़तर की सरकार को 30 अरब डॉलर बैंकिंग सेक्टर में निवेश करना पड़ा है.

क़तर के पड़ोसी देशों ने चरमपंथ की मदद करने का आरोप लगाते हुए पाबंदी लगा दी है. हालांकि कत़र ने किसी भी चरमपंथी समूह की मदद से इनकार करते हुए इसे राजनीति से प्रेरित बताया है.

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इन देशों की पाबंदी के चलते क़तर की इकलौती ज़मीनी सीमा भी बंद हो गई, क़तर के झंडे वाले कई समुद्री जहाज़ों के बंदरगाह में प्रवेश पर रोक लग गई, यहां तक कि कई देशों के आसमान से क़तर के हवाई जहाज़ों के गुज़रने पर भी रोक लगा दी गई.

लगातार बढ़ता दबाव

क़तर की सरकार ने कहा है कि उसके पास पाबंदी को झेलने के लिए संसाधनों की कमी नहीं है. लेकिन उस पर दबाव बढ़ता जा रहा है.

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इस सप्ताह क़तर का स्टॉक मार्केट का सूचकांक बीते 52 सप्ताह में सबसे न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है. पाबंदी के बाद के सौ दिनों में क़तर के स्टॉक मार्केट को 15 फ़ीसदी रकम का नुकसान उठाना पड़ा है.

रेटिंग एजेंसी मूडी के मुताबिक क़तर ने पाबंदी के बाद पहले दो महीने के दौरान 48.5 अरब डॉलर की रकम अर्थव्यवस्था में झोंकी है जो देश के कुल सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 23 फ़ीसदी है.

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