100 रेपिस्टों का इंटरव्यू करने वाली मधुमिता

  • 18 सितंबर 2017
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Image caption मधुमिता पांडे

विदेशी मीडिया में भारत की मधुमिता पांडे छायी हुई हैं. 26 साल की मधुमिता इंग्लैंड की एंग्लिया रस्किन यूनिवर्सिटी के क्रीमिनोलॉजी डिपार्टमेंट से पीएचडी कर रही हैं.

इसी पीएचडी में अपने थीसिस के लिए मधुमिता भारत में 100 रेपिस्टों से मिलीं और उनसे इंटरव्यू किया. इस काम के लिए वह विदेशी मीडिया में महीनों से सुर्खियों में हैं.

जब मधुमिता 22 साल की थीं तो उन्होंने दिल्ली के तिहाड़ जेल में जाकर रेपिस्टों से मुलाक़ात की और उनसे इंटरव्यू लिया था. पिछले तीन सालों में मधुमिता ने भारत में 100 बलात्कारियों का इंटरव्यू किया.

मधुमिता ने 2013 में इंटरव्यू करना शुरू किया था. इसके कुछ महीने पहले ही दिल्ली में निर्भया गैंगरेप कांड हुआ था.

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अपने थीसिस को लेकर मधुमिता ने बीबीसी एशियन नेटवर्क से कहा, ''12 दिसंबर 2016 को दिल्ली में एक लड़की से गैंग रेप हुआ था. इस गैंग रेप के ख़िलाफ़ लोग सड़क पर उतर आए थे. तब भारत में रेप को लेकर संसद से सड़क तक काफ़ी बहस हो रही थी.''

यौन संबंधों के लिए ज़रूरी?

उन्होंने बीबीसी से कहा, ''मेरा जन्म भी दिल्ली में ही हुआ है और वहीं पली-बढ़ी हूं. इस गैंग रेप को लेकर मैं भी अंदर से आंदोलित थी. हर कोई इस रेप को लेकर सवाल पूछ रहा था कि ऐसा क्यों हो रहा है? रेपिस्ट का दिमाग़ कैसे काम करता है? ये सारे सवाल मेरी पीएचडी से जुड़े थे.''

बीबीसी एशियन नेटवर्क ने मधुमिता से पूछा कि क्या वो रेप में दोषी क़रार दिए गए उन बलात्कारियों के सामने ख़ुद को असुरक्षित या ग़ुस्सा महसूस नहीं किया?

इस सवाल के जवाब में मधुमिता ने कहा, ''यह हैरान करने वाला था कि ऐसा कुछ भी नहीं था. उन्हें अपने किए पर दुख और खेद था. मैं इस बात की तहकीकात कर रही थी कि क्या इन्हें खेद, अपराधबोध है? क्या वो ऐसा दोबारा करना चाहेंगे? दरअसल, इन्हें समझने की ज़रूरत है कि इन्होंने जो कुछ भी किया वो ग़लत है. इन्हें यही अहसास नहीं है कि ग़लत कहां हैं.''

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हाल ही में चंडीगढ़ में 10 साल की एक बच्ची रेप के कारण मां बनी है. सुप्रीम कोर्ट ने इस बच्ची को गर्भपात कराने की अनुमति नहीं दी थी. मधुमिता के जेहन में ये सारे मामले हैं. उन्होंने कहा, ''मेरा लक्ष्य था कि उन रेपिस्ट पुरुषों की मानसिकता रेप पीड़िताओं को लेकर क्या है. यौन हिंसा के बारे में उनकी समझ क्या है.''

मधुमिता ने वॉशिंगटन पोस्ट से कहा है, ''मुझे पहले लगता था कि ये इंसान नहीं दैत्य हैं. लेकिन जब मैंने इनसे बात की तो आपको पता चलता है कि ये असाधारण पुरुष नहीं हैं. ये बिल्कुल आम लोग हैं. ये ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि वे उसी मानसिकता के साथ पले-बढ़े हैं. ज़्यादातर रेपिस्ट दूसरी या तीसरी क्लास तक पढ़े हैं. इनमें से ज़्यादातर को नहीं पता है कि यौन संबंध के लिए सहमति भी कोई चीज़ होती है.

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