ब्राज़ील: सोने की तलाश या जुआ?

ब्राज़ील में अवैध उत्खनन कई लोगों के लिए ज़िंदगी जीने का तरीका है.

ब्राजील में सोने का अवैध उत्खनन

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अवैध उत्खनन से होने वाले नुक़सान पर दुनिया भर में चिंता जाहिर की जाती है. ब्राज़ील में भी कई लोग इसे अमेज़न के जंगलों के नुक़सान के तौर पर देखते हैं. जनजातियों पर इसके ख़राब असर को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं और इसे देश के आर्थिक संसाधनों की लूट भी कहा जाता है.

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लेकिन कई लोगों के लिए ये ज़िंदगी जीने का तरीका है. ब्राज़ील में छोटे-छोटे समूहों में लोग इस धंधे से जुड़े हुए हैं. उन्हें लाल-भूरी मिट्टी वाले कीचड़, फावड़े और सदियों से इस्तेमाल में लाए जा रहे बर्तनों के साथ देखा जा सकता है.

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जो लोग इसे बड़े पैमाने पर कर रहे हैं, वे नावों का इस्तेमाल करते हैं, नदी के बीच में जाकर तलछट की मिट्टी निकालते हैं. तरीका चाहे कुछ भी हो, मकसद एक ही है, उन्हें सोने की तलाश है.

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लेकिन इसके साथ दूसरे खनिज पदार्थ भी मिल जाते हैं जैसे कैसिटेराइट (टिन बनाने के काम में आने वाला खनिज) और नाइओबियम. लेकिन सेहत पर इनका ख़राब असर हो सकता है और ज्यादातर ये अवैध होते हैं.

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खनन के इस धंधे में लंबा अनुभव रखने वाले एक शख़्स ने बताया कि सोने की तलाश जुआ खेलने जैसा है. वे नाम नहीं बताना चाहते क्योंकि उन्हें पुलिस का डर है और वो इसलिए कि उनका धंधा क़ानूनन ग़लत है.

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अमेज़न के जंगलों के उत्तरी इलाके में ब्राज़ील ने खनन की मंजूरी दी है. इसके बाद से ही अवैध उत्खनन का मामला सुर्खियों में है. सरकार का ये मानना है कि लाइसेंस दिए जाने से अवैध उत्खनन पर लगाम लगेगी.

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लेकिन यहां इनकी तादाद एक हज़ार से ज्यादा है. ब्राज़ील के रेनसा से दक्षिण में क्रेपुरिज़ाओ का इलाका सैंकड़ों मील में फैला हुआ है, जहां अवैध उत्खनन का काम जोरों पर है. यहां लोग अस्थाई घरों में रहते हैं जो लकड़ियों या फिर प्लास्टिक के बने होते हैं. इस धंधे से जुड़े लोगों का कहना है कि यहां से हर महीने 60 किलो तक सोना निकलता है.

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ग्लोबल मार्केट में इसकी कीमत करोड़ों में है लेकिन इसे तैयार करने का खर्च इतना ज्यादा बैठ रहा है कि धंधे से जुड़े लोग गरीबी में जी रहे हैं. रोजमर्रा की जरूरतों का सामान लाने के लिए उन्हें आठ घंटे का सफर बस से तय करना पड़ता है और ये खर्च वाजिब से चार-पांच गुना ज्यादा पड़ता है. सभी तस्वीरें और कैप्शनः समाचार एजेंसी रॉयटर्स