परमाणु आपदा वाले शहर में 9 साल बाद जन्मा साहित्य का नोबेल विजेता

  • 5 अक्तूबर 2017
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Image caption काज़ुओ इशिगुरो

ब्रिटिश लेखक कात्शुओ इशिगूरो को इस साल का साहित्य का नोबेल पुरस्कार दिया जाएगा.

उनका सबसे मशहूर उपन्यासों 'द रिमेन्स ऑफ़ द डे' और 'नेवर लेट मी गो' पर क्रमश: 1993 और 2010 में फिल्में भी बनाई गईं.

नोबेल अकादमी ने उनकी प्रशंसा में उनका परिचय इस तरह दिया है, "जिन्होंने शानदार भावनात्मक उपन्यासों में दुनिया से हमारे संपर्क से जुड़े हमारे भ्रामक अर्थों के नीचे की खाई को उजागर किया है."

62 वर्षीय कात्शुओ ने कहा है कि नोबेल पुरस्कार 'सुखद आश्चर्य' की तरह है. बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने बताया कि नोबेल समिति ने उनसे संपर्क नहीं किया था और जब उन्हें यह ख़बर मिली तो शुरू में उन्होंने सोचा कि यह अफ़वाह हो सकती है.

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उन्होंने कहा, "यह एक बड़ा सम्मान है. मुख्य तौर पर इसलिए क्योंकि इसका मतलब है कि मैं महान लेखकों के नक्शे-क़दम पर हूं. तो यह एक ज़बरदस्त प्रशंसा है."

उन्होंने उम्मीद जताई कि नोबेल पुरस्कार अच्छाई की ताक़त बने. उन्होंने कहा, "दुनिया बहुत अनिश्चित पल में है और मैं उम्मीद करूंगा कि सारे नोबेल पुरस्कार इस दुनिया में एक सकारात्मक ताक़त बनें."

जानें कात्शुओ इशिगूरो के बारे में

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  • कात्शुओ इशिगूरो का जन्म जापान के नागासाकी में 1954 में हुआ था. इसी शहर पर 9 साल पहले 1945 में अमरीका ने परमाणु बम गिराया था.
  • बाद में कात्शुओ अपने परिवार के साथ इंग्लैंड चले गए. उनके पिता को सरे में समुद्र विज्ञानी की नौकरी मिली थी.
  • उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ केंट से अंग्रेज़ी और फ़िलॉसफी की पढ़ाई की.
  • पूर्वी एंगलिया से उन्होंने रचनात्मक लेखन में मास्टर्स किया, जहां मैल्कॉम ब्रैडबरी और एंजेला कार्टर उनके शिक्षक थे.
  • उन्होंने कुल आठ किताबें लिखी हैं, जिनका 40 से ज़्यादा भाषाओं में अनुवाद हुआ है.
  • उनकी थीसिस ही उनका पहला उपन्यास बनी. 1982 में छपी इस किताब का नाम था 'अ पेल व्यू ऑफ़ हिल्स.'
  • 1989 में उन्हें 'द रिमेन्स ऑफ द डे' के लिए उन्हें बुकर पुरस्कार दिया गया.
  • 1995 में उन्हें महारानी की ओर से 'ऑर्डर ऑफ़ द ब्रिटिश एम्पायर' का सम्मान दिया गया.

पढ़ें: नोबेल विजेता क्यों हैं बूढ़े?

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