ट्रंप के ख़िलाफ़ सबूत देने पर 'पोर्न किंग' देंगे करोड़ों का इनाम

  • 17 अक्तूबर 2017
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अमरीका के 'पोर्न किंग' कहे जाने वाले लैरी फ़्लिंट ने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप पर महाभियोग चलाने के लिए ज़रूरी सबूत देने वाले को एक करोड़ डॉलर यानी क़रीब 65 करोड़ रुपये के इनाम की घोषणा की है.

महिला अधिकार कार्यकर्ताओं के लिए ख़लनायक के रूप में जाने जानेवाले फ्लिंट 74 साल के हैं और पिछले 40 सालों से लकवा ग्रस्त होने की वजह से व्हील चेयर के सहारे हैं.

पैसा और शोहरत कमाने के बाद वो राजनीति में अपनी क़िस्मत आजमाना चाहते थे, लेकिन उनके अतीत की वजह से ये दरवाजा हमेशा के लिए बंद हो गया.

उन्होंने अमरीका में पोर्न को क़ानूनी मान्यता दिलाने के लिए लंबी अदालती लड़ाई लड़ी और तबसे वो हमेशा ही विवादास्पद, उकसाऊ बयानों के लिए जाने जाते रहे, जिसमें इनाम की भारी भरकम राशि भी चर्चा का विषय रही है.

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उन्होंने 'द वॉशिंगटन पोस्ट' में रविवार को एक पूरे पृष्ठ का विज्ञापन दिया, जिसमें एक करोड़ डॉलर के इनाम की घोषणा की गई थी.

फ्लिंट एक पत्रिका है 'हस्लर', जिसके बारे में कहा जाता है कि बिना मॉडल या बोल्ड कारनामा करने वालों की तस्वीर के भी, ये पत्रिका 1970 के दशक में 30 लाख लोगों तक पहुंचती थी.

इस पत्रिका की ओर से ही पोर्नोग्राफ़ी को क़ानूनी बनाने की सफल अदालती लड़ाई उन्होंने लड़ी.

हालांकि ये पहली बार नहीं है, फ्लिंट अतीत में भी राजनेताओं को पशोपेश में डालने के लिए मीडिया विज्ञापनों का सहारा लेते रहे हैं.

1970 के दशक में उन्होंने अमरीकी कांग्रेस के सदस्यों या किसी भी बड़े रसूख वाले शख़्सियत के सेक्स स्कैंडल के बारे में सूचना देने वाले को एक लाख डॉलर का ईनाम देने की घोषणा की थी.

इसके 40 साल बाद अब उन्होंने इनामी राशि को न केवल बढ़ाया बल्कि इसे एक करोड़ डॉलर कर दिया और निशाना भी किसी और पर नहीं बल्कि अमरीका के सबसे सर्वोच्च पद पर बैठे डोनल्ड ट्रंप पर साधा है.

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कौन हैं फ़्लिंट?

लैरी फ्लिंट अमरीका के बड़े उद्योगपतियों में शुमार किए जाते हैं. फ्लिंट न्यूडिस्ट क्लब बनाने की शुरुआत करने से लेकर नैतिकताओं पर सवाल खड़ा करने वाली अग्रणी पत्रिका निकालने और कैसिनो, रीयल इस्टेट, ब्रांड मैनेजमेंट कंपनी, संगीत निर्माण और वीडियो गेम्स की कंपनी समेत कई क्षेत्रों में सफल कारोबार के मालिक हैं.

उनकी ज़िंदगी बहुत ग़रीबी में बीता. उनकी मां एक गृहिणी थीं, पिता पूर्व सैनिक. जब वो 15 साल के थे उन्होंने घर छोड़ दिया.

जुए में नाकामयाबी के बाद उन्होंने एक जाली जन्म प्रमाण पत्र के सहारे शराब की दुकान चलाने लगे.

वो बताते हैं कि एक पुलिसकर्मी ने उनके साथ यौन दुर्व्यवहार किया जिसके बाद वो घर लौटने पर मजबूर हुए.

केंचुकी के अपने ग़रीबखाने में लौटने के बाद, उस दौर में अन्य लड़कों की तरह बेहतर जीवन की तलाश में वो सेना में शामिल हो गए.

साल 1964 में वो रिटायर हो गए.

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न्यूडिस्ट क्लब की शुरुआत

उन्होंने अपनी 1800 डॉलर की कुल बचत से एक बार ख़रीदा, उसे नया लुक दिया और फिर वो एक के बाद एक दूसरे बार ख़रीदते गए.

यही दौर था जब उन्हें एक आइडिया सूझा बार में न्यूड महिलाओं को शामिल करने को लेकर.

उन्हें लगा कि उन्मुक्तता के उस दौर में अगर संपन्न और नशे के लत वाले शराब पीने वाले उनके ग्राहकों का न्यूड महिलाएं स्वागत करें और बार में डांस करें तो लोग और अधिक आकर्षित करें.

'हस्लर क्लब' की ये शुरुआत थी, जोकि अमरीका का पहला न्यूडिस्ट क्लब था.

तीन साल बद ही इसकी पांच शाखाएं हो गईं और इसमें काम करने वाली महिलाओं की गतिविधियां सिर्फ डांस तक ही सीमित नहीं रहीं.

अपने बार शृंखला को प्रचारित करने के लिए उन्होंने दो पृष्ठ के 'हस्लर न्यूज़लेटर' को प्रकाशित करना शुरू किया. इसमें न्यूड तस्वीरें छपती थीं.

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Image caption न्यूडिस्ट क्लब

पोर्नोग्राफ़ी को क़ानूनी वैधता दिलाने की लड़ाई

ये न्यूज़लेटर बहुत क़ामयाब रहा और फ़्लिंट ने इसमें पृष्ठ बढ़ाने का फैसला किया. मंदी के दौरान जैसे जैसे क्लब बिजनेस पर असर पड़ा, न्यूज़लेटर का नाम सिर्फ 'हस्लर' रह गया और वो मूलतः सेक्स मैग्ज़ीन हो गई.

नस्लवादी और महिलाओं के बारे में अपमानजनक सामग्रियों के छपने की वजह से ये पत्रिका महिला अधिकार कार्यकर्ताओं के निशाने पर रही है.

लेकिन इससे उन्हें कोई ख़ास परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा.

उनकी क़ानूनी लड़ाई 1978 में जॉर्जिया के एक कोर्ट में शुरू हुई और वो भी रोज़मर्रे की ज़िंदगी में पोर्नोग्राफ़ी और 'वयस्क' भाषा को क़ानूनी बनाए जाने को लेकर.

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Image caption फ्लिंट पोकर खेलने के बचपन से ही शौकीन थे

उनका मुख्य तर्क अमरीकी संविधान के प्रथम संशोधन पर आधारित था जो अभिव्यक्ति और प्रेस की आज़ादी की रक्षा करता है.

आखिरकार कोर्ट ने प्रथम संशोधन की रक्षा को आधार बनाते हुए, पोर्नोग्राफ़ी के प्रकाशन को क़ानूनी मान्यता दे दी.

तभी से अमरीका में पोर्नोग्राफ़ी सेंसरशिप के दायरे से बाहर हो गया.

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लेकिन इस कामयाबी का जश्न फ़्लिंट नहीं मना सके, क्योंकि एक गोरे नस्लवादी व्यक्ति ने उन्हें कोर्ट जाते समय गोली मार दी.

गोली ने उन्हें रीढ़ की हड्डी को नुकसान पहुंचाया और वो हमेशा के लिए व्हील चेयर के सहारे रह गए.

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