चीन की तरक्की की क़ीमत चुका रहे हैं वहां के लोग?

  • 18 अक्तूबर 2017
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चीन में सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी की 19वीं कांग्रेस शुरू हो चुकी है जिसके बाद शीर्ष नेतृत्व में हुए बदलाव सामने आएंगे. साथ ही ये कांग्रेस अगले पांच सालों के लिए चीन की नीति की दिशा पर भी फैसला करेगी.

चीन में आर्थिक सुधार कार्यक्रम अब भी जारी है लेकिन लोगों में इसे लेकर अब भी डर और चिंताएं बनी हुई हैं. वो आर्थिक सुधार चाहते हैं लेकिन उससे जन्मी समस्याएं भी उनकी परेशानी का सबब बन गई हैं.

लुओ यान इलेक्ट्रिक कार फैक्ट्री के कारण सड़क पर आने वाली तेज़ बदबू और उनके बच्चों पर पड़ने वाले असर को लेकर परेशान हैं.

यू को चीनी सरकार के सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों की असफलता के बाद लाखों कामगारों को बाहर निकालने की योजना को लेकर काफ़ी चिंता है.

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Image caption लुओ यान्ली स्थानीय फैक्ट्री से निकलने वाले धुएं को लेकर चिंतित हैं

स्वास्थ्य का मुद्दा

मार्क वाइनबर्गर चीन के सामने पहाड़ की तरह खड़े राष्ट्रीय ऋण, संभावित दिवालियेपन की स्थिति को लेकर चिंतित हैं. वो सोचते हैं कि इसका असर मल्टीनेशनल फर्म में काम करने वाले लोगों पर क्या होगा.

ये तीनों ही चीन की विशाल अर्थव्यवस्था में सुधारों का समर्थन करते हैं. लेकिन, चीन की तीन अलग-अलग जगहों से उनकी कहानियां, बदलावों से जुड़े परिणामों और चिंताओं को प्रकट करती हैं.

शेनजेन में पतझड़ के मौसम में भी रातें गर्म हैं और नमी भरी हैं, जहां दक्षिण चीन में यान्ली रहती हैं. यान्ली विशाल बीवाईडी इलैक्ट्रिक कार फैक्ट्री से निकलने वाली बदबू के कारण अपने अपार्टमेंट की​ खिड़की नहीं खोल सकती हैं.

यान्ली कहती हैं, "जब हमने ये अपार्टमेंट खरीदा था तो डेवलपर ने कहा था कि ये फैक्ट्री कहीं और चली जाएगी लेकिन अभी तक बहुत कम बदलाव हुआ है."

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औद्योगिक नीति

पिछले साल विरोध के बाद इस फैक्ट्री की जांच की गई थी. धुंए को नियंत्रित करने के लिए एयरटाइट सील वहां लगाई गई थी. जब हम वहां गए तो स्थानीय लोगों ने बताया कि इसका कुछ हिस्सा दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया है.

अपने बेट और बेटी के साथ बैठीं यान्ली कहती हैं, "इसकी बदबू बहुत ही तेज होती है और ये हमें बुरी तरह प्रभावित कर रही है."

वे लोग नहीं जानते कि ये बदबू खतरनाक है या नहीं लेकिन उन्होंने इस उम्मीद में अपार्टमेंट में पौधे लगाए हैं कि वो बदबू को सोख लेंगे.

वो जगह​ इलैक्ट्रिक कार निर्माताओं का घर है. बीवाईडी एक ऐसी तकनीक में वैश्विक नेता है जिसे लेकर चीन उम्मीद करता है कि वह बिजली के वाहनों और विशेष रूप से उन्हें ऊर्जा देने वाली बैट्रियों के मामले में प्रभुत्व कायम कर सकता है.

इलेक्ट्रिक को बढ़ावा देना सिर्फ औद्योगिक रणनीति नहीं है, यह चीन की प्रदूषण की बहुत बड़ी समस्या से निपटने की कोशिश भी है.

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Image caption यु को स्टील वर्कर की नौकर से निकाल दिया गया था और अब वह टैक्सी चलाते हैं

तेज गंध और धुआं

बुनियादी ढांचे के लिए इंसेंटिव्स और आक्रामक कोटे की मांग, अधिकतर विदेशी, विनिर्माता, यह सरकारी निवेश और सस्ते निर्यात से ध्यान कम करने के प्रयासों का हिस्सा है.

इसके बजाए एक ऐसा तरीका हो जो तकनीकी रूप से आधुनिक हो, स्थायी आधार के साथ उपभोक्ता खर्च से संचालित हो.

यह पूछने पर कि क्या ये तेज गंध और धुएं को लेकर चिंताएं इस प्रगति की कीमत है, यान्ली कहती हैं कि हां बिल्कुल.

करीब 3000 किलोमीटर दूर शेनयांग में टैक्सी ड्राइवर यु बताते हैं कि यहां एक स्टील स्मेल्टिंग प्लांट हुआ करता था.

बहुत समय पहले उसकी जगह कार डीलरशिप और अपार्टमेंट ब्लॉक्स आ गए.

15 साल पहले उन्हें आर्थिक सुधारों के उदारीकरण की लहर में सिर्फ एक साल का वेतन 3 लाख रुपये देकर नौकरी से निकाल दिया गया था.

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गंदगी का ढेर

यु बताते हैं कि उन्हें सरकार ने पूरी तरह छोड़ दिया. नई नौकरी के लिए कोई प्रशिक्षण नहीं दिया, एक साल के वेतन के अलावा कोई सहयोग नहीं मिला.

हालांकि, बाद में यू ने ड्राइविंग लाइसेंस ले लिया. इसके बावजूद भी दो बच्चों के पिता यु आर्थिक सुधारों पर भरोसा रखते हैं जो बाजार में प्रतिस्पर्धा लाएगा.

वह कहते हैं, "मुझे लगता है कि सबसे योग्य के ही बने रहने का सिद्धांत लागू होना चाहिए. लेकिन, क्या लोगों को पूरी तरह सेटल नहीं होने देना चाहिए."

कार ​डीलरशिप और बड़े मॉलों से दूर हम शेनयांग के बाहरी हिस्से लिशेंग में गए. गलियों में खाने और गंदगी का ढेर लगता था.

ग्राउंड फ्लोर पर स्थित एक अपार्टमेंट में घर पर बना कबूतरों को दरबा था. इमारत के कुछ हिस्से क्षतिग्रस्त थे. वहां पास की कोयले की खादानों के कामगार रहते थे.

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नए लोगों की भर्ती

क्योंकि चीन अपने पारंपरिक उद्योगों में पुरानी अधिक क्षमता से निपटने की कोशिश करता है.

यह गंदे कोयले से गर्म घरों और अर्थव्यवस्था की ताकत बढ़ाने की तरफ बढ़ रहा है. कई खदानों में काम रोका जा रहा है.

लेशेंग में एक कम्यूनिटी हॉस्पिटल के बाहर खड़े बस ड्राइवर ने कहा कि वह हर दिन खदान के 17 दौरे करता था लेकिन अब यह सिर्फ सात रह गया है.

ड्राइवर ने बताया, ''कई लोग कंपनी से सेवानिवृत्त हो गए हैं लेकिन कंपनी नए लोग भर्ती करने की स्थिति में नहीं है. वहां कोई नहीं जाना चाहता क्योंकि वेतन बहुत कम है."

फल बेचने वाली एक महिला ने बताया कि उसके कारोबार को पिछले दो सालों में 30 प्रतिशत नुकसान हुआ है, जिसका कारण मजदूरों का वेतन कम होना है.

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Image caption चीन के आर्थिक रूप से सबसे कमजोर प्रांत की राजधानी शेनयांग में एक निर्माण स्थल

जारी है विकास

बाजार विशेषज्ञों का दावा है कि लोग रोजाना सामान खरीदने के बजाए पॉर्क खरीद रहे हैं और उसे दो-तीन दिन चला रहे हैं.

खान से सेवानिवृत्त हो चुके शख्स ने बताया कि आमदनी में 50 प्रतिशत की गिरावट आई है. टैक्सी ड्राइवर यु ने 'सबसे योग्य के बचे रहने' की बात किसलिए कही?

राष्ट्रपति शी जिनपिंग उस स्थिति तक पहुंचने के संकेत दे रहे हैं. ऐसा लगता है कि बाज़ार को बढ़ावा देने का उनकी सरकार का शुरुआती वादा उनके लिए निर्णायक साबित होगा.

हज़ारों फैक्ट्रियां बंद कर दी गई हैं लेकिन इसके पीछे उनकी उत्पादन क्षमता से ज़्यादा उनकी वजह से बढ़ रहा प्रदूषण था.

बहुत से सरकारी संस्थानों का आपस में विलय किया गया है. लगभग सभी सरकारी स्वामित्व वाले बैंक सौदों के लिए कर्ज़ के साथ आते थे. कुछ कंपनियों के लिए यह बेल आउट जैसा था.

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दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था

लेकिन इसके साथ ही दिवालियेपन में कोई बहुत बढ़त नहीं देखने को मिली. सामाजिक स्थिरता को बनाए रखना इसके पीछे बड़ी वजह हो सकती है.

बेरोज़गारी को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों पर नज़र डालें तो यह कुछ क्रम बिगाड़ सकता है. 2016 में सस्ते क्रेडिट में बढ़त दिखी और सरकारी खर्च में भी इजाफा हुआ.

खराब प्रदर्शन करने वाली सरकारी कंपनियां निशाने पर आने के बजाय आगे बढ़ रही हैं, सस्ते लोन और बढ़े हुए लोन के साथ.

अब भी, दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है, उस गति से जिस पर कई विकसित देश ईर्ष्या करेंगे.

बीते साल 6.7 फीसदी, लेकिन विकास की रफ़्तार कम हो रही है.

Image caption मार्क वाइनबर्गर

कर्ज बढ़ जाता है

कर्ज़ और ख़तरा मोल लेना दो ऐसी चीजें हैं जिन्हें कोई भी चीन में आर्थिक तबाही के लिए जिम्मेदार ठहरा सकता है.

लेकिन, देश की चार बड़ी अकाउंटिंग फर्म में से एक ईवाई के सीईओ मार्क वाइनबर्गर ऐसा नहीं सोचते, "फिलहाल मुझे किसी तरह की दिक्कत नज़र नहीं आ रही है. अभी भी इतनी ग्रोथ हो रही है जिससे कर्ज़ चुकाया जा सकता है."

चीन के दूसरे शहर के मेयर को सलाह देने वाले व्यक्ति की यह आशावादिता शायद हैरान करने वाली नहीं है.

लेकिन वेनबर्जर यह चेतावनी भी देते हैं कि किसी को भी आत्मसंतुष्ट नहीं होना चाहिए. वह कहते हैं, "जब कर्ज़ इतना बढ़ जाता है तो उससे ग्रोथ पर असर पड़ता है क्योंकि उस कर्ज़ की धनराशि बड़ी समस्या बन जाती है."

चीन पर कर्ज

और चीन का कर्ज़ बहुत ज़्यादा है, ये अभी सालाना आर्थिक उत्पादन का 260 फीसदी है और आगे भी बढ़ने का अनुमान है.

सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि इसमें से अधिकतर कर्ज़ सरकार के स्वामित्व वाली कॉरपोरेट कंपनियों ने ले रखा है.

'शैडो बैंकिंग' सेक्टर में ख़तरों से खेलना तेज़ी से बढ़ रहा है. इतना अधिक कि चीन में खासकर बीमा बाज़ार टूट गया और

चीन की कुछ जानी-मानी फर्म भी निशाने पर आईं जो अपने पैसे कमाने के तरीकों से काफ़ी ख़तरनाक लगीं.

न्यूयॉर्क के वाल्डॉर्फ एस्टोरिया, डायचे बैंक, क्लब मेड और वूल्व्स एफसी सभी निशाने पर थे.

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देश की अर्थव्यवस्था

दूसरे महत्वरपूर्ण सुधार अब तक नहीं हुए, जैसे आर्थिक बाज़ार सुधार, ग्रामीण भूमि सुधार, आतंरिक पासपोर्ट में बदलाव जैसे हुकोउ वेलफेयर सिस्टम.

एक चीज़ जो तेजी से बढ़ी है वह है चीन की सरकारी स्वामित्व वाली फर्मों में पार्टी का गहरा होता दखल है.

इस साल गर्मियों में ऐसी रिपोर्ट आईं कि विदेशी फर्मों या साझा मालिकाना हक वाली कंपनियों को अपने बड़े कॉरपोरेट फ़ैसलों में कम्युनिस्ट पार्टी को समान रूप से बोलने देने के लिए कहा गया है.

अपना दूसरा कार्यकाल शुरू करने से पहले शी जिनपिंग देश की अर्थव्यस्था में कई स्तर पर चुनौतियां झेल रहे हैं.

उत्पादन के साधनों पर पार्टी की पकड़ मजबूत करना, चीनी सरकार की प्रतिक्रियाओं में से एक है. जिस बनी चाओ को भारतीय बहुत चाव से खाते हैं वो भारत में नहीं मिलती.

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चीन और ताइवान के उलझे रिश्ते

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