क्यूबेक में सार्वजनिक सेवाओं में चेहरा ढंकने पर पाबंदी

  • 19 अक्तूबर 2017

कनाडा के क्बूयेक प्रांत में विवादित धार्मिक तटस्थता क़ानून पारित हो गया है. इसके तहत सार्वजनिक सेवाएं दे रहे या इन सेवाओं का लाभ ले रहे लोगों के लिए अपना चेहरा दिखाना अनिवार्य होगा.

क्यूबेक ने हाल ही में सार्वजनिक यातायात और नगर प्रशासन से जुड़ी सेवाओं को भी इस क़ानून के दायरे में शामिल किया है.

क्यूबेक की संसद ने विधेयक संख्या 62 को 66-51 वोटों से पारित किया.

नकाब या बुर्का पहनने वाली महिलाओं को अब सार्वजनिक सेवाएं देते या लेते हुए अपना चेहरा दिखाना होगा.

प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस अफ़सरों, शिक्षकों, बस ड्राइवरों, डॉक्टरों जैसे पेशे से जुड़ी महिलाएं अब कार्यस्थल पर बुर्का नहीं पहन सकेंगी.

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विधेयक में नहीं है मुसलमान शब्द का ज़िक्र

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Image caption इस्लाम धर्म की मान्यताओं के अनुसार महिलाओं को अपना चेहरा ढककर रखना चाहिए.

यही नहीं इस क़ानून के तहत सब्सिडी वाली बाल देखभाल सेवाओं में बच्चों को धार्मिक शिक्षा नहीं दी जा सकेगी.

क्यूबेक में पारित किए गए विधेयक संख्या 62 में मुसलमान धर्म का ज़िक्र नहीं है.

सरकार का कहना है कि क़ानून के तहत किसी भी प्रकार से चेहरे को ढंकने पर प्रतिबंध होगा और इसके निशाने पर सिर्फ़ मुसलमान नहीं है.

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लेकिन इस नए क़ानून का असर उन मुसमलान महिलाओं पर भी पड़ेगा जो सार्वजनिक सेवाओं का लाभ लेते वक़्त अपना चेहरा ढंकती हैं.

बसों में यात्रा करने या लाइब्रेरी में पढ़ने के दौरान अब महिलाएं नक़ा नहीं पहन सकेंगी.

आलोचकों का कहना है कि इस क़ानून से उन मुस्लिम महिलाओं के हितों की अनदेखी होगी जो बुर्का पहनकर या चेहरा ढंककर सार्वजनिक सेवाओं का लाभ लेती हैं.

क्यूबेक में कितनी महिलाएं धार्मिक आधार पर चेहरा ढंकती हैं इसके आंकड़े उपलब्ध नहीं है. लेकिन 2016 में हुए एक सर्वे के मुताबिक करीब तीन प्रतिशत मुस्लिम महिलाएं चादर से ख़ुद को ढकती हैं और करीब तीन प्रतिशत मुस्लिम महिलाएं नक़ाब लगाती हैं.

क़ानून विशेषज्ञों का मानना है कि विधेयक 62 को अदालत में चुनौती मिल सकती है.

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