बराक ओबामा के वो ख़त जो उन्होंने गर्लफ्रेंड को भेजे थे

  • 20 अक्तूबर 2017
ओबामा इमेज कॉपीरइट Getty Images

पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के 35 साल पुराने प्रेम पत्र सामने आए हैं, ये प्रेम पत्र उन्होंने कॉलेज के दिनों की अपनी गर्लफ्रेंड को भेजे थे.

इन पत्रों में ओबामा की नस्ल, वर्ग के साथ साथ आर्थिक असुरक्षा की भावनाएं भी ज़ाहिर हुई हैं.

अपनी उम्र के तीसरे दशक में बराक ओबामा ने ये चिट्ठियां अलेक्जेंड्रा मैकनियर को लिखी थीं, जिनसे उनकी मुलाक़ात कैलिफोर्निया में हुई थी.

इनमें से कुछ चिट्ठियों में पूर्व राष्ट्रपति के जीवन के शुरुआती संघर्ष साफ़ दिखते हैं. 2014 में इमोरी यूनिवर्सिटी की रोज़ लाइब्रेरी ने यह चिट्ठियां हासिल की थीं, जिन्हें अब सार्वजनिक किया गया है.

लाइब्रेरी की निदेशक रोज़मैरी मैगी कहती हैं, "वे सुंदर तरीके से लिखी गई हैं और उनमें एक नौजवान की पहचान और अपने जीवन को अर्थ देन की तलाश दिखती है."

उनके मुताबिक, "उनमें उसी तरह की ललक और मुद्दे दिखते हैं, जिनसे हमारे अपने और दुनिया भर के छात्र दो-चार होते हैं."

बराक ओबामा के एक ट्वीट ने रचा इतिहास

एक ही जैकेट और जूते आठ साल तक पहनते रहे बराक ओबामा

ओबामा कहां कर रहे हैं मस्ती

इमेज कॉपीरइट EMORY

लंबी दूरी का प्रेम

ये चिट्ठियां 1982 से 1984 के बीच में लिखी गई हैं. इसके पांच साल बाद बराक ओबामा पहली बार मिशेल के साथ डेट पर गए थे. बाद में मिशेल और बराक ने शादी कर ली.

अलेक्जेंड्रा मैकनियर को लिखी गई शुरुआती चिट्ठियों में से एक चिट्ठी में ओबामा लिखते हैं, ''मुझे विश्वास है, तुम जानती हो कि मैं तुम्हें कितना याद करता हूं, मैं हवा की तरह हर पल तुम्हारे आस-पास हूं, मैं तुम पर सागर की गहराई जितना भरोसा करता हूं, हमारा प्यार असीमित है.''

चिट्ठी के अंत में लिखा गया है, ''प्यार, बराक.''

इमेज कॉपीरइट Getty Images

ओबामा और अलेक्जेंड्रा का लंबी दूरी का यह प्रेम ज़्यादा वक्त नहीं चल पाया. 1983 में ओबामा लिखते हैं, ''मैंने तुम्हारे बारे में कई बार सोचा, मैं अपने प्रेम और भावनाओं को लेकर अभी भी परेशान हूं.''

''मुझे लगता है कि जो हमें नहीं मिल सकता उसे ही हम चाहते हैं, यही बात हम दोनों को जोड़े रखती है, और यहीं हमें जुदा भी करती है.''

रास्ते की तलाश

एक चिट्ठी में ओबामा अपने उन दोस्तों का ज़िक्र करते हैं जो अपना पारिवारिक व्यापार संभाल कर जीवन में व्यवस्थित हो रहे हैं.

लेकिन ओबामा के साथ परिस्थितियां कुछ अलग थीं, उनके पिता केन्या से थे, ओबामा का जन्म हवाई में हुआ और उन्होंने अपनी ज़िंदगी का शुरुआती वक्त इंडोनेशिया में बिताया.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

ओबामा लिखते हैं, ''मैं अपने अंदर जलन महसूस करता हूं. मैं किसी ख़ास वर्ग या संस्कृति से जुड़ा हुआ नहीं हूं, मुझे इस बात का एहसास है कि मेरे लिए कोई अलग रास्ता बना हुआ है.''

''अपने अकेलेपन को दूर करने का मेरे पास एक ही रास्ता है कि मैं सभी संस्कृतियों और वर्गों को अपना लूं और उनसे खुद को जोड़ दूं.''

साल 1983 में ग्रेजुएट होने के बाद ओबामा जब इंडोनेशिया लौटे तो वे खुद को वहां के लोगों से जुड़ा हुआ महसूस नहीं कर पा रहे थे, वे बताते हैं, ''मैं वहां की भाषा अच्छे से नहीं बोल पाता.''

मन के भीतर की उलझनें

ग्रेजुएट होने के बाद ओबामा जानते थे कि वे सामुदायिक परियोजनाओं से जुड़े कार्य करेंगे.

1983 में लिखी एक चिट्ठी में वे लिखते हैं, ''कुछ हफ्ते पहले मेरे पास अपना रिज्यूम और लेख डाक के ज़रिए भेजने लायक पैसे नहीं थे, उसके अगले हफ्ते एक टाइपराइटर किराए पर लेने के लिए मुझे अपना चेक बाउंस करवाना पड़ा.''

''सामुदायिक संगठनों में बहुत कम पैसे मिलते हैं, इसलिए मुझे और ज़्यादा मेहनत से काम करना पड़ेगा जिससे मैं अपना कर्ज़ उतार सकूं.''

इमेज कॉपीरइट Getty Images

एक अंतरराष्ट्रीय बिजनेस कंपनी के प्रकाशन विभाग में नौकरी मिलने पर ओबामा लिखते हैं, ''सभी मेरी पीठ थपथपा रहे हैं और मेरे काम की तारीफ़ कर रहे हैं, मैं अपनी कंपनी के भरोसेमंद लड़कों में से एक बन गया हूं.''

हालांकि इसी दौरान वे इस बात की भी चिंता करने लगते हैं कि कॉरपोरेट कंपनियां उनके मूल्यों और आदर्शों को धीरे-धीरे कम कर रही हैं. ओबामा की चिट्ठियों से यह भी मालूम चलता है कि वे आगे चलकर कुछ बड़ा करना चाहते थे.

अलेक्जेंड्रा को लिखी अपनी एक चिट्ठी में वे लिखते हैं, ''मेरे विचार शायद अब उतने उजले नहीं रहे जितने स्कूल के दिनों में थे लेकिन अब उनमें परिपक्वता और भारीपन आ गया है जिसकी मदद से मैं किसी कार्य के प्रति समीक्षक से ज़्यादा भागीदार बनने में विश्वास करने लगा हूं.''

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

मिलते-जुलते मुद्दे