चीन में किस धर्म को मानने वाले सबसे ज़्यादा?

  • 20 अक्तूबर 2017
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चीन आधिकारिक रूप से एक नास्तिक देश है. चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी किसी भी धर्म को नहीं मानती है और नास्तिक विचार को तवज्जो देती है.

आधिकारिक रूप से नास्तिक होने के बावजूद चीन की कम्युनिस्ट पार्टी धर्मों को नष्ट करने में नाकाम रही है.

वहां के सरकारी मीडिया के मुताबिक़ चीन ने कम्युनिस्ट पार्टी के रिटायर सदस्यों को भी किसी भी धर्म का पालन करने पर पाबंदी लगा दी है.

चीन ख़ुद को नास्तिक तो कहता ही है, साथ में यह भी दावा करता है कि सभी धर्मालवंबियों अपनी आस्था को लेकर पूरी तरह से आज़ादी है.

चीन के सरकारी मीडिया ने कम्युनिस्ट पार्टी के प्रकाशित हुए नियमों का हवाला देते हुए बताया है कि अब पार्टी के रिटायर कार्यकर्ता भी किसी धर्म का पालन नहीं कर सकते हैं.

चीन में भले धार्मिक आज़ादी मिली हुई है लेकिन वहां धार्मिक गतिविधियां को स्वतंत्र होकर अंजाम नहीं दिया जा सकता है.

ईसा चीन में होते तो क्या कम्युनिस्ट होते

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धर्म पर नियंत्रण

सभी चर्चों को सरकार से मंज़ूरी लेनी होती है. इसके साथ ही चर्चों की गतिविधियों पर सरकार का नियंत्रण होता है. चीन के शिंजियांग प्रांत में मुस्लिम भी कई पाबंदियों के साथ जी रहे हैं.

चीन 21वीं सदी में दुनिया के सबसे ताक़तवर देशों की पंक्ति में आ खड़ा हुआ है. वह दुनिया का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरर देश बन गया है.

चीन इतना ताक़तवर है, लेकिन इस देश में धर्मों का संसार यहां सबसे लाचार है. एक अनुमान के मुताबिक़ चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के 8.5 करोड़ कार्यकर्ता हैं. इन्हें सख्त चेतावनी है कि वो किसी धर्म का पालन नहीं करेंगे.

अगर कम्युनिस्ट पार्टी का कोई कार्यकर्ता किसी भी धर्म का अनुयायी पाया जाता है तो उसे सज़ा देने का प्रावधान है़.

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विचारधारा के आड़े धर्म

वहां की सरकार इस बात को मानती है कि धार्मिक आस्था वामपंथ को कमज़ोर करती है. पार्टी के सदस्यों को पूरी सख्ती से मार्क्सवादी नास्तिक बनने को कहा जाता है.

उन्हें पार्टी का नियम हर हाल में मानना पड़ता है. चीन के पहले कम्युनिस्ट नेता माओत्से तुंग ने ही धर्म को नष्ट करने की कोशिश की थी. उन्होंने नास्तिकवाद को बढ़ावा दिया था.

अगर चीन में घर्म की बात होती है तो तीन धर्मों पर ज़रूर विचार किया जाता है. ये हैं- कन्फ्युसियनिजम, बौद्ध और ताओइजम. कम्युनिस्ट पार्टी की सख्ती के बावजूद चीन में धर्म फला-फूला है.

यहां बौद्ध, ईसाई, इस्लाम और ताओइजम को मानने वाले सबसे ज़्यादा लोग हैं. लेकिन इन सभी धर्मावलंबियों को सरकारी चर्चों, मंदिरों और मस्जिदों के बाहर ही प्रार्थना करनी होती है.

पिछले कुछ दशकों में चीन में धर्म को पैर पसारने का मौक़ा मिला है. इस दौरान चीन में मंदिर, मस्जिद और चर्च बने. आज की तारीख़ में ईसाई धर्म चीन में तेज़ी से बढ़ता हुआ धर्म माना जा रहा है.

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ईसाई तेज़ी से बढ़ता धर्म

एक अनुमान के मुताबिक चीन में 6.7 करोड़ लोग ईसाई धर्म को मानते हैं. इन करोड़ों लोगों के लिए आधिकारिक चर्च के अलावा दूसरे चर्चों में प्रार्थना करना आसान नहीं है.

चीन के पारंपरिक धर्म बौद्ध और ताओइजम मानने वाले 30 से 40 करोड़ लोग हैं. चीन में धर्मों पर नियंत्रण का एक व्यावसायिक पहलू भी है. मंदिरों में स्थानीय सरकार लोगों की एंट्री पर शुल्क देने पर मजबूर करती है.

चीन में बौद्ध धर्म के बारे में कहा जाता है कि यह एकमात्र विदेशी धर्म है जिसकी चीन में सबसे ज़्यादा स्वीकार्यता है. चीन में बौद्ध धर्म दूसरी शताब्दी में आया था. आज की तारीख़ में बौद्ध धर्म चीन के कई हिस्सों में एक महत्वपूर्ण ताक़त है. ग्रामीण चीन में इसका ख़ास प्रभाव है.

इस्लाम चीन में सातवीं शताब्दी में आया था. यह चीन में अरब के व्यापारियों के ज़रिए आया था. आज की तारीख़ में इस्लाम यहां अल्पसंख्यक है. एक अनुमान के मुताबिक़ चीन में डेढ़ करोड़ से ज्यादा मुस्लिम हैं.

राजनीतिक रूप से चीन में मुसलमनों को अहम माना जाता है, क्योंकि चीन का मुस्लिम देशों से अच्छा संबंध है. यहां के लगभग मुस्लिम सुन्नी हैं, लेकिन इन पर सूफ़ियों का प्रभाव ज़्यादा है.

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