भारतीय को तलाशते हुए लापता पाकिस्तानी पत्रकार 2 साल बाद मिली

  • 21 अक्तूबर 2017
ज़ीनत शहज़ादी

पाकिस्तान के अधिकारियों के अनुसार पत्रकार ज़ीनत शहज़ादी को दो साल बाद ढूंढ लिया गया है. उन्हें अगस्त 2015 में लाहौर से अगवा किया गया था.

गुमशुदा लोगों के लिए काम कर रहे कमीशन के प्रमुख रिटायर्ड जस्टिस जावेद इक़बाल ने बीबीसी उर्दू को बताया है कि ज़ीनत शहज़ादी को पाकिस्तान-अफ़ग़ान सीमा के नज़दीक एक जगह से बचाया गया.

उन्होंने बीबीसी संवाददाता शहज़ाद मलिक को बताया कि ज़ीनत को गुरुवार को बचाया गया. उन्होंने कहा, "कुछ राष्ट्रविरोधी तत्वों और विदेशी खुफ़िया एजेंसियों ने ज़ीनत को अगवा किया था, जिनके चंगुल से अब वो आज़ाद हैं."

जस्टिस जावेद इक़बाल ने कहा कि ज़ीनत को बचाने में बलूचिस्तान और ख़ैबर पख्तूनख़्वाह के कबीले के नेताओं की बड़ी भूमिका रही.

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आज़ाद होने के बाद से अब तक ज़ीनत शहज़ादी या उनके परिवार ने इस बारे में कोई बयान नहीं दिया है.

बीबीसी संवाददाता उमर दराज़ नंगियाना जब लाहौर स्थित ज़ीनत शहज़ादी के घर पहुंचे तो उन्हें वहां पर ताला लगा मिला. पड़ोसियों ने बताया कि परिवार करीब एक सप्ताह पहले घर छोड़कर कहीं और चला गया है.

पड़ोसियों का कहना था कि कुछ वक्त पहले ज़ीनत की मां ने उन्हें बताया था कि उन्हें ज़ीनत के बारे में कुछ जानकरी मिली है और उसके मिलने की उम्मीद है.

ज़ीनत लाहौर में एक स्थानीय चैनल के लिए काम करती थीं.

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Image caption हिना जिलानी

मानवाधिकार मामलों की वकील हिना जिलानी ने बताया कि ज़ीनत को 19 अगस्त 2015 को अगवा किया गया था.

"वो रिक्शे से अपने दफ्तर जा रही थीं जब दो कोरोला गाड़ियों ने रिक्शे को रोक लिया. गाड़ी से हथियारबंद निकले और उन्हें ज़बरदस्ती गाड़ी में खींच लिया."

इस घटना के अगले दिन ज़ीनत को ग़ायब लोगों के लिए काम कर रहे कमीशन ऑफ़ एनफोर्स्ड डिसएपियरेन्सेस के सामने पेश होना था.

अगवा किए जाने से पहले वो एक भारतीय नागरिक हामिद अंसारी के ग़ायब होने के मामले पर काम कर रही थीं. वो मुंबई में हामिद अंसारी की मां के साथ संपर्क में थीं और उनकी तरफ से उन्होंने हामिद के ग़ायब होने का केस भी दर्ज कराया था.

ज़ीनत की ग़ायब होने के बाद बीते साल उनके भाई सद्दाम ने आत्महत्या कर ली थी.

ज़ीनत की मां ने बीबीसी को बताया था कि ज़ीनत के ग़ायब हुए लंबा समय हो गया है और वो उम्मीद ही छोड़ चुके थे.

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