विदेशी लड़ाके इराक़ से चले जाएं: अमरीका

  • 23 अक्तूबर 2017
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अमरीकी विदेश मंत्री रैक्स टिलरसन ने भारत आने से पहले उन्होंने सऊदी अरब का दौरा किया है जहां उन्होंने एक बयान दिया है जिसे खाड़ी देशों पर ईरान के असर को कम करने की अमरीका की एक और कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.

अमरीकी विदेश मंत्री रैक्स टिलरसन ने कहा है कि ईरान के समर्थन वाले जो लड़ाके इराक़ में, तथाकथित इस्लामिक स्टेट से लड़ रहे हैं, उन्हें अब वापस लौट जाना चाहिए क्योंकि लड़ाई अब लगभग ख़त्म हो रही है.

सऊदी अरब में अमरीकी विदेश मंत्री ने कहा, ''ईरान के लड़ाकों को इराक़ से चले जाना चाहिए. इसके अलावा जो अन्य विदेशी लड़ाके इराक़ की ज़मीन पर मौजूद हैं, उन्हें भी वापस चले जाना चाहिए, ताकि इराक़ के लोग उन इलाकों पर दोबारा नियंत्रण कर सकें, जिन्हें आईएस-आईएस और दाइश से छुड़ा लिया गया है. विदेशी लड़ाकों की वापसी होगी, तभी इराक़ के लोगों की ज़िंदगी दोबारा पटरी पर आएगी.''

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सऊदी अरब और क़तर

सऊदी अरब में ये बयान देने के बाद अमरीकी विदेश मंत्री क़तर की राजधानी दोहा पहुंचे. दोहा में रैक्स टिलरसन ने कहा कि इराक़ के भीतर इस्लामिक स्टेट का मुक़ाबला करने के लिए कुर्द लड़ाकों को एकजुट रहने की ज़रूरत है.

इराक़ के प्रधानमंत्री हैदर अल-अबादी के प्रति समर्थन जताते हुए रैक्स टिलरसन ने कहा, '' प्रधानमंत्री हैदर अल अबादी का अपने देश पर और सैन्य अभियानों पर पूरा नियंत्रण है. उन्हें अपनी संवैधानिक बाध्यताएं पता हैं और मैं उम्मीद करता हूं कि कुर्द लड़ाकों को इस तरह समाहित किया जाएगा कि संविधान का पूरी तरह पालन हो.''

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ईरान की प्रतिक्रिया

अमरीकी विदेश मंत्री के इन बयानों पर ईरान ने प्रतिक्रिया दी है. ईरान के विदेश मंत्री जावेद ज़रीफ़ ने कहा है कि ईरान और इराक़ी शियाओं ने अपनी क़ुर्बानी ना दी होती, तो इस्लामिक स्टेट बग़दाद पर राज कर रहा होता.

अमरीकी विदेश मंत्री रैक्स टिलरसन ने पश्चिम एशिया की अपनी यात्रा के दौरान ईरान के असर को कम करने की कोशिश की है और इसके अलावा सऊदी अरब और क़तर के संबंधों को भी सुधारने का प्रयास किया है.

लेकिन क़तर और सऊदी अरब के बीच पिछले पांच महीने से जारी कड़वाहट में कोई कमी नहीं आई है. ख़ुद अमरीकी विदेश मंत्री ने भी माना है कि ऐसा कोई प्रबल संकेत नज़र नहीं आ रहा, जिससे लगे कि सऊदी अरब और क़तर बातचीत के लिए तैयार हैं.

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