ब्लॉगः 'तो बीजेपी को लॉर्ड कार्नवालिस की जयंती मनानी चाहिए'

  • 23 अक्तूबर 2017
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केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े से बिल्कुल सहमत हूं कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार को टीपू सुल्तान की जयंती मना कर हिंदुओं के ज़ख्म पर नमक नहीं छिड़कना चाहिए.

टीपू सुल्तान कोई सेक्युलर राजा नहीं बल्कि लाखों हिंदुओं का क़ातिल था. अगर आप उदाहरण की बात करेंगे तो ऐसे उदाहरण एक नहीं हज़ार हैं.

अब टीपू के मंत्रियों को ही लीजिए, नाम हिंदुओं जैसे और काम गद्दारों वाले.

सूबा राव वज़ीरे दरबार, शमाया अयंगर गृह मंत्री, मूलचंद और दिवान राय दिल्ली के मुग़ल दरबार में मैसूर के नुमाइंदे और सबसे अव्वल तो टीपू का प्रधानमंत्री दिवान पोर्निया.

दिवान पोर्नियां पर टीपू को इतना अंधा विश्वास था कि उसने उन्हें अपनी रॉकेट फ़ोर्स का मुखिया भी बना दिया और जब अंग्रेज़ों से लड़ते लड़ते घायल हो गया तो मरने से पहले पूर्निया के हाथ में अपने बेटे का हाथ देते हुए कहा कि 'दिवाना अब ये बच्चा तेरे हवाले है.'

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दुनिया का पहला मिसाइलमैन टीपू सुल्तान

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लॉर्ड कार्नवालिस ने भारत की जान बचाई?

मैं बिल्कुल मानने को तैयार हूं कि टीपू ने कोरटपुर के हिंदुओं और मालाबार के नय्यरों का बड़ी तादाद में क़त्ल कर दिया था.

लेकिन मैंगलोर के इसाइयों और महादेवी के मुसलमानों और मोपला मुसलमानों का क्यों क़त्ल कराया? शायद इन सबके बारे में उसे अंग्रेजों की जासूसी करने का शक था.

और अगर ये झूठ है तो और नहीं तो कम से कम कर्नाटक की बीजेपी अगले साल लॉर्ड कार्नवालिस की जयंती मनानी शुरू कर देगी, क्योंकि उसने टीपू जैसे बर्बर से भारत की जान बचाई.

नए इतिहास के अनुसार, टीपू ने मैसूर में आठ हज़ार मंदिर गिरा दिए लेकिन अपने ही महल के पास खड़े रंगानाथ स्वामी मंदिर को ढहाना भूल गया.

अजीब क़ातिल था कि हिंदुओं से इतना नफ़रत के बावजूद अपने क़िले में 10 दिन तक दशहरा भी मनाता था. ये परम्परा टीपू के बाद भी उसके ख़ानदान में चलती रही.

रिकॉर्ड के अनुसार, 158 बड़े मंदिरों को टीपू सरकार सालाना अनुदान देती रही और ज़मीनें भी दान कीं.

राम नाम वाली टीपू सुल्तान की अंगूठी

खिसकाया जा रहा है टीपू सुल्तान का शस्त्रागार

सरंगेरी की मठ मराठों ने लूटा, टीपू ने बसाया

जब 1791 में पेशवा माधवराव की मराठा सेना ने टीपू से जंग के दौरान शृंगेरी के मठ और मंदिर को उजाड़ दिया तो शंकराचार्य ने टीपू को 30 पत्र लिखे और फिर टीपू ने शृंगेरी के मंदिर को बहाल करने के लिए पैसों और कारीगरों का इंतज़ाम करके दिया.

ये तमाम पत्र 1916 में सामने आए और मैसूर के डायरेक्टरेट ऑफ़ आर्कियालॉजी ने संरक्षित कर रखा है.

कोलोर में पार्वती देवी के मोकम्बिका मंदिर की वेबसाइट पर आज भी लिखा है कि 18वीं शताब्दी के मराठा सब सोना चांदी के जवाहरात लूट के ले गये. यहां आज भी शाम 7.30 बजे टीपू ने नाम से प्रार्थना आरम्भ की जाती है.

कम से कम इसे तो रुकवाइए. और दो सौ साल से टीपू की लावनियां गाने वालीं कन्नड़ दादियों नानियों को भी जगाने की ज़रूरत है कि ये तुम क्या पाप कमा रही हो.

चलें भूल जाएं की 70 के दशक में कर्नाटक की आरएसएस शाखा ने भारतीय महावीरों को श्रद्धांजलि देने के लिए कन्नड़ में 'भारत भारती' पुस्तक सिरीज़ निकाली थी. इसी में एक पुस्तक टीपू सुल्तान के बारे में भी थी.

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कभी टीपू महान वीर था!

चलिए ये भी भूल जाते हैं कि 2008 में कर्नाटक के पहले बीजेपी मुख्यमंत्री बने बीएस येद्दयुरप्पा ने जब 2012 में कर्नाटक जनता पक्ष के नाम से अपनी पार्टी बनाई तो मुसलमानों के एक जलसे में टीपू सुल्तान जैसी पगड़ी बांध कर और हाथ में वैसी ही तलवार पकड़कर लाखों हिंदुओं के क़ातिल को महान वीर का सम्मान दिया.

और जब 2014 में येद्दयुरप्पा फिर से बीजेपी में लौटे तबसे वो टीपू सुल्तान का नाम सुनने को राज़ी नहीं हैं. मग़र इसका ये मतलब नहीं कि टीपू क़ातिल और गद्दार नहीं था. कम से कम आज तो मान लो कि ऐसा ही है.

क्योंकि इतिहास और शेयर मार्केट का कोई अता पता थोड़े ही होता है कि कल कौन सा सौदा कितने में बेचा या ख़रीदा जाएगा.

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