BBC INNOVATORS: 10 साल की बच्ची कैसे बदल रही है पाकिस्तान की ज़हरीली हवा?

  • 25 अक्तूबर 2017
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10 साल की बच्ची ने कैसे शुरू की बदलाव की मुहिम

दस साल की ज़िमाल उमेर कहती हैं, "अगर लोग कचरा डालने से पहले एक पल भी सोच लें कि इससे हमारे पर्यावरण को नुकसान होता है, तो हो सकता है कि वे ऐसा न करें."

ज़िमाल उमेर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सरगोधा शहर में रहती हैं. उनके पास इस कचरे को फैलने से रोकने का समाधान है. उन्हें कई लोग 'देश की सबसे युवा उद्यमी' के तौर पर देखते हैं.

अब उनके बताए समाधान की बदौलत दूर-दूर तक यहां प्लास्टिक के रंग-बिरंगे बैग, लोहे-लक्कड़ और दूसरा कचरा दिखाई नहीं पड़ता. लेकिन ज़िमाल के सामने जो समस्या है वो पूरे पाकिस्तान में पहाड़ जैसे कचरे की समस्या का बहुत छोटा हिस्सा है.

पाकिस्तान के पर्यावरण संरक्षण विभाग के मुताबिक़, पाकिस्तान में हर साल 2 करोड़ टन कचरा पैदा होता है और हर साल 2.4 फ़ीसदी का इसमें इज़ाफ़ा हो रहा है. इतनी बड़ी मात्रा में कचरे को जलाने से हवा बदबूदार और ज़हरीली हो जाती है.

ज़िमाल कहती हैं, "पूरे पाकिस्तान में यह स्थिति आप देख सकते हैं. प्लास्टिक के ये बैग अपने आप नष्ट नहीं होते हैं और लोग लापरवाही के साथ उन्हें इस्तेमाल कर फेंक देते हैं. वे इसकी रिसाइकलिंग के बारे में सोचते भी नहीं हैं."

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Image caption ज़िमाल पुराने अख़बारों से गिफ़्ट बैग बनाती हैं

कचरा निपटाने को लेकर पाकिस्तान में कभी कोई व्यवस्थित तरीका नहीं अपनाया गया. करीब आधा कचरे का निपटान सरकार की ओर से हो पाता है लेकिन इन कचरे को निपटाने के लिए जगह की भारी कमी है.

कचरे को फेंकना और उसे जलाना इससे निपटाने का सबसे आम तरीका है. लेकिन जो कचरा इकट्ठा होने से रह जाता है वो सार्वजनिक जगहों पर लोगों के स्वास्थ्य के लिए बीमारी की वजह बनती है.

खूबसूरत बैग

ज़िमाल ख़ुद के तैयार किए गए ज़ीबैग की मदद से इस समस्या से निपटने की कोशिश कर रही हैं. वो पर्यावरण को लेकर लोगों में जागरूकता फैला रही हैं.

स्कूल में पढ़ने वाली ज़िमाल पुराने अख़बारों की मदद से खूबसूरत और चटकदार रंग वाले बैग तैयार करती हैं और इसे आस-पास के परिवारों और दोस्तों को बेचती हैं.

इन बैग को बेचकर होने वाले मुनाफ़े को वो बहुत सारे स्थानीय चैरिटी में बांट देती हैं. सिर्फ तीन साल के अंदर वो कुछ बैग से शुरुआत कर अब सैकड़ों बैग तक पहुंच चुकी हैं. वो करीब तीन लाख रुपये के बैग बेच चुकी हैं.

वो कहती हैं, "मैंने यूट्यूब पर देखकर ये बैग बनाने सीखे हैं. स्कूल की पढ़ाई और इस काम में संतुलन बनाना मुश्किल काम है. इसलिए मैं इसे हफ़्ते की छुट्टियों या दूसरी छुट्टियों में अपनी चचेरी बहनों के साथ मिलकर बनाती हूं."

वो आगे बताती हैं, "मेरे पिता और दादा इसके लिए समान खरीदने के पैसे देते हैं. अगर वो मेरी मदद नहीं करते तो मेरे लिए इस योजना पर काम करना बहुत मुश्किल होता."

वो जिन चैरिटी को पैसे दान में देती हैं उनमें से एक है एसओएस चिल्ड्रेन्स विलेजेज. यह संस्था अनाथ और अभावग्रस्त बच्चों की मदद करती है.

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Image caption ज़िमाल इससे कमाए पैसे से दूसरे बच्चों की मदद करती हैं

जीते कई अवॉर्ड

ज़िमाल बताती हैं, "मैं अपनी कमाई से उनके लिए वाटर कूलर, वाशिंग मशीन, बैट्री, और रोज़मर्रा की दूसरी चीजें खरीदती हूं. उनके चेहरे पर खुशी देखकर मुझे बहुत संतोष होता है और मैं आगे बढ़ने के लिए और प्रेरित होती हूं."

ज़िमाल की इस मुहिम के लिए टीवी और अख़बारों के कवरेज में उन्हें 'पाकिस्तान की सबसे कम उम्र की सामाजिक उद्यमी' कहा गया.

ज़ीबैग ने पाकिस्तान, सऊदी अरब और अमरीका में कई अवॉर्ड जीते हैं.

ज़िमाल कहती हैं, "अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने काम की सराहना देखकर मुझे बहुत खुशी होती है और अपने माता-पिता और देश के लिए फ़ख़्र महसूस करती हूं." ऑनलाइन बिक्री ने उनके बिजनेस के लिए नई संभावनाएं पैदा की हैं.

वो कहती हैं, "पाकिस्तान में सोचा जाता है कि लड़कियां अकेले अपने दम पर काम नहीं कर सकती हैं लेकिन मुझे कोई समस्या नहीं हुई. मैं अपना काम करते रहना रहना चाहती हूँ. मैं भविष्य में एक बिजनेस वूमन बनना चाहती हूं और अपनी वेबसाइट के माध्यम से ज़ीबैग का कारोबार बढ़ाना चाहती हूं."

वो आगे कहती हैं, "मेरा सबसे बड़ा मकसद अपनी योजना को सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं बल्कि दुनिया भर में फैलाने का है."

Image caption ज़िमाल का मानना है कि उनके व्यवसाय के बहुत बड़े होने की संभावना है

'क्षमता है तो इस्तेमाल करिए'

कलसूम लखानी 'इनवेस्ट टु इनोवेट' नाम की एक संस्था की संस्थापक हैं, जो पाकिस्तान में शुरू हो रही छोटी कंपनियों को फंडिंग करने में और आगे बढ़ने में मदद करती है. वो कहती हैं कि देश को अपने भविष्य के बारे में सोचना चाहिए.

वो कहती हैं, ''जब हमारे पास क्षमता है तो हमेशा हमें उसे इस्तेमाल करने के बारे में सोचना चाहिए. हम न सिर्फ नए लोगों को मौका देते हैं बल्कि उन्हें व्यापार बढ़ाने में भी मदद करते हैं."

पाकिस्तान पर्यावरण की समस्या से निपटने के लिए कानूनी तरीका अपना चुका है. उसने इसके लिए सरकारी एजेंसियां भी बनाईं और अंतरराष्ट्रीय दान देने वालों से भी तकनीकी मदद ली.

लेकिन इसके नतीजे अभी तक बहुत अच्छे नहीं आए हैं और ना ही यह मुद्दा देश की प्राथमिकता में बहुत आगे है. इसके लिए कई सुरक्षा संबंधी और राजनीतिक वजहें जिम्मेदार हैं.

Image caption ज़िमाल को अपने इस सामाजिक उद्यम के साथ-साथ स्कूल की पढ़ाई के साथ भी तालमेल बिठाना पड़ता है

'पर्यावरण के प्रति लोगों की सोच बदलेगी'

ज़िमाल उम्मीद करती हैं कि उनकी सफलता पर्यावरण के प्रति लोगों की सोच बदलेगी.

वे कहती हैं, "यह भविष्य की पीढ़ी के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि तभी वे साफ़ और स्वच्छ दुनिया में रह सकते हैं. मैं इस स्थिति में जाना चाहती हूं जहां से मैं कह सकूं कि मैंने अपनी भूमिका अदा कर दी है. अब यह दूसरों पर है कि वो ख़ुद के लिए कुछ करें."

(इस प्रोजेक्ट की फ़ंडिंग द बिल एंड मेलिंडा गेट्स फ़ाउंडेशन ने की है.)

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