शी जिनपिंग के चीन में 'छह महीने तक उजाले को तरसा' ये क़ैदी

  • 29 अक्तूबर 2017
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शीए येनयी एक चीनी वकील हैं. उन्हें कथित तौर पर चीन की सरकार ने छह महीने तक हिरासत में रखा था. छह महीने हिरासत में रहने का अनुभव उन्होंने बीबीसी के साथ साझा किया.

हिरासत के दौरान उनके साथ न सिर्फ मारपीट की गई, बल्कि इससे भी ज्यादा क्रूरता बरती गई. उन्हें सुबह छह बजे से रात 11 बजे तक एक छोटे स्टूल पर एक ही मुद्रा में बैठाया गया. पंद्रह दिनों तक ऐसे बैठने की वजह से उनके पैर सुन्न हो गए थे. उन्हें पेशाब करने में भी दिक्कत हो रही थी.

कई बार उन्हें खाना नहीं दिया गया. उसने घंटों पूछताछ की जाती थी. जब वो सोते थे तो उनपर नज़र रखी जाती थी. गार्ड उन्हें पूरी रात एक ही मुद्रा में सोने के लिए मजबूर करते थे.

शीए येनयी कहते हैं कि इन सब शारीरिक यातनाओं से भी ज्यादा मुश्किल एकान्त कारावास था.

शेनयी बताते हैं, "मुझे एक छोटे कमरे में अकेले रखा गया था. मैं छह महीने तक दिन की रोशनी नहीं देख पाया था. मेरे पास पढ़ने के लिए कुछ भी नहीं था, मैं बस उस छोटे स्टूल पर बैठा रहता था. ऐसे हालात में कोई भी पागल हो सकता है. मुझे दुनिया से अलग कर दिया गया था. मार-पीट से भी ज्यादा दर्द अकेलापन देता है."

उनकी दास्तान चीनी नेता शी जिनपिंग के पहले कार्यकाल के दौरान कथित 'कानून के ख़िलाफ़ युद्ध' वाले दौर की बाकी कहानियों जैसी ही लगती है. मगर इन कहानियों की पुष्टि करना लगभग असंभव है. सिर्फ़ शीए का मामला ही ऐसा है जिसमें वो खुद आपबीती साझा कर रहे हैं.

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उन्हें और उनके जैसे दूसरे वकीलों को रिहा करते समय विदेशी मीडिया से बात नहीं करने की चेतावनी दी गई थी. लेकिन शीए येनयी ने इस चेतावनी को नज़रअंदाज़ करने का फ़ैसला किया.

इंटरव्यू देते समय उन्होंने कहा, "ये इंटरव्यू करना जोखिम भरा हो सकता है. लेकिन मुझे लगता है कि इन सब बातों को सामने लाना मेरी ज़िम्मेदारी है. मेरे पास कोई विकल्प नहीं है. मैं ऐसे समाज को स्वीकार नहीं कर सकता जहां लोगों को उनकी सोच और उनके शब्दों की वजह से गिरफ्तार कर लिया जाता है."

चीन में 'कानून के खिलाफ़ युद्ध' वाला दौर

चीन में मानवधिकारों की स्थिति पहले से खराब थी, लेकिन 2015 के बाद सरकार ने और सख्ती बरतना शुरू कर दिया. उस वक्त चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का पहला कार्यकाल आधा बीत चुका था.

इसी हफ्ते खत्म हुई कम्युनिस्ट पार्टी की कांग्रेस में शी जिनपिंग के दूसरे कार्यकाल को मंजूरी दी गई. 2015 में की गई कार्रवाई उनकी राजनीतिक यात्रा पर एक धब्बे की तरह है.

कुल तीन सौ से ज्यादा वकीलों, कानूनी सहायकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से पूछताछ की गई. दो दर्जन से ज्यादा लोगों के खिलाफ जांच की गई.

दो साल में किसी को लंबी जेल की सज़ा सुनाई गई, तो किसी को सज़ा सुनाना अभी बाकी है. कुछ लोग गायब हैं.

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Image caption 2015 से वकील वांग के बारे में कुछ पता नहीं चल पाया है

शीए येनयी ने अपने पूरे कानूनी करियर में भ्रष्टाचार से पीड़ित, पुलिस हिंसा के शिकार या धार्मिक अत्याचार से पीड़ित लोगों के केस लड़े. 'कानून के ख़िलाफ़ युद्ध' वाले दौर के शिकार दूसरे लोगों ने भी कुछ ऐसे ही संवेदनशील मुद्दों का प्रतिनिधित्व किया था.

शीए ने शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक सुधार की भी वकालत की थी. उन्होंने पूर्व चीनी राष्ट्रपति जियांग जेमिन के खिलाफ़ मुकदमा दर्ज कराया था. दरअसल जियांग कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद केंद्रीय सेना आयोग का पद छोड़ने को तैयार नहीं थे.

लेकिन शी जिनपिंग के कार्यकाल में हालात कथित रूप से नाटकीय तरीके से बिगड़ गए हैं.

2012 में हुई कांग्रेस में जैसे ही शी जिनपिंग ने सत्ता संभाली, एक दस्तावेज़ इंटरनेट पर फैल गया. उस दस्तावेज में ऐसी सात अहम विचारधाराओं की बात की गई थी, जो कम्युनिस्ट पार्टी के शासन के लिए खतरा बन सकती हैं. चीन के विश्वविद्यालयों और मीडिया में उन विचारधाराओं का प्रचार करने पर रोक लगा दी गई.

ये दस्तावेज लोगों को यह बताते नज़र आते थे कि उन्हें कौन-सी विचारधारा का अनुसरण करना है. चीन की प्रतिबंधित विचारधाराओं की लिस्ट में 'पश्चिमी देशों के संवैधानिक लोकतंत्र', 'वैश्विक मूल्य' और 'सिविल सोसायटी' शामिल हैं.

राष्ट्रपति जिनपिंग ने सार्वजनिक चर्चा के दायरे को कम कर दिया है, मीडिया पर सख्त नियंत्रण कर लिया है, विदेशी संगठनों और दान पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं, इंटरनेट पर अधिकार कर लिया है और साथ ही मानवाधिकार की वकालत करने वालों के ख़िलाफ़ भी अभियान चलाया है.

बनती-बिगड़ती उम्मीदें

ऐसे हालात की उम्मीद कभी नहीं की गई थी.

दशकों से पश्चिम मानता रहा कि चीन के साथ व्यापार बढ़ाने से वहां राजनीतिक बदलाव आ सकता है.

चीन के साथ रिश्ते को लेकर अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति जोर्ज डब्ल्यू बुश ने कहा था कि 'आर्थिक आज़ादी से स्वतंत्रता की आदत बनती है.'

एक समय आया था जब इस बात का असर दिखने लगा था.

2007 में पार्टी कांग्रेस से पहले हुई मुलाकात में शी जिनपिंग भविष्य के नेता के रूप में उभरते नज़र आए. उस समय सरकारी मीडिया में राजनीतिक बदलाव की बात होने लगी थी. मगर 2012 में हुई कांग्रेस के आस-पास यह उम्मीद धुंधलाने लगी.

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आलोचना = फ़ेक न्यूज़?

चीन के सरकारी मीडिया ने मानवाधिकार की वकालत करने वालों के खिलाफ हुए अत्याचारों के कई मामलों को खारिज कर दिया. उन्होंने इसे विदेशी मीडिया की फ़ेक न्यूज़ बताया.

लेकिन विदेशी पर्यवेक्षक भी चीन की हाई-स्पीड रेलवे जैसी चकाचौंध से चकरा जाते हैं.

शीए येनयी जैसे लोगों के मामले कुछ कहते हैं. ये मामले 1.4 बिलियन नागरिकों को ये संदेश देते हैं कि कम्युनिस्ट पार्टी की सत्ता को कोई भी चुनौती देने से पहले ध्यान से सोचे.

'जागो और कोई कदम उठाओ'

शीए येनयी को 18 महीने की हिरासत के बाद रिहा कर दिया गया. लेकिन इसके बाद भी उनपर पूरी नज़र रखी जाती है.

अगस्त के अंत में किए हमारे इस इंटरव्यू के कुछ दिन बाद प्रशासन ने उन्हें फिर चेतावनी दी थी. इस बार ये चेतावनी ज्यादा कड़ी थी.

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Image caption पूछताछ करने वालों ने शीए की पत्नी को गिरफ्तार करने की धमकी दी

इसी वजह से हमने इस स्टोरी को छापने के लिए पार्टी कांग्रेस होने तक का इंतज़ार किया.

जब हम इंटरव्यू ले रहे थे तो दर्जन भर लोगों ने उनके अपार्टमेंट को घेर लिया था. उन्हें खिड़की से देखने के बाद मैंने शीए से पूछा कि तीन बच्चों के पिता होने के नाते क्या उन्हें शांत नहीं रहना चाहिए?

जवाब मिला "मैं हमेशा शांत रहता हूं. मेरा परिवार भी सबके साथ अच्छे से रहता है. हम समझदार और शांतिप्रिय हैं. हम कानून को मानने वाले नागरिक हैं. हम अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल कर रहे हैं. हम उम्मीद करते हैं कि सब लोग गरिमा से रहें, एक-दूसरे का सम्मान करें और कानून का पालन करें."

बीबीसी की टीम इंटरव्यू करके बाहर निकली. बाहर बैठे आदमियों ने हमारी गाड़ी को घेर लिया. वे खिड़की के पास आकर गुस्से में दरवाज़ा खोलने की मांग करने लगे.

हमने बाहर आने से मना कर दिया. इतने में पुलिस वहां आ गई. एक घंटे बाद हमें वहां से जाने की इजाज़त मिल गई.

शी जिनपिंग की सरकार मानावाधिकारों की वकालत करने वालों और उनके परिवारों को बर्दाश्त नहीं कर सकती.

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