न शोषण, न ग़रीबी, फिर स्पेन से क्यों अलग होना चाहता है कैटेलोनिया?

  • कुलदीप मिश्र
  • बीबीसी संवाददाता
एक कैटेलन समर्थक

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन,

कैटेलोनिया के स्पेन से अलग होने का एक समर्थक

यूरोप के इबेरियाई प्रायद्वीप का देश स्पेन अपने फ्लामेंको नृत्य, टमाटर के त्योहार ला टोमैटिना और सांडों की लड़ाई के लिए मशहूर है.

लेकिन स्पेन आज कल एक राजनीतिक संकट की वजह से चर्चा में है. इस संकट की जड़ें वहां उठ रही अलगाववादी आवाज़ों में हैं, जो अब स्पेन सरकार के लिए बड़ी चिंता और कैटेलोनिया नाम के एक स्वायत्त क्षेत्र के लिए एक संवैधानिक संकट में तब्दील हो गई है.

स्पेन एक महासंघ नहीं, बल्कि काफी हद तक विकेंद्रीकृत एकीकृत देश है. स्पेन के अंतर्गत कुल 17 स्वायत्त क्षेत्र हैं जिनके अलग-अलग झंडे हैं. इन्हीं में से एक है कैटेलोनिया, जो स्पेन के उत्तर-पूर्वी छोर पर लगभग एक त्रिकोण की शक्ल में स्थित एक समृद्ध क्षेत्र है.

हालिया विवाद

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन,

स्पेन की एकता के समर्थकों का प्रदर्शन, जिनका कहना है कि जनमत संग्रह में हिस्सा लेने वाले 38 फीसदी लोग कैटेलोनिया की आवाज़ नहीं हैं.

कैटेलोनिया में स्पेन से अलगाव की आवाज़ें पुरानी हैं, लेकिन इसका हालिया उभार एक अक्टूबर को हुए विवादित जनमत संग्रह से हुआ, जिसके बाद वहां की स्थानीय संसद ने आज़ादी का एकतरफ़ा ऐलान कर दिया. कैटेलोनिया में बहुत लोगों के लिए ये जश्न की घड़ी थी.

लेकिन स्पेन इतनी आसानी से अपनी ज़मीन के इस अहम हिस्से को नहीं छोड़ सकता था. स्पेन की संसद ने एक प्रस्ताव पारित करके कैतेलन सरकार को बर्ख़ास्त कर दिया और कैटेलोनिया पर सीधा शासन स्थापित कर लिया.

इसके बाद स्पेन की एकता के पक्ष में और कैटेलोनिया के अलगाव के ख़िलाफ़ एक बड़ी रैली हुई जिसमें एकता के नारे लगे और स्पेन ज़िंदाबाद के गीत गाए गए.

अलगाव की जड़

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन,

स्पेन से आज़ादी के एकतरफ़ा ऐलान के बाद कैटेलन संसद के बाहर जमा भीड़

कैटेलोनिया के ख़ुद को स्पेन से अलग समझने की जड़ें उसके इतिहास, संस्कृति और भाषा में है, जो उसे स्पेन से अलग करते हैं. ख़ास तौर से स्पैनिश भाषा के समानांतर कैतेलन भाषा वहां अस्मिता का मुद्दा रहा है. यह भाषा स्पैनिश के जितनी क़रीब है, उतनी ही दक्षिणी फ़्रांस की ऑक्किटन जैसी क्षेत्रीय बोलियों के नज़दीक है.

लंबे समय से फ्रांस की राजधानी पेरिस में रह रहे वरिष्ठ पत्रकार रनवीर नायर, दोनों क्षेत्रों की सांस्कृतिक भिन्नता पर कहते हैं, ''कैटेलोनिया की 75 लाख की आबादी कैतेलन भाषा बोलती है, जबकि स्पेन में स्पेनिश बोली जाती है. दोनों की लिपि भले ही एक हो, लेकिन दोनों में अंतर है. हालांकि स्पेन में पिछले 30 सालों से कैतेलन को एक अलग भाषा के रूप में माना जाता है, स्कूलों में पढ़ाया जाता है.''

रनवीर नायर के मुताबिक, ''भाषा के अलावा मुख्य अंतर ये है कि कैटेलोनिया का इतिहास बिल्कुल अलग ही रहा है. 600-700 सालों तक जिस क्षेत्र का अपना अलग वजूद रहा हो, उसे स्पेन में मिला देना, वहां के लोगों को अजीब लगा और वे उसे स्वीकार नहीं कर पाए.''

राजा और रानी की शादी से एक हुए दो मुल्क़

इमेज स्रोत, Getty Images

11वीं सदी में कैटेलोनिया का वजूद कंट्री ऑफ बार्सिलोना के तौर पर एक पृथक राज्य के तौर पर था. लेकिन 15वीं सदी में कैस्टील की रानी इज़ाबेला ने पड़ोसी राज्य ऐरागॉन के राजा फर्डिनैंड से शादी कर ली और दोनों ने अपने राज्य मिला लिए. तब से कैटेलोनिया स्पेन का हिस्सा हो गया.

शुरुआत में कैटेलोनिया ने अपने संस्थान अलग रखे, लेकिन बाद के दौर में वह स्पैनिश राज्य के क़रीब आता गया. आधुनिक इतिहास में साल 1931 में जब स्पेन एक गणतंत्र के तौर पर वजूद में आया तो कैटेलोनिया को स्पष्ट स्वायत्तता दे दी गई.

लेकिन फिर साल 1936 से 1939 तक चले गृहयुद्ध के बाद स्पेन में जनरल फ्रैंको फ्रांस्वा का शासन स्थापित हुआ, कैटेलोनिया की स्वायत्तता ख़त्म कर दी गई, भाषा के अधिकार छीन लिए गए.

रनवीर नायर कहते हैं, ''यह बिल्कुल सच है कि जनरल फ़्रैंको के शासन के दौरान जो अत्याचार हुए थे, उनका भी असर कैतेलोनिया के लोगों की मानसिकता पर पड़ा है. वो नहीं चाहते कि स्पेन में कभी दोबारा ऐसी स्थिति बने. हालांकि ऐसी स्थिति दोबारा होने की संभावना बहुत कम है. मौजूदा स्पेनिश प्रधानमंत्री मारियानो रखोई के कदम फ़्रैंको की तरह नहीं हैं, लेकिन फिर भी काफी कड़े हैं और उससे कैटेलोनिया के लोगों का गुस्सा और बढ़ा है.''

फ़्रैंको काल की स्याह यादें

इमेज स्रोत, Hulton Archive/Getty Images.

इमेज कैप्शन,

जनरल फ़्रैंको (बीच में) की एक तस्वीर. 1942.

जवाहरलाल यूनिवर्सिटी में यूरोपियन स्टडीज़ के प्रोफ़ेसर गुलशन सचदेवा कहते हैं, ''फ़्रैंको के कुछ दशकों तक चले शासन के बाद साल 1978 के नए संविधान में कैटेलोनिया को काफी स्वायत्तता दे दी गई थी. साल 2006 में और स्वायत्तता दी गई. लेकिन 2010 में स्वायत्तता के काफी मुद्दे वापस ले लिए गए थे. इसे लेकर लोगों में रोष था. साल 2015 में जब कैटेलोनिया में कार्लस पुजिमोंट की सरकार आई तो उन्होंने काफी संघर्ष किया. उन्होंने स्वायत्तता से आगे बढ़कर स्वतंत्र देश बनाने की बात कही.''

कई लोग यह मानते हैं कि कैटेलोनिया के भीतर अलग होने के लिए जो ग़ुस्सा और गुबार है, उसके पीछे जनरल फ़्रैंको की तानाशाही का दौर ही था. फ्रैंको के बाद कैटेलोनिया की स्वायत्तता काफी हद तक बहाल कर दी गई थी, लेकिन उस दौर को एक बुरी स्मृति और दमन की मिसाल के तौर कैतेलनवासी आज भी याद करते हैं.

कैटेलोनिया की आज़ादी के पक्ष में एक प्रदर्शन में हिस्सा लेने पहुंचे 16 वर्षीय छात्र जोर्डी लोमा ने कहा था, ''हम सच में स्पेन सरकार की ओर से दमन महसूस करते हैं. हमारे नेताओं को हिरासत में लिया जा रहा है और हमें अनुच्छेद 155 की धमकी दी जा रही है. हमें लगता है कि हम जनरल फ़्रैंको के दौर में लौट रहे हैं.''

आर्थिक आपत्तियां

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन,

कैटेलन नेता कार्लस पुजिमोंट

स्पेन से कैटेलोनिया की सांस्कृतिक और भाषाई भिन्नताएं पुरानी हैं और अलग होने की कोशिशें भी नई नहीं हैं. लेकिन साल 2015 में कार्लस पुजिमोंट की अगुवाई वाली कैतेलन सरकार आने के बाद से इन कोशिशों में तेज़ी आई.

पत्रकार रनवीर नायर मानते हैं कि कैटेलोनिया में अलगाववाद का आंदोलन तीन बुनियादों पर खड़ा है- इतिहास, अलग भाषा और राष्ट्रीय गर्व, लेकिन बाद के दिनों में कुछ आर्थिक कारण भी इसमें शामिल हो गए.

रनवीर नायर कहते हैं, 'पिछले कुछ साल में अलग होने की भावना फिर उभरकर आई है. ख़ास तौर से जब स्पेन की अर्थव्यवस्था काफी ख़राब दौर में रही है. साल 2008 से लेकर 2012-13 तक स्पेन की अर्थव्यवस्था की हालत काफी ख़राब थी. उस दौरान कैटेलोनिया के लोगों को लगा कि हम पहले से अलग हैं तो हम अपना हाल सुधारने के बजाय स्पेन के बाक़ी गरीब हिस्सों का बोझ क्यों उठा रहे हैं.'

एक अक्टूबर को हुए जनमत संग्रह को रोकने के लिए स्पेन पुलिस ने बल प्रयोग किया, जिसमें कैटेलोनिया के 700 से ज़्यादा लोग ज़ख़्मी हुए. लेकिन कैटेलोनिया समर्थकों की ओर से यह आंदोलन अब तक कमोबेश अहिंसक ही रहा. प्रोफेसर गुलशन सचदेवा मानते हैं कि बल के इस्तेमाल से स्पेन ने अपनी ही स्थिति कमज़ोर की है.

'स्पेन सरकार के रवैये से बिगड़े हालात'

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन,

कई लोग यह मानते हैं कि कैटेलोनिया के भीतर अलग होने के लिए जो ग़ुस्सा और गुबार है, उसके पीछे जनरल फ़्रैंको की तानाशाही का दौर ही था.

प्रोफेसर गुलशन सचदेवा मानते हैं कि मौजूदा संकट के ऐतिहासिक कारण तो हैं, लेकिन इसकी तात्कालिक वजह स्पेन सरकार की विफलता ही है. वह इस मसले से ठीक से निपट नहीं पाई.

वह कहते हैं, 'किसी भी देश के अंदर, भाषा या अलग पहचान के सवाल को अगर वहां की राजनीतिक संस्थाएं नहीं संभाल पातीं तो देश के टुकड़े होने लगते हैं.'

प्रोफेसर सचदेवा कहते हैं, 'कैटेलोनिया में कुछ ऐसी स्थितियां बदल गई हैं कि राष्ट्रवाद की भावना बढ़ गई है. हालांकि उनका अपना संविधान, अपनी संसद, झंडा और राष्ट्रगान है. एक तरह से मौजूदा व्यवस्था के भीतर उनको पहचान मिल चुकी थी. यह भी नहीं कहा जा सकता कि उनका कोई बहुत ज़्यादा वहां शोषण हो रहा था. इसके बावजूद जो सिर्फ धारणा वहां बनी हुई है, उसका कुछ वहां के राजनीतिक दल इस्तेमाल कर रहे हैं और इसे संभालने के स्पेन सरकार के रवैये से इस भावना को और बल मिला है.'

कैटेलोनिया अलग हुआ तो...?

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन,

बार्सिलोना में कैटेलन झंडे के साथ एक महिला प्रदर्शनकारी

कैटेलोनिया की गिनती स्पेन के सबसे समृद्ध और औद्योगीकरण वाले क्षेत्रों में होती है. स्पेन की अर्थव्यवस्था के लिए यह क्षेत्र कितना अहम है, रनवीर नायर बताते हैं, 'कैटेलोनिया स्पेन की अर्थव्यवस्था का 22 फीसदी के आसपास है. साढ़े चार करोड़ लोगों में से अगर 75 लाख लोग अलग हो जाएंगे तो उनकी जनसंख्या पर भी असर पड़ेगा. स्पेन के निर्यात में 25-26 फीसदी हिस्सेदारी कैटेलोनिया की है.'

हालांकि कैटेलोनिया स्पेन का सबसे अमीर हिस्सा नहीं है, इस मामले में मैड्रिड अव्वल है. लेकिन शीर्ष तीन-चार समृद्ध प्रांतों में उसकी गिनती होती है. रनवीर नायर मानते हैं कि अगर कभी कैटेलोनिया स्पेन से अलग हुआ तो स्पेन के लिए यह आर्थिक तौर पर भी बड़ा झटका होगा.

इमेज स्रोत, Getty Images

रनवीर नायर यह भी कहते हैं कि कैटेलोनिया के अलगाववादी आंदोलन के मिज़ाज को देखते हुए उसकी तुलना हाल ही में हुए ब्रिटेन से स्कॉटलैंड के अलगाव से हो सकती है. दोनों आंदोलन अपने मिज़ाज में अहिंसक थे. प्रोफेसर गुलशन सचदेवा कहते हैं कि अभी यह विरोध सविनय अवज्ञा के गांधीवादी रास्ते पर चल रहा है, लेकिन कब तक चलेगा, इस पर यक़ीन से कुछ नहीं कहा जा सकता.

क्षेत्रीय सरकार के बर्खास्त किए जाने के बाद कैटेलोनिया में दोबारा 21 दिसंबर को चुनाव कराए जाएंगे. अलगाववादी पार्टियां फिर सत्ता में आईं तो यह सारा विवाद फिर से जनमत संग्रह के बाद वाली स्थिति पर लौट आएगा.

कैसे हैं लोगों के रिश्ते?

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन,

महिला प्रदर्शनकारी ने मुंह पर जो स्टिकर चिपका रखा है, उस पर लिखा है, 'आइए बात करें.'

इतना विवाद है तो कैटेलोनिया की राजधानी बार्सिलोना और स्पेन की राजधानी मैड्रिड के वासियों के बीच रिश्ते कैसे हैं.

पत्रकार रनवीर नायर बताते हैं, 'यह व्यक्तिगत मामला नहीं है. ऐसा नहीं है कि बार्सिलोना के लोग मैड्रिड के लोगों से चिढ़ते हैं. वो शायद सिर्फ फुटबॉल मैचों के दौरान होता होगा. लेकिन राजनीतिक तौर पर कैटेलोनिया के लोग यह महसूस कर रहे हैं कि स्पेन की सरकार कैटेलोनिया का धन स्पेन की बाकी जगहों पर इस्तेमाल कर रही है और उसका उतना फायदा उन्हें नहीं मिल पा रहा है.'

रनवीर नायर कहते हैं कि गुस्सा अगर है भी तो निवासियों से नहीं है, नेताओं से है. यह गुस्सा कैटेलोनिया के राष्ट्रगान में भी दिखता है, जिसकी शुरुआती पंक्तियां हैं-

विजयी कैटेलोनिया, दोबारा समृद्ध और शक्तिशाली बनेगा इन लोगों को दूर कर देगा, जो अकड़ू और अहंकारी हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)