ब्लॉग: भारत-पाक कोहरे से लड़ें या एक दूजे से?

  • वुसअतुल्लाह ख़ान
  • पाकिस्तान से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
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ठंड शुरू होते ही पाकिस्तानी पंजाब में इस्लामाबाद से मुल्तान तक कोहरा छाया हुआ है. सुबह-शाम में 20 फुट और दोपहर में 50 फुट के बाद कोई चीज़ दिखाई नहीं दे रही. जीवन की गाड़ी आंकड़े के गेयर पर चल रही है. ट्रेनें 12-12 घंटे लेट हो रही है.

मुसाफिर विमान भी इसी दुविधा में हैं कि उड़ गए तो उतरेंगे कैसे और उतर गए तो उड़ेंगे कैसे? हम जब बच्चे थे तो सर्दियों में स्कूल जाते समय धुंध से मुलाकात होती थी. जैसे-जैसे सूरज की किरणें गर्म होती जाती, धूंध भी छटती जाती और 10-11 बजे तक हर चीज़ साफ-साफ नज़र आने लगती.

मगर जबसे कारखानों, ट्रेफिक का धुआं और फसल कटने के बाद खेत के फालतू डंठल और कचरे को ठिकाने लगाने के बजाए जलाने का काम बढ़ा है, तो धूंध भी गहरे धूंए के बादल में बदल गई है. फिर ये बादल ठंडा होकर शहर के ऊपर जम जाता है और इसके ज़र्रे सांस के ज़रिए शरीर में जाकर लोगों को बीमार कर देते हैं.

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पंजाब का किसान

यानी उद्योग और खेती की बेलगाम बढ़ोतरी ने हमारी तरक्की को हमारे लिए ही फंदा बना डाला है. मगर हम अब भी कुदरत के साथ छेड़छाड़ से बाज नहीं आ रहे हैं, बल्कि खुद को सुधारने की बजाए दूसरों को इल्ज़ाम दे रहे हैं.

जैसे मौसम की जांच करने वाला महकमा हर साल पहले से ज्यादा बनने वाले कोहरे के बारे में कहता है कि अगर भारतीय पंजाब के किसान अपने खेतों को फसल की कटाई के बाद साफ करने के लिए आग ना लगाएं तो सीमा से लगे लाहौर और मुल्तान में स्मॉग से निपटा जा सकता है.

मैं सोच रहा हूं, पंजाब का किसान भले इस तरफ का हो या उस तरफ का, विभाजन के पहले ही अपनी खेती पीढ़ी दर पीढ़ी इसी तरह साफ करता आ रहा है. अगर कोहरे का मुख्य कारण यही है, तो फिर स्मॉग जैसा शब्द, पिछले पांच सालों से ही क्यों सुनाई दे रहा है. इस शब्द को तो सौ वर्ष पहले इजाद हो जाना चाहिए था.

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दोनों देशों की चुनौती

अच्छा तो फिर दिल्ली में स्मोग क्यों है? बिजिंग में स्मोग क्यों है? क्या आपके कारखानों की चिमनियों ने धुआं छोड़ना बंद कर दिया? आपकी सड़कों पर चल रही इको-फ्रेंडली धुआं छोड़ने वाली लाखों गाड़ियों में से कितनी गाड़ियों के पास फिटनेस सर्टिफिकेट है? पिछले सत्तर वर्ष में कितने कारखानों को प्रदूषण फैलाने का दंड भरना पड़ा है?

कचरा जलाने के कितने प्लांट आप अब तक स्थापित कर चुके हैं? जिस दिन आपने इनमें से आधे काम भी कर लिए, उससे अगले वर्ष पैदा होने वाला स्मॉग आपको खुद ही बता देगा कि ये जंग कौन जीत रहा है, कौन हार रहा है?

फिर आपका ये कहना भी जायज़ होगा कि हमने तो अपने हिस्से का काम कर लिया, मगर ये पड़ोसी देश धुआंधार चरमपंथ पर उतरा हुआ है. दोनों देश स्मॉग जैसी समस्याओं से एक साथ निपटने से ज्यादा एक दूसरे से निपटने के चक्कर में रहते हैं. और विडंबना क्या होती है...

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