कोल्ड वॉर में ये थे जासूसों के मारक हथियार

  • 13 नवंबर 2017
बर्लिन, जर्मनी, जासूसी इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption शीत यु्द्ध के समय बर्लिन की दीवार

शीत युद्ध के दौरान बर्लिन में दीवार बनाकर उसे दो हिस्सों में बांट दिया गया था. लेकिन इससे वह दुनिया भर में जासूसी के लिए मशहूर होने से नहीं बच पाया.

नए 'जर्मन म्यूजियम ऑफ एस्पियोनाज' के ​रिसर्च हेड क्रिस्टोफर नेहरिंग के मुताबिक़ बर्लिन दुनिया की बड़ी ताकतों के हजारों जासूसों का शहर बन गया जो दुश्मन को मात देने के लिए महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल करना चाहते थे.

बर्लिन को चार हिस्सों में बांट लिया गया था.

अमरीका, ब्रिटेन, फ्रांस और रूस सभी देशों के जासूस बर्लिन में थे और जासूसी के लिए अलग-अलग तरीके आजमाते थे.

नेहरिंग बताते हैं, "इन सभी के जासूस शहर में थे. लेकिन, इनमें सबसे प्रमुख थे जीडीआर की मशहूर स्टेट सिक्योरिटी सर्विस के एजेंट्स जिसे स्टैसी नाम से भी जाना जाता था. स्टैसी को बहुत पैसा मिलता था और वह लोगों को रखने में काफी अच्छा था. उसके जासूस से लेकर प्रशासनिक और अन्य सेवा कर्मियों के बीच 90 हजार कर्मचारी थे. ये लोग सूचना का विश्लेषण करने में बहुत माहिर नहीं थे लेकिन उन्हें जासूसी के उपकरण बनाने में महारत हासिल थी."

उस दौर के ऐसे ही कुछ हैरान करने वाले जासूसी उपकरणों के बारे में जानिए.

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1. माचिस की डिब्बी में कैमरा

पूर्वी जर्मनी की जासूसी एजेंसी और रूस की खुफिया एजेंसी ने केजीबी मिनी-कैमरा बनाने की कई कोशिशें कीं.

इसके जासूसों को कई फायदे मिले. इन्हें किसी भी सामान या कपड़ों में छुपाया जा सकता था. इनसे छोटी फिल्में बनाई जाती थीं.

इस माचिस के डिब्बे का साइज 5 x 3.5 x 1.5 सेमी था. इसे स्टैसी ने बनाया था.

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2. उहु पैन-स्टीकर

किसी भी तरह के शक से बचने के लिए जासूसी उपकरण ऐसी ​चीजों में छुपाए जाते थे जो रोज़ाना इस्तेमाल की हों ताकि किसी का उन पर ध्यान न जाए.

जासूसों के लिए स्टैसी ने उहु पैन-स्टीकर में छुपाने के लिए कैमरा बनाया था. यह पैन-स्टीकर चिपकाने के लिए इस्तेमाल होता था और जर्मनी में काफी लोकप्रिय था.

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3. कैमरे वाली ब्रा

स्टैसी कैमरा छुपाने के लिए ब्रा का इस्तेमाल भी करता था. जासूस इसका इस्तेमाल किसी की नज़दीक से फोटोग्राफ लेने में इस्तेमाल करते थे.

नेहरिंग कहते हैं, "इसे पूर्वी जर्मनी की खुफिया एजेंसी ने बनाया था लेकिन हमें पता है कि इसका इस्तेमाल कभी नहीं हुआ."

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4. फोटो स्नाइपर

जासूसों को कई बार दूर से और मुश्किल जगहों से फोटो लेने की जरूरत होती थी.

ऐसे में मॉस्को स्थित केएमज़ेड कंपनी ने रूस के एजेंट्स के लिए राइफ़ल जैसा दिखने वाला ये उपकरण बनाया था.

यह एक 300 एमएम सुपर टेलिफोटो लेंस वाला एसएलआर कैमरा है. इससे एजेंट्स बहुत दूरी पर खड़े या चलते हुए लोगों की तस्वीर ले सकते थे.

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5. सामान छुपाने के लिए करेंसी

जासूसों को मिनी-कैमरा से लिए गए फोटो बिना किसी की नज़र में आए एजेंसी को भेजने होते थे.

इसी जरूरत को देखते हुए माइक्रोफिल्म को ले जाने के नए तरीके खोजे गए.

इसमें एक था 70 के दशक का 5 नंबर लिखा हुआ जर्मनी का सिक्का. जासूस इसे अपने पास रखते थे और उसके पीछे माइक्रोफिल्म छुपाकर एजेंसी तक पहुंचाते थे.

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6. गंध को सुरक्षित रखना

जासूसी की दुनिया में सिर्फ तस्वीरें ही नहीं बल्कि व्यक्ति की गंध भी मायने रखती थी और उसे सुरक्षित रखा जाता था.

क्रिस्टोफर नेहरिंग ने बीबीसी को बताया, "स्टैसी पूछताछ के लिए लाए गए संदिग्धों के शरीर पर एक कपड़ा रगड़कर उनकी गंध उस कपड़े में सुरक्षित रख लेता था. इस कपड़े को एक ज़ार में रखा जाता था. ऐसा इसलिए होता था ताकि जरूरत पड़ने पर खोजी कुत्तों के जरिए इन लोगों का पता लगाया जा सके."

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7. रहस्यमयी डिओड्रेंट

टबैक ब्रांड के डिओड्रेंट की बोतल का इस्तेमाल माइक्रोफिल्म से लेकर छोटे दस्तावेजों तक तो छुपाने के लिए किया जाता था.

इसका इस्तेमाल आठ यूरोपीय साम्यवादी देशों के गठबंधन 'वॉरसॉ पैक्ट' के जासूसों द्वारा किया जाता था.

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8. मौत का ब्रीफकेस

कई बार जासूसों को किसी को मारने के लिए उसके बहुत नज़दीक जाना पड़ता था. वह चूक न जाए इसके लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल होता था. इसमें सबसे ख़तरनाक थी स्कॉर्पियन गन-मशीन जो एक ब्रीफकेस में आ जाती थी.

पूरी मैगजीन के साथ इसका वजन डेढ़ किलो था. स्टैसी इसे काफी उपयोगी मानते थे.

'जर्मन म्यूजियम ऑफ एस्पियोनाज' के मुताबिक गोली मारने के लिए इस हथियार को निकालने की ज़रूरत नहीं थी और इसे तुरंत इस्तेमाल के लिए रखा जाता था.

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9. बुल्गेरियन छाता

यह माना जाता है कि इस छाते के जरिए केजीबी जासूस ने बीबीसी पत्रकार जॉर्जी मार्कोव की ज़हर देकर हत्या की थी. यह घटना 7 सितंबर 1978 की है जब मार्कोव लंदन में वॉटरलू ब्रिज पर थे. मार्कोव ने उनका इलाज कर रहे डॉक्टर्स को बताया था कि एक आदमी ने उन पर छाते से हमला किया.

फॉरेंसिक जांच में उनकी जांघ में एक छोटा सा यंत्र मिला जिससे उनके शरीर में एक कास्टर नाम एक जानलेवा पदार्थ का प्रवेश हुआ था. यह माना गया कि केजीबी एजेंट ने छाते का ऊपरी हिस्सा अपने पैरों के पीछे रखा और हैंडल पर मौजूद एक बटन दबाया. इससे एक सिलेंडर एक्टिवेट हो गया और उससे वह यंत्र निकलकर मार्कोव को लग गया.

मार्कोव की मौत जब हुई तब वो 49 साल के थे.

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