इस्लामिक स्टेट को एक वक़्त हराना नामुमकिन लग रहा था!

  • 10 दिसंबर 2017
इस्लामिक स्टेट इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption इराक़ में मोसुल पर कब्ज़े की लड़ाई में सबसे ख़ूनी संघर्ष हुआ और इसकी क़ीमत वहां रहने वाले आम शहरियों और लड़ाकों दोनों ने चुकाई

एक वक़्त था जब जीत तकरीबन नामुमकिन लग रही थी. लेकिन चार सालों के संघर्ष के बाद आख़िरकार इराक़ ने खुद को 'इस्लामिक स्टेट' कहने वाले चरमपंथी संगठन के ख़िलाफ़ चल रही जंग के ख़त्म होने की घोषणा कर दी.

प्रधानमंत्री हैदर अल-आबादी ने बगदाद से टीवी पर जारी किए गए अपने संदेश में कहा, मेरे अजीज इराक़ियों, हमारी ज़मीन अब पूरी तरह से आज़ाद है. आज़ादी का सपना अब एक हक़ीक़त है.

सीरिया और इराक़ सीमा पर अब बगदाद की फ़ौज का पूरी तरह से नियंत्रण है. इस सरहदी इलाक़े में कथित 'इस्लामिक स्टेट' की हाल तक हुकूमत बरक़रार थी लेकिन नवंबर में रवा पर कब्ज़ा छूटने के साथ ही तस्वीर बदल गई.

इराक़ का एलान, आईएस के ख़िलाफ़ जंग ख़त्म

इस्लामिक स्टेटः सत्ता है पर राष्ट्र नहीं!

इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption इराक़ी सैनिकों के लिए रवा पर कब्ज़ा निर्णायक जीत साबित हुई

इस्लामिक स्टेट

अमरीकी विदेश मंत्रालय ने 'इराक़ पर इस्लामिक स्टेट के नीचतापूर्ण कब्ज़े के ख़ात्मे' का स्वागत किया. इराक़ की इस घोषणा के ठीक दो दिन पहले रूस ने कहा था कि सीरिया में इस्लामिक स्टेट को हराने का उसका मिशन पूरा हो गया है.

खुद को इस्लामिक स्टेट कहने वाले इस चरमपंथी संगठन ने साल 2014 में इराक़ और सीरिया के बड़े भू-भाग पर कब्ज़ा कर लिया था. ये संगठन खुद को ख़लीफ़ा घोषित कर तकरीबन एक करोड़ लोगों की आबादी पर हुकूमत कर रहा था. लेकिन पिछले दो सालों से कथित इस्लामिक स्टेट के हार का सिलसिला शुरू हो गया था.

जुलाई में इराक़ का दूसरा सबसे अहम शहर मोसुल उसके हाथ से निकला तो पिछले महीने उत्तरी सीरिया का शहर रक़्क़ा इस्लामिक स्टेट के कब्ज़े से छूट गया. कुछ मीडिया रिपोर्टो में ये कहा जा रहा है कि इस्लामिक स्टेट के कई लड़ाके सीरियाई शिविरों में बिखर गए हैं और तुर्की की सीमा की तरफ़ निकल गए हैं.

इस्लामिक स्टेट के इतने नाम क्यों हैं?

इस्लामिक स्टेट को कैसे हराया जा सकता है?

इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption इराक़ के प्रधानमंत्री हैदर अल-आबादी ने शनिवार को कहा, मैं इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ चल रही जंग के खत्म होने की घोषणा करता हूं

न ख़त्म होने वाली जंग

बीबीसी के अरब मामलों के संपादक सेबस्टियन उशर का विश्लेषण....

इसमें कोई शक नहीं कि ये प्रधानमंत्री आबादी के लिए गर्व करने का लम्हा है. ये वो जीत है जो कभी हक़ीकत के बजाय लफ्फाजी ही लगती थी. अगर इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ सैनिक युद्ध सचमुच खत्म हो गया है तो इराक़ की सेना इस संघर्ष के बाद अब पीछे हट सकती है. इस युद्ध में उन्होंने बड़ी क़ीमत चुकाई है.

और इसका ये मतलब भी कतई नहीं निकाला जा सकता कि इराक़ या सीरिया या बाक़ी दुनिया में कहीं भी इस्लामिक स्टेट की विचारधारा के ख़िलाफ़ लड़ाई या फिर से संगठित होकर खड़े होने उसकी क्षमता खत्म हो गई है. ये मुमकिन है कि हाल के वक्त में हमले कम हो गए हों लेकिन इराक़ी शहर अभी भी खुदकुश हमलावरों के शिकार हैं.

जिहाद को हवा देने वाले हालात नहीं बदले हैं और जिन जगहों को इस्लामिक स्टेट के कब्ज़े से छुड़ाया गया है, वहां भी परिस्थितियां ऐसी ही हैं.

'मिस्र में मस्जिद के हमलावरों के हाथ में थे आईएस के झंडे'

रक़्क़ा का डर्टी सीक्रेट: कैसे भागे आईएस के लड़ाके?

इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption मोसुल में आम लोगों के हताहत होने की संख्या के बारे में ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं है लेकिन कहा जाता है कि इस संघर्ष में तक़रीबन 40 हज़ार लोग मारे गए है

'मुकम्मल आज़ादी'

इराक़ के प्रधानमंत्री ने शनिवार को कहा, सीरिया-इराक़ की सीमा पर हमारे सैनिकों का पूरा नियंत्रण स्थापित हो गया है. इसलिए हम इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ युद्ध के खात्मे की घोषणा करते हैं. दुश्मन हमारी सभ्यता को खत्म करना चाहता है. लेकिन हम अपनी एकता और दृढ़ निश्चय के बूते जीते हैं.

इराक़ी सशस्त्र बलों ने एक बयान जारी कर कहा कि इराक़ इस्लामिक स्टेट के कब्ज़े से पूरी तरह छुड़ा लिया गया है. अमरीकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हीदर नॉअर्ट ने कहा कि जिहादियों के बर्बर नियंत्रण में रहते आए लोग अब आज़ाद हैं.

उन्होंने कहा, "इराक़ की आज़ादी में इराक़ी सरकार के साथ अमरीका के खड़े होने का ये मतलब नहीं है कि इराक़ में आतंकवाद और इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ लड़ाई खत्म हो गई है."

ब्रितानी प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे ने इस ऐतिहासिक मौके पर आबादी को बधाई दी लेकिन साथ ही आगाह भी किया है कि इस्लामिक स्टेट का ख़तरा अब भी बरकरार है और ये सीरिया की सीमा से फिर आ सकता है.

इस्लामिक स्टेट के 'असर' में था न्यूयॉर्क का हमलावर

आजकल कहां हैं इस्लामिक स्टेट के लड़ाके?

इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption दुनिया भर के नेताओं ने इस्लामिक स्टेट पर इराक़ की जीत की सराहना की है लेकिन ये भी कहा है कि चरमपंथ के ख़िलाफ़ लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है

रूस का रुख

पिछले महीने सीरिया की सेना ने कहा कि पूर्वी शहर अल्बु कमाल को इस्लामिक स्टेट से पूरी तरह आज़ाद करा लिया गया है.

गुरुवार को रूसी सेना के कर्नल सरगेई रुडोस्की ने कहा, सीरिया में इस्लामिक स्टेट को हराने की रूस की मुहिम पूरी हो गई है. उन्होंने कहा कि सीरिया में रूस की सेना शांति बहाली और संघर्ष विराम के लिए काम करती रहेगी.

इस्लामिक स्टेट के पतन से ये आशंका जाहिर की जा रही है कि इसके लड़ाके सीरिया की सीमा पार कर जाएंगे और विदेशों में वे ज़्यादा हमले कर सकते हैं.

आईएस से आज़ादी, पर रक्का ने क्या खोया

तीन साल बाद आईएस की 'राजधानी' रक़्क़ा मुक्त

इमेज कॉपीरइट Wales News Service
Image caption मोसुल की लड़ाई के दौरान जान बचाने के लिए भागता एक आम शहरी

इराक़ में इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ जंग

  • जनवरी, 2014: इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों ने इराक़ के फलूजा और रमादी शहर पर नियंत्रण कर लिया.
  • जून, 2014: छह दिन की लड़ाई के बाद मोसुल पर इस चरमपंथी संगठन का कब्ज़ा.
  • 29 जून, 2014: इस्लामिक स्टेट ऑफ़ इराक़ ने अपना नाम बदल कर इस्लामिक स्टेट रख लिया. अबू बक्र अल-बगदादी की कमान में नए ख़िलाफ़त की घोषणा.
  • अगस्त, 2014: सिजर पर कब्ज़ा. तकरीबन दो लाख आम लोगों ने सिंजर की पहाड़ियों पर शरण ली. इनमें ज्यादातर यज़ीदी थे.
  • मार्च, 2015: इराक़ की फौज और शिया मिलिशिया की गठबंधन सेनाओं का टिगरित पर कब्ज़ा.
  • दिसंबर, 2015: रमादी पर फिर से कब्ज़ा.
  • जून, 2016: फलूजा पर इराक़ी सेना का फिर से नियंत्रण.
  • अक्टूबर, 2016: मोसुल पर इराक़, शिया मिलिशिया और कुर्द लड़ाकों और अंतरराष्ट्रीय गठबंधन सेना का मोसुल के लिए संघर्ष.
  • जुलाई, 2017: मोसुल पर नियंत्रण.
  • दिसंबर, 2017 इराक़ के प्रधानमंत्री ने इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ जंग खत्म होने की घोषणा की.
प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
इस्लामिक स्टेट के हाथ से निकला आख़िरी गढ़

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए