अरब देशों ने यरूशलम पर डोनल्ड ट्रंप के फ़ैसले का विरोध किया

  • 10 दिसंबर 2017
इसराइल-फलस्तीन इमेज कॉपीरइट AFP/Getty Images

अरब देशों ने कहा है कि यरूशलम को इसराइल की राजधानी के तौर पर मान्यता देने के अमरीकी फ़ैसले से मध्य पूर्व में हिंसा और अस्थिरता बढ़ेगी.

इस संवेदनशील मुद्दे पर ट्रंप प्रशासन के फ़ैसले से क्षेत्र में अमरीका की तटस्थता खत्म हो गई है.

अरब लीग के विदेश मंत्रियों ने कहा, "इस निर्णय का मतलब ये हुआ कि मध्य पूर्व में शांति के लिए मध्यस्थ के तौर पर अमरीका की भूमिका पर भरोसा नहीं किया जा सकता है."

अमरीकी समर्थक देश भी ट्रंप के विरोध में उतरे

गज़ा पट्टी और वेस्ट बैंक में तीन दिनों से जारी हिंसा और विरोध प्रदर्शनों के बाद 22 देशों की ओर से जारी किए गए इस बयान में अमरीका के क़रीबी सहयोगी देश शामिल हैं.

इसराइल ने हमेशा ही यरूशलम को अपनी राजधानी माना है जबकि फलस्तीनी लोग पूर्वी यरूशलम पर भविष्य के 'फलस्तीन राष्ट्र' की राजधानी होने का दावा करते हैं.

साल 1967 की लड़ाई में इसराइल ने पूर्वी यरूशलम पर कब्ज़ा कर लिया था. ट्रंप के लिए ये फ़ैसला अपने प्रचार अभियान के दौरान किए वादे को पूरा करने जैसा है.

इमेज कॉपीरइट EPA/JIM HOLLANDER

ट्रंप ने कहा, "ये हकीकत को स्वीकार करने से ज़्यादा या कम कुछ नहीं है."

लेकिन ट्रंप को अपने फ़ैसले के लिए आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है.

काहिरा में घंटों की बैठक के बाद अरब लीग के देश इस प्रस्ताव पर सहमत हुए. इस प्रस्ताव का अमरीका के कई क़रीबी देशों ने भी समर्थन किया है.

इनमें संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, जॉर्डन जैसे देश हैं जिन्होंने अपनी चिंताएं जाहिर की हैं.

प्रस्ताव में कहा गया है...

  • इस फ़ैसले से इसराइल-फलस्तीन शांति वार्ता में आयोजक या मध्यस्थ की किसी भूमिका से अमरीका ने खुद को दूर कर लिया है.
  • राष्ट्रपति ट्रंप के कदम से तनाव और नाराज़गी बढ़ गई है और इस वजह से क्षेत्र में हिंसा और अस्थिरता के बढ़ने की आशंका है.
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से इस फैसले की निंदा के लिए आग्रह किया जाएगा.
इमेज कॉपीरइट EPA
Image caption अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने यरुशलम को इसराइल की राजधानी घोषित किया है

अमरीका ने यरूशलम में हिंसा का दोष यूएन पर डाला

शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक आपातकालीन बैठक में अमरीका ने खुद को अलग-थलग पाया. सभी 14 देशों ने ट्रंप प्रशासन के फ़ैसले की आलोचना की.

लेकिन संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी राजदूत निक्की हेली ने यूएन पर पक्षपात का आरोप लगाया है.

उन्होंने कहा, ''संयुक्त राष्ट्र इसराइल के प्रति शत्रुता दिखाने वाले दुनिया के प्रमुख केंद्रों में से एक है.''

इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption निक्की हेली

शनिवार को इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप के फ़ैसले के विरोध में तो कई आवाज़ें सुनी लेकिन इसराइल पर हो रहे रॉकेट हमलों की निंदा करती आवाज़ें उन्हें सुनाई नहीं पड़ीं.

इस बीच, सोमवार को पेरिस में यूरोपीय यूनियन के विदेश मंत्रियों की बैठक होने वाली है, नेतन्याहू इस बैठक से पहले पेरिस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात करेंगे.

शुक्रवार को गज़ा की तरफ़ से इसराइल की ओर तीन रॉकेट दागे गए थे, इसके बाद इसराइल ने भी जवाबी कार्रवाई में हवाई हमला किया. इसराइल ने बताया था कि उन्होंने इस्लामिक संगठन हमास के इलाकों को निशाना बनाया, जिसमें हमास के दो सदस्य मारे गए.

वहीं, ट्रंप के फ़ैसले के विरोध में वेस्ट बैंक और गज़ा में शनिवार को भी सैकड़ों लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया, हालांकि पिछले दिन के मुकाबले प्रदर्शनकारियों की संख्या कुछ कम रही.

इमेज कॉपीरइट EPA
Image caption राष्ट्रपति ट्रंप के फैसले के विरोध में सड़कों पर उतर आए लोग.

यरूशलम इतना ज़रूरी क्यों?

यरूशलम इसराइल और फ़लस्तीन दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण शहर है. इसराइलियों और फ़लस्तीनियों के पवित्र शहर यरूशलम को लेकर विवाद बहुत पुराना और ग़हरा है.

ये शहर इस्लाम, यहूदी और ईसाई धर्मों में बेहद अहम स्थान रखता है. पैगंबर इब्राहीम को अपने इतिहास से जोड़ने वाले ये तीनों ही धर्म यरूशलम को अपना पवित्र स्थान मानते हैं.

साल 1967 के युद्ध के छठे दिन की लड़ाई के बाद इसराइल ने पूर्वी यरूशलम को अपने कब्ज़े में कर लिया था. इसराइल ने अपनी नगरपलिकाओं की सीमाएं बढ़ाकर पूरे यरूशलम पर कब्ज़ा कर लिया.

साल 1980 में इसराइल ने एक क़ानून पारित किया और शहर को अपनी अविभाज्य राजधानी घोषित कर दिया था.

इमेज कॉपीरइट EPA
Image caption पश्चिम के यहूदी बहुल इलाके से पूर्वी हिस्से का नज़ारा

इसके बाद भी यरूशलम पर विवाद बना रहा. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यरूशलम को इसराइल की राजधानी के रूप में मान्यता नहीं दी गई और अंतरराष्ट्रीय कानून ने पूर्वी यरूशलम पर इसराइल के कब्ज़े को ग़ैर-कानूनी माना.

तभी से यरूशलम इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच विवाद का मुख्य कारण बना हुआ है. ये शहर अब भी पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में बंटा हुआ है. पश्चिमी हिस्सा करीब पांच लाख यहूदियों का ठिकाना है जबकि पूर्वी इलाके में करीब तीन लाख फ़लस्तीनी बसते हैं.

साल 1993 में इसराइल-फ़लस्तीनी शांति समझौता हुआ था जिसके अनुसार शांति वार्ता के आगे बढ़ने के बाद ही यरूशलम की स्थिति का फैसला लिया जाना है.

यरूशलम पर इसराइल और फ़लस्तीन के बीच अंतिम बातचीत 2014 में खत्म हो गई थी और अब अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप के फ़ैसले के बाद इस मसले पर अमरीका मध्यस्थता को भी नकार दिया है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए