घर का चूल्हा जलाने के लिए फ़ेसबुक का सहारा

  • 13 दिसंबर 2017
साएमा
Image caption साएमा घर का बना खाना दफ़्तरों में भेजती हैं

पाकिस्तानी प्रांत ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह की राजधानी पेशावर में कुछ औरतों ने घर की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए अपने घर की रसोई में ही अपना कारोबार शुरू कर दिया है. साथ ही इसके प्रसार के लिए सोशल मीडिया और उसमें भी ख़ासतौर से फ़ेसबुक का इस्तेमाल किया जा रहा है.

साएमा एक घरेलू महिला हैं. मेरी उनसे मुलाक़ात हुई तो वो घर में लेडी रीडिंग अस्पताल की एक डॉक्टर के लिए कबाब तैयार कर रही थीं. उन्होंने बताया कि वो अपने किचन में हर तरह के घरेलू खाना तैयार करके दफ़्तरों में भेजती हैं.

वह कहती हैं, "मैंने 600 रुपये की डिश ख़रीदी तो मैं काफ़ी परेशान थी कि ये निकलेंगी की नहीं निकलेंगी, ऑर्डर जाएंगे कि नहीं जाएंगे. और अब माशाअल्लाह से हर महीने नहीं तो हर दो महीने में तक़रीबन 10 से 15 हज़ार की मैं डिश ला रही हूं. तो इससे आप अंदाज़ा लगाएंगे कि ऑर्डर निकल रहे हैं तो मैं डिश ला रही हूं."

तकरीबन 50 किचन

यह कारोबार सोशल मीडिया पर नौजवानों में ज़्यादा लोकप्रिय है. किचन में काम करने वाली औरतों को अधिकतर ऑर्डर फ़ेसबुक के ज़रिए मिलते हैं.

Image caption पेशावर की साएमा ख़ुश हैं कि अब उन्हें काम के सिलसिले में घर से बाहर नहीं जाना पड़ता

प्रांत में तेज़ी से प्रसिद्ध होने वाले इस नए कारोबार में 70 फ़ीसदी तक घरेलू औरतें और 30 फ़ीसदी छात्राएं भी शामिल हैं. घर से चलने वाले इन व्यावसायिक किचन की तादाद 50 तक बताई जाती है लेकिन इनमें 20 से 30 किचन चालू हैं.

फ़ूड डिपार्टमेंट की पाबंदी

घरेलू किचन की बनी हुई चीज़ें कुछ अर्से तक यहां बड़े स्टोरों में भी उपलब्ध थी लेकिन फ़ूड डिपार्टमेंट ने शर्तों का हवाला देकर इन पर पाबंदी लगा दी. लेकिन अब भी ये चीज़ें घरों में एक ऑर्डर पर उपलब्ध रहती हैं.

पेशावर के दो नौजवानों ने एक वेबसाइट भी तैयार की है जिसमें इन किचन की सूची और उनके खानों के बारे में बताया गया है.

Image caption वेब डेवेलपर मुहम्मद एजाज़

किचन का सबसे बड़ा चैलेंज

बिज़नेस ऑर्गनाइज़र मुहम्मद एजाज़ ने बीबीसी को बताया, "फ़ेसबुक पर हमारा मामला सिर्फ़ ऑर्डर की बुकिंग तक सीमित नहीं है. हम भविष्य को देखते हुए रेस्तरां की मेज़ की बुकिंग की तरफ़ जा रहे हैं. यहां पर उनकी सेल्स रिपोर्ट होम किचन को मिलेगी. होम किचन का सबसे बड़ा चैलेंज यही है कि उन्हें पता नहीं चलता कि अगर वो नुक़सान और फ़ायदे में जा रहे हैं तो क्यों जा रहे हैं."

इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption कबाब

पेशावर की शाएमा ख़ुश हैं कि उन्हें इस काम के लिए घर से बाहर नहीं जाना पड़ता. वो अब न सिर्फ़ अपने बच्चों के तालीम और घर पर नज़र रख सकती हैं बल्कि घर बैठे मिल जाने वाले इस काम के ज़रिए आमदनी भी हो जाती है.

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