बिटक्वाइन को चुनौती देनेवाली मुद्रा कौन सी है?

  • 12 दिसंबर 2017
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पिछले कुछ हफ़्तों में बिटक्वाइन में आया उछाल हैरानी भरा रहा है, लेकिन बाज़ार में बेहतरीन रिटर्न देने वाली बिटक्वाइन अकेली वर्चुअल मुद्रा नहीं है.

एक और क्रिप्टोकरेंसी यानी वर्चुअल मुद्रा है जिसके उछाल ने बिटक्वाइन का मुनाफ़ा भी फीका कर दिया है.

इसका नाम है आईओटा (IOTA).

ये एक निवेश उत्पाद है जो इंटरनेट अर्थव्यवस्था की रीढ़ होने का दावा करता है.

नवंबर से लेकर अब तक IOTA की क़ीमतों में 774 फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है.

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क़ीमतों में आए उछाल ने IOTA की कुल बाज़ार पूंजी को 12 अरब डॉलर तक पहुंचा दिया है. इसके साथ ही ये दुनिया की पांच सबसे बड़ी वर्चुअल मुद्राओं की सूची में शामिल हो गया है.

वित्तीय सूचनाओं वाली साइट मार्केट वॉच के अनुसार, इनमें बिटक्वाइन, इथेरियम, बिटक्वाइन कैश, IOTA और रिपल शामिल हैं.

बीच में ऐसी ख़बरें भी आईं कि माइक्रोसॉफ़्ट जैसी बहुत सी बड़ी तकनीकी कंपनियां जर्मनी की उस ग़ैर-लाभकारी संस्था के साथ तालमेल बना रही हैं जिसकी देखरेख में IOTA एक सुरक्षित डेटा मार्केट बनाने में लगा है.

IOTA के सह संस्थापक और सीईओ डेविड संसटेबो ने सीएनबीसी को बताया कि मौजूदा समय में 99 प्रतिशत क़ीमती सूचनाएं गुम हो जाती हैं.

वो कहते हैं, "IOTA मुफ़्त में डेटा शेयर करने और जानकारी की सुरक्षा करने को बढ़ावा देता है."

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क्रिप्टोकरेंसी है क्या

नोट और सिक्कों जैसी पारंपरिक मुद्रा के उलट क्रिप्टोकरेंसी को कोई बैंक या वित्तीय संस्था नहीं छापती. यह एक डिजिटल मुद्रा है.

बिटक्वाइन इस वक़्त की सबसे मशहूर डिजिटल मुद्रा है जिसमें कंप्यूटर फ़ाइल को एक डिजिटल वॉलेट में रखा जाता है.

वर्चुअल मुद्रा हासिल करने के तीन तरीके हैं - इसे असल मुद्रा से भुगतान करके खरीदा जा सकता है या फिर बिटक्वाइन के बदले मिलने वाली सेवाओं और उत्पादों को बेचकर कमाया जा सकता है. तीसरा तरीका वर्चुअल मुद्रा बनाने वाली कंपनियों से लेने का है.

यह बाज़ार पूरी तरह से निजी निवेशकों के हाथ में है. इसके लिए सरकार के कोई नियम या निर्देश नहीं हैं और यह बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है. डिजिटल सोना कहा जाने वाला बिटक्वाइन पिछले साल 1200 फ़ीसदी से ज़्यादा बढ़ चुका है.

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हालांकि जानकार इसे अर्थव्यवस्था का आज तक का सबसे बड़ा बुलबुला बता रहे हैं.

नोबल पुरस्कार जीतने वाले जोसेफ़ स्टिग्लिट्ज़ ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि ''लोगों को बिटक्वाइन क्यों चाहिए? लोग वैकल्पिक मुद्रा क्यों खरीदना चाहते हैं? वैकल्पिक मुद्रा खरीदने के पीछे असल वजह यह है कि लोग इसका इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स बचाने जैसे कामों में करना चाहते हैं.''

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लेकिन अर्थशास्त्रियों, सरकारों और बैंकों की चेतावनियों के बाद भी निवेशकों का उत्साह बरकरार है. खतरे से कोई इंकार नहीं करता, लेकिन वे मानकर चल रहे हैं कि ख़तरा उठाकर ही मुनाफ़ा कमाया जा सकता है.

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