उत्तर कोरिया की क़ैद में पनपी एक कामयाब प्रेम कहानी

  • 15 दिसंबर 2017
चार्ल्स जेनकिंस और हितोमी सोगा. हितोमी की यह तस्वीर उनके अगवा होने से दो साल पहले की है. वे तब 17 साल की थीं. इमेज कॉपीरइट US ARMY/KYODO/ALAMY STOCK PHOTO
Image caption चार्ल्स जेनकिंस और हितोमी सोगा. हितोमी की यह तस्वीर उनके अगवा होने से दो साल पहले की है. वे तब 17 साल की थीं.

सोने से पहले हर रात चार्ल्स जेनकिंस अपनी पत्नी हितोमी सोगा को तीन बार चूमते थे.

उनका प्यार देखकर अंदाज़ा लगाना मुश्किल था कि चार्ल्स और हितोमी की शादी ज़बरदस्ती कराई गई थी.

हितोमी जापान की थीं और चार्ल्स अमरीका के उत्तरी कैरोलीना के. सोने से पहले चार्ल्स उन्हें 'ओयासुमी' कहकर जापानी भाषा में शुभ रात्रि कहते और हितोमी अंग्रेज़ी में जवाब देतीं 'गुड नाइट'.

चार्ल्स अपनी क़िताब 'द रिलक्टेंट कम्युनिस्ट' में लिखते हैं कि ''हम ऐसा इसलिए करते थे ताकि याद रख सकें कि हम कौन हैं और कहां से आए हैं.''

चार्ल्स और हितोमी की कहानी अजीब है, लेकिन उसी में एक प्यारी सी प्रेम कहानी भी छुपी है.

चार्ल्स की बीते सोमवार को मौत हो गई. वह 77 साल के थे.

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Image caption जेनकिंस 65 साल की उम्र में अमरीका में अपने परिवार से दोबारा मिल सके. अपनी 91 साल की मां पैटी कैस्पर के साथ चार्ल्स जेनकिंस.

'नशे की हालत में उत्तर कोरिया पहुंचे'

अमरीकी सार्जेंट चार्ल्स दक्षिण कोरिया में तैनात थे, जब 1965 में जनवरी की एक रात, 'नशे की हालत में, वह उत्तर कोरिया में प्रवेश कर गए'.

24 साल के चार्ल्स की यह सोचकर हालत खराब थी कि वह या तो सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों की गोली का शिकार होने वाले हैं और या फिर उन्हें पकड़कर वियतनाम में मरने भेज दिया जाएगा.

चार्ल्स के मुताबिक़, उन्होंने योजना बनाई कि वे रूसी दूतावास से शरण मांग लेंगे और फिर बतौर क़ैदी घर वापस चले जाएंगे.

चार्ल्स ने बताया, ''मुझे इसका अंदाज़ा नहीं था कि जिस देश में मैं थोड़े समय के लिए शरण मांग रहा हूं वो असल में एक विशाल, विकृत जेल है जिसमें जो एक बार घुस गया, वो कभी बाहर नहीं आता.''

उत्तर कोरिया में घुसे चार्ल्स को गिरफ़्तार कर लिया गया, जिसके बाद तकलीफ़ों का जो दौर शुरू हुआ, वह चार दशक तक चला.

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Image caption चार्ल्स के साथ उत्तर कोरिया की क़ैद में रहे जेम्स ड्रेसनोक

रोज़ दस घंटे तक भाषण सुनाए जाते

चार्ल्स को तीन और अमरीकी जवानों के साथ रखा गया जिनके नाम थे जेम्स जो ड्रेसनोक, लैरी एबशायर और महज़ 19 साल के कॉर्पोरल जैरी पैरिश, जिनका कहना था कि 'अगर वे कभी वापस केंटकी लौटे तो उनके ससुर उन्हें मार देंगे'.

चारों जवानों के साथ लगातार मारपीट की जाती थी और उन्हें दिन के दस घंटे उत्तर कोरिया के उस समय के नेता किम इल-सुंग के भाषण सुनवाए जाते थे.

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Image caption किम जोंग-इल (दाएं) ने अपने पिता किम इल-सुंग को खुश करने के लिए प्रोपगेंडा फ़िल्में बनवाईं

घर दिया, नागरिकता दी और फिर जबरन शादी करा दी

1972 में उन जैसे सीमा पार करके आने वाले लोगों को अलग घर और उत्तर कोरिया की नागरिकता दे दी गई. हालांकि तब भी उन पर निगरानी और मारपीट जारी रही.

उन्होंने एक सैन्य स्कूल में अंग्रेज़ी पढ़ाना शुरू किया. लेकिन वहां से चार्ल्स को उनके अंग्रेज़ी बोलने के लहजे की वजह से निकाल दिया गया.

इसके बाद उन्हें 20 प्रोपेगेंडा फ़िल्मों में बुरे अमरीकी का क़िरदार निभाने का काम मिला जिसने उन्हें काफ़ी मशहूर कर दिया.

इसी बीच उन चारों को एक अजीब सा आदेश दिया गया. उनसे कहा गया कि वे विदेशी महिला क़ैदियों से मिलें और उनसे शादी करें.

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Image caption अपनी पत्नी और बेटियों के साथ चार्ल्स जेनिकिंस. यह तस्वीर 2004 की है.

लेकिन उत्तर कोरिया को उनकी शादी से क्या मतलब था?

चार्ल्स का मानना है कि ऐसा करके उत्तर कोरिया विदेशी दिखने वाले जासूसों की एक पीढ़ी तैयार करना चाहता था.

चार्ल्स के मुताबिक़, उत्तर कोरिया में मौजूद विदेशी महिला क़ैदियों को ज़बरदस्ती वहां लाया गया था. उनका दावा है कि उन चारों जवानों की जिन महिलाओं से शादी कराई गई उन सभी का उत्तर कोरिया की खुफ़िया एजेंसी ने अपहरण किया था.

चार्ल्स बताते हैं कि उनसे शादी करने वाली हितोमी 1978 में 19 साल की थीं और जापान में बतौर नर्स काम कर रही थीं. तभी उन्हें पश्चिमी तटीय इलाक़े सादो आइलैंड से गिरफ़्तार कर लिया गया.

चार्ल्स का कहना है कि हितोमी को उत्तर कोरिया के जासूसों को जापानी भाषा और तौर तरीक़े सिखाने के लिए अगवा किया गया था.

चार्ल्स की मुलाक़ात हितोमी से तब हुई जब उन्हें उत्तर कोरिया जैसे ठंडे देश में अकेले रहते 15 साल हो चुके थे. 1980 में हितोमी से शादी करने वाले चार्ल्स ने सीबीएस को बताया कि मैंने उन्हें एक नज़र देखा और तय कर लिया कि मैं उन्हें कहीं नहीं जाने दे रहा.

शुरुआत में चार्ल्स और हितोमी के बीच कुछ भी एक जैसा नहीं था, सिवाय इसके कि वे दोनों उत्तर कोरिया से बेइंतहा नफ़रत करते थे.

लेकिन धीरे-धीरे दोनों के बीच प्यार ने जगह ली.

फिर दो बेटियां, मीका और बृंदा, भी आ गईं. 22 साल के साथ ने उन्हें एक-दूसरे की मौजूदगी के लिए शुक्रगुज़ार होना सिखा दिया.

उत्तर कोरिया ने मानी अपहरण की बात

2002 में उनकी ज़िंदगी में एक बड़ा बदलाव आया जब उस समय के नेता किम जोंग-इल ने माना कि 1970 और 80 के दशकों में उत्तर कोरिया ने 13 जापानी नागरिकों का अपहरण किया था.

किम जोंग-इल ने बताया कि 13 में से आठ जापानी नागरिकों की मौत हो चुकी थी (जापान ने इस दावे पर सवाल उठाए) और बाक़ी पांच नागरिकों को 10 दिन के लिए उनके देश भेजा जाएगा.

इन पांच लोगों में से दो शादीशुदा जोड़े थे और एक चार्ल्स की पत्नी हितोमी थी जो अपने पति के बग़ैर वहां गईं.

जापान ने अपने लोगों का बांहें फैलाकर स्वागत किया. इसके बाद ये पांचों कभी उत्तर कोरिया नहीं लौटे.

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Image caption जुलाई 2004 में इंडोनेशिया के जकार्ता एयरपोर्ट पर मिला जेनकिंस परिवार आंसू नहीं रोक पाया.

जापान जाते तो पकड़े जाते चार्ल्स

चार्ल्स और उनकी दोनों बेटियां लाचार थे. अमरीकी सेना को छोड़कर जाने की अधिकतम सज़ा उम्र क़ैद है. चार्ल्स को पता था कि अगर वे अपनी पत्नी के पास जापान गए तो अमरीकी सेना उन्हें गिरफ़्तार कर लेगी.

जैसे-तैसे दो साल गुज़रे लेकिन इसके बाद चार्ल्स और उनकी बेटियों के लिए हितोमी के बिना रहना मुश्किल हो गया.

चार्ल्स और उनका परिवार हितोमी से मिलने इंडोनेशिया गया क्योंकि इंडोनेशिया का अमरीका के साथ क़ैदियों के अदल-बदल का समझौता नहीं था.

कोरिया ने उन्हें एक छोटी सी यात्रा करने की ही इजाज़त दी थी लेकिन जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री जुनिकिरो कोइज़ुमी के प्रोत्साहन पर चार्ल्स ने कहा कि अपने परिवार को एक बार फिर साथ लाने के लिए वे कोर्ट मार्शल और जेल जाने का ख़तरा भी उठाने को तैयार हैं.

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Image caption कैंप ज़ामा के अमरीकी बेस पर अमरीकी लेफ़्टिनेंट कर्नल को सेल्यूट करते चार्ल्स जेनकिंस

''सार्जेंट जेनकिंस रिपोर्टिंग, सर''

11 सितंबर 2004 को चार्ल्स अस्पताल से एक मिनी वैन में टोक्यो के बाहर कैंप ज़ामा जाने के लिए निकले. स्लेटी रंग के कोट-पैंट में, बग़ैर छड़ी के सहारे चल रहे चार्ल्स ने अमरीकी सेना अधिकारी को एक कड़क सैल्यूट किया.

''सार्जेंट जेनकिंस रिपोर्टिंग, सर'' - उन्होंने कहा.

चार्ल्स ने सेना छोड़ने और दुश्मन की मदद करने (जब उन्होंने वहां अंग्रेज़ी पढ़ाई) का गुनाह कबूल लिया जिसके एवज़ में उन्हें 30 दिन की सज़ा हुई. अच्छे व्यवहार के लिए उन्हें पांच दिन पहले ही बरी कर दिया गया.

माना जाता है कि उन्होंने उत्तर कोरिया के बारे में अपनी पूरी जानकारी अमरीका के साथ साझा की.

जेल से छूटने के बाद जेनकिंस ने रोते हुए कहा कि ''मैंने ज़िंदगी में एक बड़ी ग़लती की लेकिन मेरी बेटियों को वहां से निकालकर लाना, यह मेरी ज़िंदगी में किया गया एक सही काम था.''

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Image caption अपनी पत्नी और बेटियों के साथ जापान पहुंचे चार्ल्स उम्र से बड़े दिखने लगे थे.

'बेटियों को जासूस बनाना चाहता था उत्तर कोरिया'

अपनी मौत तक भी चार्ल्स यही मानते रहे कि उत्तर कोरिया उनकी बेटियों को हथियार की तरह इस्तेमाल करना चाहता था. उन्हें यक़ीन था कि बेटियों के कॉलेज भी उन्हें सरकारी जासूस बनने के लिए तैयार कर रहे थे.

हितोमी सोगा 2004 में अपने पति और बेटियों के साथ सादो आइलैंड चली गईं. जेनकिंस को एक टूरिस्ट पार्क में राइस (चावल) क्रैकर बेचने और फ़ोटो लेने की नौकरी मिल गई. हितोमी सोगा एक स्थानीय नर्सिंग होम में काम करने लगीं.

लेकिन उत्तर कोरिया का ख़ौफ़ बना रहा. उन्होंने अपनी बेटियों को कह रखा था कि कभी ट्रैफ़िक पुलिस के लिए भी न रुकें क्योंकि वे उत्तर कोरिया के एजेंट हो सकते हैं.

उत्तर कोरिया की क़ैद ने चार्ल्स के 39 साल ही नहीं लिए बल्कि एपेंडिक्स और एक टेस्टिकल जैसे शरीर के अंग भी ले लिए. उनकी बांह पर बना अमरीकी सेना का एक टैटू बग़ैर एनस्थीसिया दिए काट दिया गया.

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Image caption हितोमी जापान गईं तो फिर उत्तर कोरिया नहीं लौट सकीं और चार्ल्स अपनी दो बेटियों के साथ दो साल तक उनसे मिलने का इंतज़ार करते रहे. उनकी मुलाक़ात 2004 में इंडोनेशिया में हुई.

चार्ल्स के साथी कभी नहीं लौटे

चार्ल्स के साथ बंदी रहे तीनों अमरीकी सैनिक कभी उत्तर कोरिया से नहीं निकल सके.

चार्ल्स अपनी ज़िंदगी बचाने का श्रेय अपनी पत्नी को देते थे. हितोमी की वजह से ही ज़िंदगी का बड़ा हिस्सा क़ैद में गुज़ारने वाले चार्ल्स एक आज़ाद शख़्स की तरह दुनिया से जा सके.

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