ट्रंप के वार पर चीन बना पाकिस्तान की ढाल

  • 3 जनवरी 2018
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ऐसे समय पर जब अमरीका ने पाकिस्तान को आंखें दिखाई हैं, चीन अपने पुराने दोस्त के साथ खड़ा दिख रहा है.

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने बीते डेढ़ दशक में पाकिस्तान को दी गई मदद को 'मूर्खतापूर्ण फ़ैसला' बताया था, जिसके बाद मंगलवार को अमरीकी प्रशासन ने पाकिस्तान पर 'डबल गेम' खेलने का आरोप लगाया और उसकी 1621 करोड़ रुपए की आर्थिक मदद रोकने का ऐलान कर दिया.

लेकिन ऐसे हालात में पाकिस्तान के सबसे करीबी दोस्त चीन ने उसका साथ देने की बात कही है.

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'हम हमेशा पाकिस्तान के साथ'

पाकिस्तान में मौजूद चीनी दूतावास के प्रवक्ता लिजिआन ज़िआओ ने ट्वीट कर कहा कि चीन हमेशा पाकिस्तान के साथ खड़ा रहेगा और उसका सहयोग जारी रखेगा.

लिजिआन ज़िआओ ने ट्वीट किया, ''जैसा कि हमने पहले भी कई बार कहा है, पाकिस्तान ने चरमपंथ से मुक़ाबला करने के कई महत्वपूर्ण प्रयास और त्याग किए. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चरमपंथ विरोधी गतिविधियों में भी पाकिस्तान ने महत्वपूर्ण योगदान दिया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इसे पहचानना चाहिए.''

उन्होंने आगे लिखा, ''चरमपंथ के ख़िलाफ़ लड़ाई में सहयोग के लिए हम पाकिस्तान और अन्य देशों का स्वागत करते हैं, साथ ही हमें अन्य क्षेत्रों की सुरक्षा और स्थिरता का भी सम्मान करना चाहिए.''

''चीन और पाकिस्तान हमेशा से ही बेहतर रणनीतिक साझेदार रहे हैं. चीन विभिन्न क्षेत्रों में पाकिस्तान के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार है जिससे दोनों देशों को और अधिक लाभ मिल सके.''

'भारत को खुश करने के लिए ट्रंप ने किया ट्वीट'

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स में लिखा गया है कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने भारत को खुश करने के लिए पाकिस्तान के ख़िलाफ़ ट्वीट किया.

रिपोर्ट में लिखा गया है कि अमरीका अपनी इंडो-पैसेफिक रणनीति में भारत के साथ अपनी अहम साझेदारी निभाने के लिए इस तरह के ट्वीट कर रहा है.

शंघाई इंस्टिट्यूट फॉर इंटरनेश्नल स्टडीज़ में एशिया-पैसेफिक सेंटर के निदेशक ज़ाओ गैनचेंग ने कहा है, ''ट्रंप के तमाम आरोप बेबुनियाद हैं, उनका इस तरह बयान देना गलत है.''

उन्होंने कहा, ''9/11 हमले के बाद पिछले 15 साल से पाकिस्तान ने लगातार अमरीका का सहयोग किया है, पाकिस्तान की मदद से ही अमरीकी सैनिक अफ़ग़ानिस्तान की धरती पर चरमपंथ के ख़िलाफ़ लड़ सके, और अब भी पाकिस्तान इस कार्य में अमरीका को ज़रूरी मदद कर रहा है.''

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Image caption पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद ख़क़ान

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेन शुआंग ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि चरमपंथ से लड़ने में पाकिस्तान ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, वह चरमपंथ के ख़िलाफ़ चल रहे अंतरराष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में भी जरूरी सहयोगी है.

ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट में लिखा है कि ट्रंप का यह ट्वीट चीन-अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों की दिसंबर के अंत में हुई बैठक के बाद आया है.

इस बैठक में चीन और पाकिस्तान के इकॉनोमिक कोरिडोर के संबंध में बात हई थी. ज़ाओ कहते हैं कि ट्रंप अपने ताज़ा रुख से भारत को अपनी तरफ़ करना चाहते हैं. इससे इंडो-पैसेफिक रणनीति में अमरीका-भारत-जापान-ऑस्ट्रेलिया का गठजोड़ करने में मदद मिलेगी.

'हम अपनी ज़मीन की रक्षा करने में सक्षम'

पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने कहा है कि पाकिस्तान अपनी भौगोलिक निष्ठा से समझौता नहीं कर सकता और अपनी ज़मीन की रक्षा करने में सक्षम है. पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान सीमा की तरफ़ बाढ़ लगाने का काम शुरू कर दिया है क्योंकि हम सीमा-पार के आवागमन को विनयमित करना चाहते हैं.''

उन्होंने आगे कहा, ''रोज़ाना 60 हज़ार से 70 हज़ार लोग पाक-अफ़ग़ान सीमा पार करते हैं इसलिए इस आवागमन के प्रबंधन पर नज़र रखे जाने की ज़रूरत है. पाकिस्तान पिछले कई दशकों से अफ़ग़ान शरणार्थियों को अपने यहां शरण देता रहा है और अब उनके स्वदेश लौटने का वक्त आ गया.''

ख़्वाजा आसिफ़ ने आगे कहा, ''अमरीका ने अफ़ग़ानिस्तान में करोड़ो डॉलर खर्च किए और अब उन्हें अफ़ग़ान शरणार्थियों को उनकी मातृभूमि में स्थापित करने में भी मदद करनी चाहिए.''

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