महिला जो ईरान में विरोध प्रदर्शन का चेहरा बन गईं

  • 5 जनवरी 2018
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पिछले कई दिनों से ईरान में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं. ईरान में हजारों लोग सरकार में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और कमजोर अ​र्थव्यवस्था के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं.

ईरान में प्रदर्शनकारियों पर काबू पाने के लिए सोशल मीडिया पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं.

प्रशासन ने इंस्टाग्राम और मैसेजिंग ऐप टेलिग्राम पर रोक लगा दी है ताकि लोग कॉल, मैसेज, वीडियो और तस्वीरों के ज़रिए विरोध के लिए इकट्ठे न हो सकें.

लेकिन, सोशल मीडिया पर कड़े प्रतिबंधों के बावजूद भी कुछ वीडियो और तस्वीरें ऑनलाइन शेयर हो रही हैं, जिनमें विरोध प्रदर्शन करते लोग और उन पर गोलियां चलाते सुरक्षा बलों की तस्वीरें भी हैं.

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इसी बीच एक महिला की तस्वीर भी शेयर हो रही है जिसमें महिला अपना सिर ढकने वाला स्कार्फ यानी हिजाब उतारकर एक छड़ी में उसे बांधकर हवा में लहरा रही है.

महिला ने इस्लामिक शासन और महिलाओं के लिए बने कड़े नियमों के​ विरोध में ऐसा किया है.

महिला कि ये तस्वीर असली तो है लेकिन इसे वर्तमान में चल रहे प्रदर्शनों के दौरान नहीं लिया गया है.

देश के दूसरे सबसे बड़े शहर मशाद में 28 दिसंबर को विरोध प्रदर्शनों की ​शुरुआत हुई थी. इसके बाद दूसरे शहरों में भी विरोध की आग भड़क उठी और प्रदर्शन होने लगे.

प्रदर्शनकारी ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई का शासन खत्म करने की मांग कर रहे हैं.

अमरीका आधारित एक ईरानी पत्रकार मसिह एलिनजेद के विरोध प्रदशर्न शुरू करने के एक दिन पहले स्कार्फ लहराती हुई महिला की ये तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई थी.

मसिह महिला अधिकार कार्यकर्ता हैं और 'माय स्टीलथी फ्रीडम' और 'व्हाइट वेन्ज़्डे' नाम के दो सोशल मीडिया अभियानों की शुरुआत कर चुकी हैं.

माय स्टीलथी फ्रीडम अभियान में ईरानी महिलाओं को बिना हिजाब के अपनी फोटो और वीडियो पोस्ट करने के लिए कहा गया था.

यहां महिलाओं के लिए हिजाब पहनना अनिवार्य है और अभियान में इसका विरोध किया गया था.

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वहीं, 2017 में शुरू हुए व्हाइट वेन्ज़्डे अभियान में महिलाओं से ईरान के सख़्त ड्रेस कोड के खिलाफ हर बुधवार को सफेद कपड़े पहनने के अपील की गई थी.

मसिह ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर एक महिला की तस्वीर पोस्ट की थी और उसे व्हाइट वेन्ज़्डे अभियान का हिस्सा बताया था.

उसी दिन उन्हें तेहरान की व्यस्त एंगेलैब स्ट्रीट पर फिल्माया गया था, राजधानी में प्रशासन ने घोषणा की थी कि सार्व​जनिक रूप से हिजाब नहीं पहनी हुईं महिलाओं को गिरफ़्तार नहीं किया जाएगा.

जो महिलाएं ठीक तरह से सिर नहीं ढकती हैं उन्हें इस्लामिक शिक्षा लेनी होगी.

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सत्ता पर मौलवियों की पकड़ के खिलाफ सरकार विरोधी पदर्शन करने वाले इस हेडस्कार्फ लहराती हुई महिला की तस्वीर सबसे ज़्यादा शेयर कर रहे हैं.

इसके चलते वह महिला ईरान के विरोध प्रदर्शन का चेहरा बन गई और इस कारण सैकड़ों ईरानी महिलाएं प्रदर्शनों का हिस्सा बन गई हैं. कई लोग इसे ''ईरान की रोजा पार्क्स'' भी कह रहे हैं.

पर्सियन में पोस्ट किए गए एक प्रसिद्ध ट्वीटर अकाउंट के अनुसार: ''हिजाब के ख़िलाफ़ खड़ी एक लड़की ईरानी महिलाओं के प्रतिरोध और सविनय अवज्ञा का प्रतीक बन गई है. रोजा पार्क्स उत्पीड़न के लिए झुकी नहीं थीं.''

प्रशासन को चुनौती देने के चलते इस महिला को श्रद्धांजलि दी जा रही है. इस ट्वीटर यूजर ने पोस्ट किया है कि लोग उस बॉक्स पर फूल चढ़ा रहे हैं जहां कथित तौर पर उस लड़की ने विरोध प्रदर्शन किया था.

कई लोगों ने अपने प्रोफ़ाइल पिक्चर में उस महिला का प्रदर्शन करता हुआ ग्राफ़िक भी लगा लिया है.

हालांकि, उस महिला की पहचान सामने नहीं आई है और ये भी नहीं मालूम कि उसके साथ क्या हुआ लेकिन वह आजादी का प्रतीक और सरकार विरोधी प्रदर्शनों का समर्थन करने वालों की उम्मीद बन गई है.

लेकिन, यह पहली ईरानी महिला की तस्वीर नहीं है जो विरोध प्रदर्शनों का चेहरा बनी हो. नीदा आगा सोल्तन की तस्वीर ने भी विवादित राष्ट्रपति चुनावों के चलते साल 2009 में शुरू हुए प्रदर्शनों में दुनिया भर के लोगों का ध्यान खींचा था.

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