उर्दू प्रेस रिव्यू: 'अपनी हार के लिए अमरीका पाकिस्तान को ज़िम्मेदार नहीं ठहरा सकता'

  • 7 जनवरी 2018
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Image caption अमरीकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन के साथ पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ

पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते अमरीका और पाकिस्तान के संबंधों में आई कड़वाहट से जुड़ी ख़बरें छाई रहीं. शुरुआत हुई राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के पाकिस्तान के बारे में किए गए ट्वीट से.

नए साल के अपने पहले ट्वीट में राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान पर जमकर हमला किया.

ट्रंप ने ट्वीट किया था, "पाकिस्तान झूठा और धोखेबाज़ है. हमने 15 साल में 33 अरब डॉलर देकर बेवक़ूफ़ी की. पाकिस्तान हमारे नेताओं को बेवक़ूफ़ समझता है. पाकिस्तान दहशतगर्दों को सुरक्षित पनाहगाह देता है और अफ़ग़ानिस्तान में दहशतगर्दों को निशाना बनाने में मामूली मदद मिलती है लेकिन अब ऐसा नहीं चलेगा."

ट्रंप के इस ट्वीट से पाकिस्तान में हंगामा मच गया.

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ट्रंप की निराशा

अख़बार 'जंग' के मुताबिक़ राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने एक बैठक कर ट्रंप के बयान पर मायूसी जताते हुए कहा कि अमरीकी राष्ट्रपति के आरोपों के बावजूद पाकिस्तान जल्दबाज़ी में कोई क़दम नहीं उठाएगा.

अख़बार 'नवा-ए-वक़्त' के अनुसार अमरीकी सुरक्षा सलाहकार जनरल एचआर मैकमास्टर ने एक इंटरव्यू में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप का पाकिस्तान के बारे में ट्वीट चरमपंथ के मामले में पाकिस्तान के दोहरे रवैये पर राष्ट्रपति ट्रंप की निराशा को व्यक्त करता है.

अख़बार 'एक्सप्रेस' के मुताबिक़ पाकिस्तान संसदीय समिति ने सर्वसम्मति से एक बयान जारी कर कहा कि देश के सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा लेकिन अमरीका के साथ हर मामले को बातचीत से सुलझाने की कोशिश की जानी चाहिए.

ट्रंप के ट्वीट से दोनों देशों के बीच आए तनाव अभी बरक़रार था तभी अमरीका ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ दूसरा बड़ा क़दम उठाया. अमरीका ने पाकिस्तान को दी जाने वाली सैन्य मदद रोक देने की घोषणा की.

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अमरीकी मदद

अख़बार 'दुनिया' के अनुसार अमरीका ने पाकिस्तान को दी जाने वाली 25 करोड़ डॉलर की सैन्य मदद रोक दी है. पाकिस्तान को सैन्य साज़-ओ-सामान पर भी पाबंदी लगी रहेगी.

अख़बार लिखता है कि अमरीकी विदेश विभाग के प्रवक्ता के अनुसार हक़्क़ानी नेटवर्क और अफ़ग़ान तालिबान के ख़िलाफ़ कार्रवाई न करने के कारण ऐसा किया गया है और अगर पाकिस्तान ने निर्णायक कार्रवाई नहीं की तो अमरीका और भी सख़्त क़दम उठा सकता है.

अख़बार के अनुसार अगर पाकिस्तान हक़्क़ानी नेटवर्क और अफ़ग़ान तालिबान के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करता है तो अमरीका सैन्य मदद दोबारा बहाल कर सकता है.

अख़बार 'जंग' के अनुसार पाकिस्तान ने अमरीका के इस फ़ैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इसका नुक़सान अमरीका उठाएगा.

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दहशतगर्दी के ख़िलाफ़

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के हवाले से अख़बार लिखता है, "दहशतगर्दी की समाप्ति के लिए पाकिस्तान ने जो जान और माल की क़ुर्बानियां दी हैं वो सिर्फ़ पाकिस्तान के लिए नहीं थीं और न ही पैसे के लिए बल्कि उन क़ुर्बानियों का फ़ायदा दुनिया भर को हुआ है."

पाकिस्तानी सेना ने कहा है कि अमरीकी मदद के बग़ैर भी पाकिस्तान इलाक़े में शांति क़ायम रखने और दहशतगर्दी के ख़िलाफ़ लड़ता रहेगा.

अख़बार 'नवा-ए-वक़्त' के अनुसार पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ़ ग़फ़ूर ने एक इंटरव्यू में कहा, "हमें इज़्ज़त की क़ीमत पर कोई सैन्य मदद नहीं चाहिए. पाक सेना अमरीकी मदद के बग़ैर भी बहुत ताक़तवर है."

अख़बार 'एक्सप्रेस' के अनुसार पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद फ़ैसल ने कहा है कि एकतरफ़ा घोषणा से अमरीका को कुछ नहीं मिलेगा.

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अफ़ग़ानिस्तान में हार

मोहम्मद फ़ैसल के अनुसार पिछले 15 वर्षों में चरमपंथ के ख़िलाफ़ लड़ाई में पाकिस्तान ने 120 अरब डॉलर ख़र्च किए हैं.

अख़बार 'दुनिया' ने लिखा है कि अमरीकी धमकियों का सभी पार्टियों ने मिलकर मुक़ाबला करने का फ़ैसला किया है.

अख़बार के अनुसार पाकिस्तानी संसद के स्पीकर की अध्यक्षता में हुई सभी पार्टियों की बैठक में विदेश मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में अपनी हार के लिए अमरीका पाकिस्तान को ज़िम्मेदार नहीं ठहरा सकता.

ख़्वाजा आसिफ़ के अनुसार अमरीकी राष्ट्रपति के बयान पर पाकिस्तान की सभी राजनीतिक पार्टियां और पाकिस्तान का सैन्य नेतृत्व एक साथ है.

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