तुर्की के सैनिक सीरिया में, संयम बरतने की अपील

  • 22 जनवरी 2018
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उत्तरी सीरिया से कुर्द लड़ाकों को खदेड़ने के मकसद से शुरू की गई तुर्की की सैन्य कार्रवाई के बाद अब अमरीका ने तुर्की से संयम बरतने के लिए कहा है.

अमरीका ने तुर्की से कहा है कि वो आम नागरिकों को निशाना बनाने से बचे और इस्लामिक स्टेट को हराने पर ध्यान दे.

तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप अर्दोआन ने कुर्द लड़ाकों को खत्म करने की बात कही है. उन्होंने उम्मीद जताई है कि यह अभियान जल्दी ही खत्म हो जाएगा.

'अल्लाह हमारे साथ'

तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन ने कहा, ''देखते हैं कि ये कुर्द लड़ाके अफ़रीन से कब तक भागने में सफल होते हैं, हम उनका पीछा करेंगे और उन्हें सांस तक लेने नहीं देंगे, हम अकेले नहीं है, अल्लाह हमारे साथ है और हम अपने अभियान में जल्द ही सफल होंगे.''

तुर्की ने बीते शनिवार को सीरिया के सीमावर्ती इलाके अफरीन में हवाई हमले कर कुर्द लड़ाकों को खत्म करने के लिए अपने अभियान की शुरुआत की थी.

वहीं तुर्की की इस सैन्य कार्रवाई पर आज संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक आपातकालीन बैठक भी होनी है.

सुरक्षा परिषद की आपात बैठक

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फ्रांस के विदेश मंत्री जीन वेस लि ड्रायन ने हालात का जायज़ा लेने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक को बेहद जरूरी बताया है.

उन्होंने कहा, ''सीरिया के ताज़ा हालात पर फ्रांस बेहद चिंतित है, इसलिए हमने सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की बात कही है, हालात बेहद नाजुक नज़र आ रहे हैं, संघर्षविराम की जल्द से जल्द कोशिशें की जानी चाहिए.''

वहीं कुर्द लड़ाकों की सेना वायपीजी का कहना है कि उन्होंने तुर्की की 'सैन्य घुसपैठ' का मुंहतोड़ जवाब दिया है, जिसमें तुर्की के चार सैनिक मारे गए हैं.

हालांकि तुर्की ने इसकी पुष्टि नहीं की है. कुर्द समूह ने ये भी कहा है कि रविवार को हुए हवाई हमलों में आठ आम नागरिक मारे गए. लेकिन तुर्की का कहना है कि उसने सिर्फ चरमपंथियों को ही निशाना बनाया है.

नैटो में तुर्की के प्रतिनिधि अहमत बेरत कोंकर ने बीबीसी से कहा कि अमरीका कुर्द लड़ाकों का साथ देकर इलाके में डर का माहौल बना रहा है.

अहमत बेरत कोंकर ने कहा, ''हम जो कर रहे हैं वह हमारी नज़र में वैध है, इसलिए हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय और नाटो के सहयोगियों से उम्मीद करते हैं कि वे तुर्की का साथ देंगे, नैटो के जो सदस्य इस अभियान के ख़िलाफ़ हैं उन्हें अपनी सदस्यता के बारे में फिर से विचार करना चाहिए.''

तुर्की की कार्रवाई की वजह क्या है?

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अमरीका सीरिया से इस्लामिक स्टेट को उखाड़ फेंकने के लिए कुर्द सेना वायपीजी का समर्थन करता है. जबकि तुर्की इन कुर्द लड़ाकों को चरमपंथी समूह मानता है. तुर्की का मानना है कि इन समूहों का संबंध प्रतिबंधित कुर्दिश वर्कर पार्टी पीकेके के साथ है.

तुर्की इस बात से भी नाराज़ है कि अमरीका इस्लामिक स्टेट को रोकने के लिए सीरियाई डेमोक्रेटिक फोर्स यानि एसडीएफ के साथ मिलकर एक सीमा सुरक्षा बल बनाने की बात कर रहा है, तुर्की के राष्ट्रपति ने इसे 'टेरर आर्मी' की संज्ञा दी है.

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दूसरी तरफ़ कुर्द अलगाववादियों का मानना है कि तुर्की ने 1980 के दशक के बाद गुरिल्ला वॉर के जरिए उनकी सांस्कृतिक पहचान को नष्ट करने की कोशिश की है.

अमरीका और फ्रांस जैसी पश्चिमी ताकतें तुर्की और सीरिया दोनों से ही संयम बरतने की अपील कर रही हैं. रूस ने भी तुर्की की इस कार्रवाई पर चिंता जताई है. वहीं सीरिया के एक और साथी ईऱान ने भी इस कार्रवाई को जल्दी खत्म करने की बात कही है.

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