जब उत्तर कोरिया ने अमरीका को घुटने टिका दिए

  • 24 जनवरी 2018
यूएसएस पुएब्लो पर तैनात अमरीकी नौसैनिक (फ़ोटो: KCNA)
Image caption यूएसएस पुएब्लो पर कब्ज़े को उत्तर कोरिया अमरीकी साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ अपनी जीत के तौर पर पेश करता है (फ़ोटो: KCNA)

अमरीकी नौसेना का एकमात्र जहाज़ उसके कब्ज़े में नहीं है. इस जहाज़ पर अमरीका के एक दुश्मन देश का कब्ज़ा है.

50 साल पुरानी बात है. वो 23 जनवरी, 1968 की तारीख थी जब उत्तर कोरिया ने अमरीका के नौसैनिक जहाज़ 'यूएसएस पुएब्लो' पर कब्ज़ा कर लिया था.

उत्तर कोरिया का कहना है कि ये अमरीकी जहाज़ उसकी जासूसी कर रहा था और इसे आज भी प्योंगयांग नदी में खड़ा देखा जा सकता है.

उत्तर कोरिया इसे अपनी जीत की ट्रॉफ़ी के तौर पर पेश करता है और 'यूएसएस पुएब्लो' उसके यहां सैलानियों को दिखाने की चीज़ है.

यहां आने वाले लोगों को बताया जाता है कि उत्तर कोरिया की पीपुल्स आर्मी के बहादुर नौसैनिकों ने किस तरह से इस पर कब्ज़ा किया था.

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Image caption 'यूएसएस पुएब्लो' पर .50 कैलीबर की मशीन गनें लगी हुई थीं लेकिन सिर्फ़ इनसे उत्तर कोरिया का मुक़ाबला नहीं किया जा सकता था

अमरीका ने मांगी माफी

पचास सालों से उत्तर कोरिया ये दावा करता रहा है कि 'यूएसएस पुएब्लो' को उसके समुद्री इलाके में अवैध तरीके से गुज़र रहा था और इसीलिए उसे कब्ज़े में लिया गया.

अमरीकी जहाज़ पर उत्तर कोरिया की कार्रवाई का नतीजा ये हुआ कि एक अमरीकी नौसैनिक की मौत हो गई और 83 नौसैनिक हिरासत में ले लिए गए.

इन्हें 11 महीनों तक हिरासत में रखा गया जहां उन्हें कड़ी यातना से गुज़रना पड़ा.

राष्ट्रपति लिंडन बी जॉनसन के नेतृत्व वाली तत्कालीन अमरीकी सरकार को हिरासत में लिए अमरीकी नौसैनिकों की रिहाई के लिए उत्तर कोरिया से माफी मांगनी पड़ी थी.

माफ़ीनामे में अमरीका ने स्वीकार किया था कि उसके जहाज़ ने उत्तर कोरिया के समंदर में घुसपैठ की थी. हालांकि बाद में राष्ट्रपति जॉनसन माफ़ी की बात से मुकर गए.

कई लोग ये मानते हैं कि उत्तर कोरिया के सामने अमरीका को उस वक़्त हार का कड़वा स्वाद चखना पड़ा था.

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Image caption 1968 में जब 'यूएसएस पुएब्लो' को हिरासत में लिया गया तो उस वक्त जहाज के चालक दल में 84 लोग थे

अंतरराष्ट्रीय समुद्र

वो 23 जनवरी, 1968 की रात थी. 155 मीटर लंबा अमरीकी जहाज़ 'यूएसएस पुएब्लो' उत्तर कोरिया के तटवर्ती इलाके के पास से गुज़र रहा था.

'यूएसएस पुएब्लो' पर हल्के हथियार थे और ऐसा जताने की कोशिश की जा रही थी कि ये समुद्र के किसी वैज्ञानिक रिसर्च की मुहिम पर था.

भीतर से ये अत्याधुनिक संचार उपकरणों से लैस था, इसके चालक दल के सदस्य भी संदेशों को पकड़ने और उसकी व्याख्या करने के काम में माहिर थे.

अमरीकी पक्ष का ये दावा था कि जहाज़ अंतरराष्ट्रीय समुद्र में था और इस वजह से इसके कैप्टन लॉयड बुशर को ये भरोसा था कि उन्हें हिरासत में नहीं लिया जा सकता है.

लेकिन लॉयड बुशर को उस वक्त बड़ा झटका लगा जब उन्होंने देखा कि उत्तर कोरियाई जहाज़ों ने 'यूएसएस पुएब्लो' को घेर लिया है.

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Image caption सैनिक वर्दी में मौजूद गाइड प्योंगयांग आने वाले सैलानियों को इस जहाज का सैर कराती हैं

जहाज़ पर हथियार नहीं थे

उत्तर कोरियाई गश्तीदल में से एक ने उन्हें जहाज़ से उतारे जाने के लिए तैयार रहने को कहा. अमरीकी नौसैनिकों के इनकार के बाद उन पर गोलियां चलाई गईं.

चालक दल के सदस्य लेफ़्टिनेंट स्किप शुमाकर उस वक्त 24 साल के थे और 'यूएसएस पुएब्लो' के ऑपरेशन ऑफ़िसर थे.

वे बताते हैं, "हमने जवाब में एक भी गोली नहीं चलाई. हमारा विचार ये था कि हमारे जहाज़ पर कोई हथियार नहीं है. हमने अपनी सफ़ाई के लिए यही तरीका चुना था."

जहाज़ पर प्वॉयंट 50 कैलिबर की दो मशीन गनें लगी हुई थीं और सख्त निर्देश दिए गए थे कि उन्हें हर हाल में छुपाये रखना है.

'यूएसएस पुएब्लो' के कैप्टन ने अपने लोगों से जहाज़ से उतर जाने का आदेश दिया लेकिन वे उत्तर कोरियाई बेड़े की गिरफ़्त में आने से खुद को बचा न सके.

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Image caption अमरीका को ये डर था कि 'यूएसएस पुएब्लो' पर मौजूद उपकरण और दस्तावेज़ उत्तर कोरिया के जरिये सोवियत संघ के हाथ लग सकता था

संवेदनशील दस्तावेज़

लेकिन इस भगदड़ में 'यूएसएस पुएब्लो' के चालक दल के सदस्यों को ये मौका मिल गया कि जहाज़ पर मौजूद संवेदनशील दस्तावेज़ों को नष्ट किया जा सके.

हालांकि उनके पास वक्त कम था और उन्हें अत्याधुनिक संचार उपकरणों को भी निष्क्रिय करना था. साथ ही जहाज़ पर कागज़ कतरने की भी मशीन नहीं थी.

ऐसे में उन्होंने एक बैरल (ड्रम) में धीरे-धीरे कागज़ात जलाने की कोशिश की. इसके बावजूद वे उनके साथ मौजूद खुफिया दस्तावेज़ों के एक छोटे से हिस्से से ही छुटकारा पा सके.

दूसरी ओर जब उत्तर कोरिया गश्ती दल ने देखा कि जहाज से धुआं निकल रहा है तो उन्होंने गोलियां चलानी शुरू कर दी.

कुछ घंटों के संघर्ष के बाद एक अमरीकी नौसैनिक की मौत हो गई और कुछ घायल भी हुए. कैप्टन बुशन ने आत्मसमर्पण करने का फ़ैसला किया.

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Image caption उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग-उन सरकारी समारोहों में 'यूएसएस पुएब्लो' पर शिरकत करते देखे गए हैं

उत्तर कोरियाई इलाके में घुसपैठ

हिरासत में लिए गए 'यूएसएस पुएब्लो' के नौसैनिकों को उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग की एक जेल ले जाया गया.

इसका मक़सद ये था कि उनसे जितनी जानकारी हासिल की जा सके, ली जाए.

कैप्टन बुशर ने ये मानने से इनक़ार कर दिया कि 'यूएसएस पुएब्लो' ने उत्तर कोरियाई इलाके में घुसपैठ की थी या फिर वो कोई जासूसी जहाज़ चला रहे थे.

कैप्टन को बुरी तरह से पीटा गया. लेफ्टिनेंट शुमाकर को आज भी याद है कि उनसे जानकारी उगलवाने के लिए किस तरह की यातनाएं दी गई थीं.

लेफ्टिनेंट शुमाकर ने बताया, "उन लोगों ने कैप्टन के सिर पर बंदूक़ तान दी. उन्होंने कहा कि हम तुम्हें गोली मार देंगे. ट्रिगर दबा दी गई. बंदूक़ खाली थी. कैप्टन बुशर ने फिर भी इनकार कर दिया."

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अमरीका में बेचैनी

उत्तर कोरिया की ओर से पूछताछ करने वालों ने कैप्टन बुशर को फायरिंग स्क्वॉयड के सामने खड़ा कर दिया.

बुशर को धमकाया गया कि ना झुकने पर उनके लोगों को एक-एक करके गोली मार दी जाएगी.

आख़िरकार कैप्टन बुशर ने अपने कन्फेशन पर दस्तख़त करने की रजामंदी दे दी. 'यूएसएस पुएब्लो' को हिरासत में लिए जाने की ख़बर से अमरीका में बेचैनी बढ़ गई.

अमरीका ने उनको बचाने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की क्योंकि उन्हें ये पता ही नहीं था कि नौसैनिकों को कहां पर क़ैद कर रखा गया है.

वो शीत युद्ध का दौर था. अमरीका और सोवियत संघ के बीच तनाव चरम पर था. सैनिक कार्रवाई का फैसला बिना पूरी तरह से सोचे विचारे नहीं किया जा सकता था.

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अमरीकी नौसैनिकों की तस्वीर

जहाज़ पर मौजूद दस्तावेज़ों को उत्तर कोरिया ने अपने कब्ज़े में ले लिया. अमरीका को ये अंदेशा था कि सोवियत संघ के केजीबी एजेंट्स इन दस्तावेज़ों तक पहुंच गए होंगे.

क़ैद में लिए गए अमरीकी नौसैनिकों को लंबे समय तक मुश्किल हालात में रहना पड़ा. उत्तर कोरिया अमरीका से ये चाहता था कि वो ग़लती माने.

राष्ट्रपति जॉनसन से बातचीत के लिए हॉट लाइन बनाई गई. एक मौके पर उत्तर कोरिया ने आठ अमरीकी नौसैनिकों की तस्वीर जारी की.

वो ये दिखाना चाहते थे कि क़ैदियों के साथ अच्छा बर्ताव किया जा रहा है. तस्वीर में मैरीन मोस्ट्रा ने अपनी बीच वाली उंगली उत्तर कोरिया सैनिकों की तरफ़ किए हुए थे.

लेफ़्टिनेंट शुमाकर बताते हैं, "हमने उन्हें बताया कि इस तरह से उंगली दिखाना हवाई प्रांत में खुशकिस्मती का प्रतीक माना जाता है."

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जासूसी अभियान

ये तस्वीर तब टाइम मैगज़ीन में छपी थी, लेख में 'यूएसएस पुएब्लो' के चालक दल के साहस की तारीफ़ की गई थी.

उत्तर कोरिया को जब इस इशारे का मतलब समझ में आया तो उन्होंने हिंसक तरीके से अपनी प्रतिक्रिया दी.

शुमाकर बताते हैं, "वे हमारे इशारों का मतलब जानना चाहते थे. वे ये पूछ रहे थे कि पिछले दस महीनों के दौरान हमने गुप्त भाषा में क्या-क्या बात की."

अमरीका के पास ज्यादा विकल्प नहीं बचे थे. राष्ट्रपति जॉनसन की सरकार ने एक बयान जारी कर ये माना कि गिरफ़्तारी के वक़्त जहाज़ जासूसी अभियान पर था.

अमरीका को उत्तर कोरिया से माफी मांगनी पड़ी. कैप्टन बुशर से धन्यवाद देने वाला मैसेज जबरन रिकॉर्ड कराया गया.

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पनमुनजोम गांव

ठीक 11 महीने बाद 23 दिसंबर, 1968 को इन सैनिकों को रिहा कर दिया गया.

ये रिहाई उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया की सीमा के बीच पड़ने वाले गांव पनमुनजोम से हुई. अमरीका ने अपने माफ़ीनामे को रद्द कर दिया.

लॉयड बुशर पर उत्तर कोरिया के समक्ष आत्मसमर्पण करने की वजह से अदालत में मुकदमा चला. कोर्टमार्शल की सिफारिश की गई.

लेकिन नेवी सेक्रेटरी जॉन शेफी ने कोर्ट मार्शल की सिफ़ारिश मानने से इनकार कर दिया. साल 1989 में इन नौसैनिकों को उनके साहस के लिए सम्मानित किया गया.

लेकिन अमरीकी नौसेना में आज भी कई ऐसे लोग हैं जो ये मानते हैं कि चालक दल को आत्मसमर्पण करने के बजाय मृत्यु तक उत्तर कोरिया से संघर्ष करना चाहिए था.

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