वुसत का ब्लॉग: क़त्ल की दो वारदातें जिन्होंने खोली पाकिस्तान की ज़ुबान

  • 5 फरवरी 2018
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Image caption सात वर्षीय ज़ैनब की क़सूर में हत्या कर दी गई थी

वैसे तो क़त्ल, बलात्कार और अपहरण की इतनी घटनाएं घट रही हैं कि अब ये मुद्दे किसी के लिए भी आश्चर्यजनक नहीं रहे.

मगर इनमें से कोई एक घटना ऐसी भी हो जाती है जो समाज की सोच में दरारें डाल देती है. ऐसे ही दो क़त्ल पाकिस्तान में पिछले महीने हुए.

एक तो लाहौर के करीब बुल्लेशाह के शहर कसूर में सात साल की ज़ैनब का रेप के बाद क़त्ल. इसने पाकिस्तान के समाज में ये तब्दीली पैदा की है कि अब लोग ऐसी घटनाओं को अपने सीने, घर, ख़ानदान, बिरादरी और मोहल्ले में दबाने और छुपाने के बजाए सामने ला रहे हैं और खुलकर बात कर रहे हैं.

पहली बार कई सेलिब्रिटीज़ मुंह खोल रहे हैं कि उनके साथ क्या हुआ और लोग उनका पहले की तरह हंसी ठट्ठा करने की बजाए उनकी बात ध्यान से सुन रहे हैं.

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लाहौर में जब एक बाप ने अपनी चौदह साल की बेटी का बलात्कार किया तो उसकी मां ने उसे छुपाने की बजाए अपने पति के ख़िलाफ़ थाने में ख़ुद जाकर रेप की एफ़आईआर करवा दी.

ऐबटाबाद में जब एक मोहल्ले वाले ने एक 11 साल के बच्चे को बातों में लगाके लाहौर ले जाने की कोशिश की तो ऐबटाबाद पुलिस की डीएसपी असमा नक़वी ने इस बच्चे की तस्वीर तुरंत व्हाट्सएप के ज़रिए हर नाके और ऐबटाबाद से लाहौर जाने वाली हर बस कंपनी को भेज दी. नतीजा ये हुआ कि अपहरण करने वाला रास्ते में ही पकड़ लिया गया.

ज़ैनब के क़त्ल के बाद कोई दिन ऐसा नहीं जाता कि अख़बारों में रेप या रेप की कोशिश की आठ से दस ख़बरें न छपती हों. पहले एक हफ़्ते में ऐसी दो या तीन ख़बरें ही छपती थीं. अब बच्चे या बच्चों के घरवाले टीवी कैमरे के सामने खुलकर बात कर रहे हैं.

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एक महीने पहले वो गोलमोल बात करते थे या बिल्कुल ही नहीं करते थे. अब टीवी टॉक शो में ये भी एक अहम मुद्दा है कि बच्चों को कैसे बचाया जाए. उन्हें स्कूल में इस बारे में क्या पढ़ाया और सिखाया जाए और घरवालों को बच्चों की सुरक्षा के बारे में किस तरह की बुनियादी जागरुकता दी जाए और डीएनए प्रोफ़ाइलिंग को लाज़मी किया जाए.

दूसरा क़त्ल कराची में नकीबुल्लाह आफ़रीदी का हुआ जो अब एक आंदोलन बन चुका है. नकीबुल्लाह को तालिबान आतंकी कहके पुलिस कर्मचारी राव अनवार ने तीन और लोगों समेत एनकाउंटर में मार दिया.

जब शोर मचा तो जांच हुई और नकीबुल्लाह बेग़ुनाह निकला. अब पुलिस और नकीबुल्लाह के हमदर्द राव अनवार को तलाश कर रहे हैं. राव अनवार ने ढाई सौ से अधिक ऐसी वारदातें की. अब हर मरने वाले के वारिस आहिस्ता-आहिस्ता सामने आकर ये सवाल उठा रहे हैं कि जब अदालत मौजूद है तो एनकाउंटर की क्या ज़रूरत है.

क्या इस अंधेर नगरी में किसी भी शहरी को जाती इंतेकाम या किसी के कहने पर या रिश्वत न देने पर आतंकी समझकर मारा जा सकता है? थैंक यू ज़ैनब और थैंक यू नकीबुल्लाह. तुम तो चले गए मगर हमारी ज़बान पर लगा ताला खोल गए. देखते हैं कि कहीं ये ताला दोबारा न लग जाए.

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