अमरीका में नौकरियों की बाढ़, पर धड़ाम हुए शेयर बाज़ार

  • 9 फरवरी 2018
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अमरीकी शेयर बाज़ारों में गुरुवार को एक बार फिर तेज़ गिरावट आई और डाओ जोंस हफ्ते में दूसरी बार 1000 अंकों से अधिक टूट गया.

शेयर बाज़ारों में बिकवाली हावी रही और डाओ जोंस 4.15 प्रतिशत टूट कर 23,860 अंकों पर बंद हुआ.

एसएंडपी 500 इंडेक्स में भी पौने चार फ़ीसदी की गिरावट आई और ये 100 से अधिक टूटा.

नैस्डैक में 275 अंकों की गिरावट आई और ये 6,777 के स्तर तक फिसल गया.

यूरोपीय बाज़ारों में गिरावट के बाद अमरीकी बाज़ारों में गिरावट से निवेशकों के हाथ-पांव फूल गए हैं. लंदन स्टॉक एक्सचेंज में डेढ़ फ़ीसदी, जर्मनी के शेयर बाज़ारों में 2.6 फ़ीसदी और फ्रांस के शेयर बाज़ारों में 2 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई.

ये है डाउ जोंस के लुढ़कने की वजह

डाऊ जोंस में साल 2008 के बाद सबसे बड़ी गिरावट

महंगाई बढ़ने की आशंका

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गिरावट की वजह दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई का बढ़ना और ब्याज दरों में बढ़ोतरी को माना जा रहा है.

सोमवार को भी कारोबारी सत्र में डाओ जोंस 1,175 अंकों यानी 4.6 फीसदी की भारी गिरावट के साथ 24,346 के स्तर पर बंद हुआ था. अमरीकी शेयर बाजार में अगस्त 2011 के बाद आई यह सबसे बड़ी गिरावट थी.

बैंक ऑफ़ इंग्लैंड की ताज़ा क्रेडिट पॉलिसी में ब्याज दरों को हालांकि 0.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है, लेकिन कहा गया है कि ब्याज दरों में जल्द बढ़ोतरी होने की संभावना है.

गुरुवार को अमरीका में साप्ताहिक बेरोज़गारी का आंकड़ा आया, जिसमें बेरोज़गारी भत्ता हासिल करने वालों की संख्या 45 साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है. इस ख़बर के बाद शेयर बाज़ारों में तेज़ गिरावट का रुख़ रहा.

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अधिक नौकरियां मिलने का मतलब है कि नियोक्ताओं को नए कर्मचारियों को बनाए रखने के लिए अधिक और आकर्षक वेतन देना होगा ताकि उन्हें नौकरी पर बनाए रखा जा सके.

अधिक तनख्वाह का मतलब है कि महंगाई बढ़ सकती है और महंगाई दर को काबू में रखने के लिए ब्याज दरों को बढ़ाने का फ़ैसला हो सकता है.

दुनिया में अधिकांश केंद्रीय बैंक महंगाई पर नियंत्रण पाने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी का हथियार इस्तेमाल करते हैं.

ब्याज दरें अधिक होने का असर कर्ज पर पड़ेगा, मतलब कंपनियों और व्यक्तियों के लिए कर्ज़ लेना महंगा हो जाएगा. हालाँकि शेयर बाज़ारों में गिरावट की एक वजह विश्लेषक मुनाफ़ावसूली को भी मान रहे हैं. जानकारों का कहना है कि शेयर बाज़ारों में पिछले कुछ महीनों से लगातार ख़रीदारी का दौर चल रहा है और अब मुनाफ़ावसूली के कारण इनमें गिरावट आ रही है.

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