फ़लस्तीनी राष्ट्रपति को मोदी से क्या उम्मीदे हैं

  • हरेंद्र मिश्रा
  • वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास

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फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास

फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मध्य-पूर्व शांति प्रक्रिया में भारत की भूमिका पर चर्चा करेंगे. भारतीय प्रधानमंत्री की ऐतिहासिक फ़लस्तीन यात्रा से ठीक पहले महमूद अब्बास ने कहा कि वो इसराइल के साथ शांति प्रक्रिया में भारत क्या भूमिका निभा सकता है, इस पर बातचीत करेंगे.

फ़लस्तीनी नेतृत्व और वहां के लोग इस यात्रा को कैसे देखते हैं? इस सवाल पर राष्ट्रपति अब्बास कहते हैं, ''भारत ने फ़लस्तीन को 1988 में मान्यता दे दी थी. हम संयुक्त राष्ट्र महासभा में येरुशलम को लेकर हमारे पक्ष में भारत के वोट और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फ़लस्तीन के अधिकारों को लेकर भारतीय समर्थन को नहीं भूल सकते हैं. साथ ही फ़लस्तीन की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भारतीय समर्थन को भी हम नहीं भूल सकते.''

वे कहते हैं, ''2015 में हमने रामल्लाह में भारतीय राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का स्वागत किया था, वो फ़लस्तीन आने वाले भारत के पहले राष्ट्रपति थे. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की यात्रा बहुत सफल थी. उनके बाद मेरी भारत की यात्रा भी बहुत सफल रही थी.''

पढ़िए राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने साक्षात्कार में और क्या कहा

हम प्रधानमंत्री मोदी का रामल्लाह के उनके ऐतिहासिक दौरे पर स्वागत करने वाले हैं. यह दौरा भारत और फ़लस्तीन देश और दोनों मुल्कों के लोगों के बीच मजबूत संबंध को और आगे ले जाएगा.

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2017 में भारत के दौरे पर आए थे फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास

द्विपक्षीय मोर्चे पर फ़लस्तीनियों और भारत के बीच वार्ता के अहम बिंदु क्या हैं? क्या दोनों पक्ष किसी मसौदे पर हस्ताक्षर करने वाले हैं. अगर हां, तो किन किन समझौते पर हस्ताक्षर होंगे?

हम शांति वार्ता में हुई हाल की घटनाओं पर प्रधानमंत्री मोदी से चर्चा करेंगे. इसके अलावा हमारे आपसी संबंध और क्षेत्रीय स्थिति पर भी चर्चा होगी. इस क्षेत्र में शांति की बहाली में भारत के संभावित किरदार पर भी चर्चा होगी. साथ ही वर्तमान मौजूदा रिश्तों के अलावा विभिन्न आर्थिक पहलुओं पर भी चर्चाएं होंगी.

कई उन समझौतों, ज्ञापनों पर भी हस्ताक्षर किए जाएंगे जिसके तहत भारत स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कृति और महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में कई परियोजनाओं में मदद देगा.

कुछ फ़लस्तीनी अधिकारी बता रहे हैं कि इस दौरे पर आर्थिक सहयोग को मजबूत बनाने पर ध्यान दिया जाएगा. आप दोनों पक्षों के बीच किस तरह के आर्थिक सहयोग को देखते हैं और दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए आप क्या सुझाव देंगे?

भारत सरकार और वहां के लोगों ने फ़लस्तीन के लोगों की बहुत सहायता की है. उनकी मदद से यहां प्रशिक्षण केंद्र, स्कूल और फ़लस्तीनियों लिए वेस्ट बैंक और गज़ा में रोजगार के रूप में ज़रूरी मानवीय सहायता प्राप्त हुई है.

2016 में हमने रामल्लाह में फ़लस्तीन इंडिया टेक्नो पार्क परियोजना की नींव रखी, और हम एक कूटनीतिक संस्थान की स्थापना की उम्मीद कर रहे हैं, जिसे भारत सरकार की आर्थिक सहायता से बनाई जाएगी.

इस ऐतिहासिक दौरे में सबसे अधिक ज़ोर आर्थिक सहयोग और द्विपक्षीय रिश्तों पर रहेगा. हम प्रधानमंत्री मोदी के साथ कई एमओयू पर हस्ताक्षर करेंगे.

हम पर्यटन, तकनीक, उद्योग, कृषि, सूचना प्रणाली सहित कई क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों पर दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को बढ़ाने पर काम कर रहे हैं.

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भारत और फ़लस्तीनियों के बीच एक मजबूत ऐतिहासिक संबंध है. आप दोनों देशों के बीच संबंधों के विकास का मूल्यांकन कैसे करेंगे और प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा से इस संबंध पर क्या असर पड़ेगा?

भारत और फ़लस्तीन के बीच संबंध ऐतिहासिक हैं. पिछले कुछ सालों में हमने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी समेत कई भारतीय अधिकारियों का स्वागत किया है.

हम प्रधानमंत्री मोदी से दोनों देशों के बीच सहयोग के सभी पहलुओं पर चर्चा करेंगे. शांति प्रक्रिया में भारत की संभावित भूमिका और आर्थिक सहयोग पर चर्चा करेंगे.

इस यात्रा से दोनों देशों के बीच भाईचारे में और दोनों देशों के बीच रिश्ते में और मजबूती आएगी.

भारत ने कई कार्यक्रमों के ज़रिए फ़लस्तीन में कौशल विकास और क्षमता निर्माण में सहायता दिया है. क्या आप फ़लस्तीनियों पर हुए इसके प्रभाव पर विस्तृत जानकारी दे सकते हैं और क्या यह भी बता सकते हैं कि इस संबंध में भारत और क्या कर सकता है?

भारत ने बड़ी संख्या में फ़लस्तीनियों को तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करने में योगदान दिया है, साथ ही फ़लस्तीनी छात्रों को प्रतिष्ठित भारतीय विश्वविद्यालयों में पढ़ने के लिए सैकड़ों छात्रवृत्ति प्रदान कर रहा है, साथ ही सरकारी कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चला रहा है.

हम फ़लस्तीन इंडिया टेक्नो पार्क को नहीं भूल सकते, जिसका उल्लेख मैंने पहले भी किया है. इससे नॉलेज एक्सचेंज, स्टार्टअप, क्रिएटिविटी और कई अन्य परियोजनाओं को प्रोत्साहन मिलेगा.

हम दोनों देशों के बीच सभी क्षेत्रों में और अधिक सहयोग के लिए संभावनाओं की तलाश में भारत सरकार के साथ काम करने की आशा कर रहे हैं.

आप भारत की इसराइल के साथ बढ़ते संबंध को कैसे देखते हैं? फ़लस्तीन के साथ भारत के संबंधों पर इसका क्या असर पड़ेगा?

हमारा मानना है कि किसी भी देश को अन्य देशों के साथ संबंध स्थापित करने का पूरा अधिकार है.

हम भारत के साथ हमारे संबंधों के महत्व पर ध्यान देते हैं. हमें भारत सरकार और वहां के लोगों के साथ दोस्ती पर बहुत गर्व है. हमें विश्वास है कि प्रधानमंत्री मोदी की ऐतिहासिक यात्रा से इस संबंध को और मजबूती मिलेगी.

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2015 में प्रणब मुखर्जी फ़लस्तीन गए थे, वो वहां जाने वाले भारत के पहले राष्ट्रपति बने.

क्या आप इसराइल-फ़लस्तीनी संघर्ष में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हैं?

राजनीतिक और आर्थिक दोनों ही रूप में अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत एक बहुत सम्मानित देश है. हम आज़ादी के लिए भारत के संघर्ष को नहीं भूल सकते. इसलिए हम मानते हैं कि हम भारतीय लोगों से जुड़े हुए हैं क्योंकि हम भी हमारी ज़मीन से इसराइल के उपनिवेशवाद को ख़त्म करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

भारत के प्रधानमंत्री का दौरा इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता के समर्थन की स्थिति को दर्शाता है. हम फ़लस्तीन और इसराइल के बीच वार्ता के लिए बहुपक्षीय मंच बनाने की संभावना में भारत की संभावित भूमिका को देखते हैं.

अंतरराष्ट्रीय सहमति और प्रस्तावों के आधार पर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए इसमें भारत और अन्य देश हिस्सा बन सकते हैं.

दोनों देशों के बीच समाधान को लेकर भारत की स्थिति हमें अच्छी तरह पता है. भारत ने फ़लस्तीनियों के संघर्ष का समर्थन किया है.

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