'कश्मीर का मसला क्यों हल नहीं होता?'

  • इक़बाल अहमद
  • बीबीसी संवाददाता
महबूबा मुफ़्ती

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पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते वहां की राष्ट्रीय राजनीति से जुड़ी ख़बरें तो थी हीं, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फ़लस्तीन दौरा और भारत प्रशासित कश्मीर से जुड़ी ख़बरें भी अख़बारों में छाई रहीं.

भारत प्रशासित कश्मीर की विधानसभा में पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे की ख़बर भी सभी अख़बारों में मौजूद है.

अख़बार जंग लिखता है, 'भारत प्रशासित कश्मीर एसेम्बली में पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे'.

भारतीय मीडिया का हवाला देते हुए जंग अख़बार लिखता है कि भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों के पाकिस्तान विरोधी नारों के जवाब में एमएलए अकबर लोन ने पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाए.

अख़बार के अनुसार बाद में मीडिया से बात करते हुए नेशनल कॉफ़्रेन्स के एमएलए अकबर लोन का कहना था, ''जब ऐसा महसूस होगा कि मुसलमान सुरक्षित नहीं हैं तो मैं पाकिस्तान ज़िंदाबाद का नारा लगाउंगा.''

भारतीय संसद पर हमले के दोषी अफ़ज़ल गुरु की फांसी की बरसी से जुड़ी ख़बरें भी लगभग सारे अख़बारों में छपी हैं.

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हर साल पांच फ़रवरी को पाकिस्तान में कश्मीर एकता दिवस मनाया जाता है. इस दिन पूरे पाकिस्तान में रैलियां निकाली जाती हैं जिनमें भारतीय कश्मीरियों की मदद करते रहने की क़समें खाई जाती हैं. इस साल भी ऐसा ही हुआ.

सिलसिला पिछले 70 सालों से जारी

अख़बार एक्सप्रेस में ज़हीर अख़्तर बेदरी ने एक लेख लिखा है जिसका शीर्षक है 'कश्मीर का मसला क्यों हल नहीं होता?'

ज़हीर अख़्तर लिखते हैं कि भारतीय कश्मीरियों की मदद करने और उनके लिए दुआएं करने का सिलसिला पिछले 70 सालों से जारी है तो फिर ये सवाल पूछना बिल्कुल जायज़ है कि कश्मीरी अब तक भारतीय क़ब्ज़े से आज़ाद क्यों नहीं हो सके.

इसकी वजह बताते हुए वो लिखते हैं कि अगर पाकिस्तान सैन्य शक्ति के मामले में भारत के बराबर होता तो न कश्मीर का मसला पैदा होता और न ही 70 साल से ये मामला लटका हुआ रहता.

वो आगे लिखते हैं कि संयुक्त राष्ट्र अगर निष्पक्ष और स्वतंत्र होता तो कश्मीर और फ़लस्तीन का मसला कबका हल हो जाता लेकिन संयुक्त राष्ट्र कथित तौर पर दुनिया की अकेली सुपर पावर अमरीका के इशारों पर नाचती है.

इसकी तीसरी वजह बताते हुए वो लिखते हैं कि चीन को अमरीका के भविष्य के लिए एक बड़ा ख़तरा बताया जा रहा है और इस ख़तरे का मुक़ाबला करने के लिए एक बड़े क्षेत्रीय शक्ति की ज़रूरत है और भारत इस ज़रुरत को बड़े अच्छे तरीक़े से पूरा कर रहा है.

वो लिखते हैं कि भारत के इस एहसान के बदला अमरीका कश्मीर में भारत का समर्थन कर चुका रहा है.

मोदी का दौरा भी पहले पन्ने पर

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फ़लस्तीन दौरे से जुड़ी ख़बरें भी पाकिस्तानी अख़बारों के पहले पन्ने पर है.

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रामल्लाह में मोदी का स्वागत

मोदी फ़लस्तीन के अलावा दुबई, अबू धाबी और ओमान के दौरे पर हैं. शनिवार को मोदी ने फ़लस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास से मुलाक़ात की थी.

अख़बार जंग के मुताबिक़ भारत ने कहा है कि फ़लस्तीन-इसराइल मसले का हल बातचीत से ही संभव है.

अख़बार के अनुसार मोदी ने कहा कि वो उम्मीद करते हैं कि फ़लस्तीन जल्द ही एक स्वतंत्र राष्ट्र बन जाएगा.

नवाज़ शरीफ़ तलब

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ को भ्रष्टाचार के एक और मामले में भ्रष्टाचार की जांच करने वाली संस्था नैब यानी नेशनल एकाउंटेबिलीटी ब्यूरो ने तलब किया है.

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ये ख़बर सारे अख़बारों के पहले पन्ने पर पहली सुर्ख़ी है.

अख़बार दुनिया के मुताबिक़ नवाज़ शरीफ़ ने अभी ये फ़ैसला नहीं किया है कि वो नैब के सामने हाज़िर होकर अपना बयान दर्ज कराएंगे या नहीं.

अख़बार एक्सप्रेस के मुताबिक़ तहरीक-ए-इंसाफ़ के प्रमुख इमरान ख़ान ने शरीफ़ परिवार पर हमला करते हुए कहा है कि नवाज़ शरीफ़ के बाद अब उनके भाई शहबाज़ शरीफ़ की बारी है.

अख़बार के अनुसार एक रैली को संबोधित करते हुए इमरान ख़ान ने कहा, ''नवाज़ शरीफ़ को निकाल दिया. शहबाज़ शरीफ़ वो फ़िरऔन है जिसका वक़्त क़रीब आ गया है.''

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