अमरीकी चुनाव में दख़ल को लेकर रूसी नागरिकों पर आरोप तय

  • 17 फरवरी 2018
Rod rosenstein
Image caption डिप्टी अटॉर्नी जनरल रॉड रोसनस्टाइन

अमरीका में 2016 में हुए राष्ट्रपति चुनावों में दख़ल को लेकर अमरीकी जांच एजेंसी एफ़बीआई ने 13 रूसी नागरिकों के ख़िलाफ़ आरोप तय किए हैं.

आरोप है कि इन लोगों ने ग़ैर-क़ानूनी तरीकों से अमरीकी चुनावों में हस्तक्षेप की कोशिश की.

इनमें से तीन लोगों पर तकनीक के ज़रिए धोखाधड़ी करने और किसी और की पहचान इस्तेमाल करने का आरोप है. इसके अलावा तीन रुसी कंपनियां भी इस जुर्म में शामिल बताई गई हैं.

मीडिया के सामने डिप्टी अटॉर्नी जनरल रॉड रोसनस्टाइन ने बताया कि किसी अमरीकी नागरिक पर ग़ैर-क़ानूनी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप नहीं था और ना ही रूस की इन कोशिशों से चुनाव के नतीजों पर कोई प्रभाव पड़ा.

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क्या हैं आरोप?

चार्जशीट के मुताबिक़ इन रूसी नागरिकों ने ख़ुद को अमरीकी दिखाकर अपने नाम पर बैंक अकाउंट खोले और राजनीतिक विज्ञापनों पर हज़ारों डॉलर खर्च किए. अमरीका में राजनीतिक रैलियां करवाईं.

इन लोगों ने असली अमरीकी नागरिकों के फ़ेक सोशल मीडिया अकाउंट बनाकर राजनीतिक पोस्ट लिखे. ऐसी जानकारियां फैलाईं जिससे हिलेरी क्लिंटन का कद छोटा हो. पैसे लेकर अमरीका की सोशल मीडिया साइटों पर लिखा.

इनका बजट महीने में 12 लाख 50 हज़ार डॉलर होता था. ये लोग देखते थे कि उनके इंटरनेट पोस्ट का प्रदर्शन लोगों के बीच कैसा रहा और फिर उसके हिसाब से अपनी रणनीति बनाते थे.

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ट्रंप ने दी अपनी सफ़ाई

इस चार्जशीट में ये भी कहा गया है कि इन लोगों ने 2014 की शुरूआत में ही चुनावों के प्रभावित करने की तैयारियां शुरू कर दी थीं.

राष्ट्रपति ट्रंप ने भी इस मुद्दे पर ट्वीट किया कि 'मेरे राष्ट्रपति चुनावों में खड़े होने के एलान से पहले ही रूस ने 2014 में अमरीकी चुनावों के ख़िलाफ़ तैयारियां शुरू कर दी थीं. चुनावें के नतीजे इससे प्रभावित नहीं हुए. ट्रंप कैंपेन ने कोई गलत काम नहीं किया.'

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Image caption जेनी प्रगोशिन

रूस की प्रतिक्रिया

रूस ने भी इन आरोपों पर प्रतिक्रिया दी है. रूस की विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़ाखारोवा ने कहा कि ये आरोप बेतुके हैं. उन्होंने पूछा कि क्या 13 लोगों का अमरीकी चुनावों में हस्तक्षेप करना मुमकिन है जहां करोड़ों डॉलर सुरक्षा एजेंसियों को बजट है.

चार्जशीट में नामजद रूस के जेनी प्रगोशिन जिन्हें रूस के राष्ट्रपति पुतिन का क़रीबी माना जाता है, उन्होंने इन आरोपों को ख़ारिज किया है. उनका कहना है कि अमरीकी बहुत अतार्किक लोग हैं. वे वही देखते हैं जो वो देखना चाहते हैं.

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