जापान में लकड़ी से गगनचुंबी इमारत बनाने की तैयारी

  • 21 फरवरी 2018
सुमितोमो फॉरेस्ट्री कंपनी की तरफ़ से जारी इमारत की एक तस्वीर इमेज कॉपीरइट SUMITOMO FORESTRY

जापान की एक कंपनी 2041 में अपनी 350वीं वर्षगांठ पूरी होने के मौके पर दुनिया की सबसे ऊंची लकड़ी की इमारत बनाने की तैयारी कर रही है.

सुमितोमो फॉरेस्ट्री ने कहा है कि 70 मंज़िला 'डब्ल्यू 350' टावर का 10 फ़ीसदी हिस्सा स्टील से बना होगा और इसमें 1 लाख 80 हज़ार घन मीटर स्थानीय लकड़ी इस्तेमाल होगी.

कंपनी का कहना है कि इस गगनचुंबी इमारत में 8000 घर होंगे और हर मंज़िल की बालकनी में वनस्पति होगी.

उसका कहना है कि टोक्यो में अक्सर आने वाले भूकंपों से बचाव के लिए इसमें लकड़ी और स्टील के स्तंभों वाला 'ब्रेस्ड ट्यूब स्ट्रक्चर' होगा.

लागत कितनी आएगी?

इस प्रॉजेक्ट पर 600 बिलियन येन (क़रीब 36 हज़ार करोड़ रुपये) की लागत आएगी. इसी आकार की पारंपरिक गगनचुंबी इमारत के मुकाबले यह खर्च लगभग दोगुना है.

हालांकि, सुमितोमा का कहना है कि उसे उम्मीद है कि 2041 तक तकनीक में प्रगति होने के कारण इसकी लागत में कमी हो जाएगी.

क्या यह नया कॉन्सेप्ट?

जापान ने 2010 में एक कानून पास किया था जिसके तहत निर्माण कंपनियों के लिए तीन मंज़िल से ज्यादा ऊंची इमारतें बनाने पर लकड़ी इस्तेमाल करना अनिवार्य कर दिया था.

पूरी दुनिया के लिहाज से भी यह नई बात नहीं है क्योंकि कई जगह पर लकड़ी से गगनचुंबी इमारतें बनाई गई हैं.

मिनीपलीस में लकड़ी से 18 मंज़िला इमारत बनाई गई है, जहां कई कार्यालय हैं. इसी तरह वैंकूवर में 53 मीटर ऊंचे स्टूडेंट फ्लैट बनाए गए हैं. यह अभी लकड़ी से बनी सबसे ऊंची इमारत है.

पर्यावरण के लिए कैसी हैं?

कंक्रीट और स्टील की इमारतों के कार्बन फ़ुटप्रिंट रह जाते हैं. माना जाता है कि इनसे क्रमश: 8 प्रतिशत और 5 प्रतिशत कार्बन उत्सर्जन होता है.

दूसरी तरफ़ लकड़ी में कार्बन स्टोर होता है. लकड़ी कार्बन को वातावरण में नहीं छोड़ती.

जापना में काफ़ी जंगल हैं और ये यहां के दो तिहाई हिस्से में फैले हुए हैं.

ये होंगी चुनौतियां

सबसे अहम बात है कि लकड़ी की इमारत को अग्नि प्रतिरोधक बनाना.

आजकल क्रॉस लैमिनेटेड टिंबर का इस्तेमाल ज़्यादा होने लगा है. यह लकड़ी स्टील की तरह आग प्रतिरोधक होती है और ऊंचे तापमान में भी स्थिर रहती है.

लकड़ी की ऊंची इमारतें बनाना ज़्यादा महंगा काम है, इसलिए आपको अपने पड़ोस में शायद ही हाल फ़िलहाल में ऐसी इमारत नज़र आए.

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