पूर्वी गूटा में सीरियाई सरकार की बमबारी में '250 की मौत' की ख़बर

  • 21 फरवरी 2018
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Image caption डूमा के एक अस्पताल में अस्थाई अस्पताल स्थापित किया गया था

रिपोर्टों के अनुसार, सीरियाई सरकार की ओर से विद्रोहियों के कब्ज़े वाले इलाक़े में लगातार दो दिन हुई बमबारी में 250 लोग मारे जा चुके हैं.

सहायता संगठनों के कार्यकर्ताओं का कहना है कि सीरिया की राजधानी दमिश्क के नज़दीक 2013 के बाद से यह सबसे हिंसक घटना है. उनका कहना है कि इसमें 50 से अधिक बच्चे मारे गए हैं.

संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि 'हालात नियंत्रण से बाहर हो रहे हैं.'

संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि सोमवार और मंगलवार के हमले में कम से कम छह अस्पतालों को निशाना बनाया गया है.

संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता रीयाल लेबलांक ने कहा, "नागरिकों, अस्पतालों और स्कूलों के ख़िलाफ़ लगातार हिंसा की हम पूरी तरह निंदा करते हैं. मानवीय कानून का ये चरम उल्लंघन है. हम सभी पक्षों से अपील करते हैं कि सीरिया में हिंसा की तीव्रता को कम करें."

कुर्दों के आफ़रिन में घुसे सीरियाई समर्थक बल

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सीरियाई सेना ने नहीं किया खंडन

पूर्वी गूटा से आ रही रिपोर्टों का सीरियाई सेना ने खंडन नहीं किया है लेकिन उसका कहना है कि उसके ख़िलाफ़ जहां से हमले किए गए हैं, वहां उसने 'सटीक हमले' किए हैं.

अलेप्पो से सांसद फ़ारिस शहाबी ने बीबीसी से कहा है कि सीरियाई सरकार चरमपंथियों पर हमला कर रही है, न कि नागरिकों पर.

उन्होंने कहा, "हम सभी आतंकी समूहों से पूर्वी गूटा को मुक्त करने की कोशिश कर रहे हैं. वे लोग मारे जा रहे हैं जो आज दमिश्क में रहते हैं . ऐसा इसलिए क्योंकि पूर्वी गूटा की ओर से दमिश्क पर मोर्टार से बमबारी की गई है. दमिश्क में मेरे दफ़्तर के नज़दीक तीन स्कूली बच्चों की मौत हुई है. पूर्वी गूटा की ओर से दमिश्क के आवासीय क्षेत्रों पर 100 मोर्टार दागे गए हैं. पूर्वी गूटा में रह रहे नागरिकों को हम निशाना नहीं बना रहे हैं."

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Image caption पूर्वी गूटा विद्रोहियों के कब्ज़े वाला अंतिम बड़ा इलाका है

क्या हो रहा है पूर्वी गूटा में?

राजधानी दमिश्क के नज़दीक पूर्वी गूटा विद्रोहियों के कब्ज़े वाला आख़िरी बड़ा शहर है. रूस के समर्थन वाले सरकार समर्थक बलों ने इस क्षेत्र को वापस पाने के लिए रविवार रात से आक्रमण तेज़ कर दिया है.

ब्रिटेन स्थित निगरानी समूह सीरियन ऑब्ज़र्वेटरी फ़ॉर ह्यूमन राइट्स का कहना है कि हवाई और ज़मीनी हमलों में कम से कम 250 लोग मारे गए हैं.

समूह का कहना है कि घेरे गए क्षेत्र में 2013 के रासायनिक हमले के बाद 48 घंटों में सबसे अधिक मौतें हुई हैं. इसमें 1200 लोग घायल हुए हैं.

कार्यकर्ताओं का कहना है कि मंगलवार को बमबारी में पूर्वी गूटा में 10 शहर और गांव इसकी चपेट में आए हैं.

संयुक्त राष्ट्र ने युद्ध विराम के लिए कहा है ताकि मानवीय सहायता पहुंचाई जा सके और घायलों को निकाला जा सके.

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आफ़रिन में घुसी सेना

वहीं, सीरिया में ही सरकार समर्थक बलों ने कुर्दों के गढ़ आफ़रिन में प्रवेश कर लिया है. इससे इलाके में तुर्की बलों की ओर से त्वरित प्रतिक्रिया होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं.

कुर्द लड़ाकों ने सीरिया सरकार से सैन्य सहायता की मांग की थी ताकि तुर्की सेना और सीरियाई विद्रोहियों द्वारा चलाए जा रहे अभियान का प्रतिरोध किया जा सके.

सरकार समर्थक लड़ाकों को हथियारबंद वाहनों में नाकों से गुज़रते हुए देखा गया है.

इसके बाद तुर्की सैनिकों ने इलाके पर गोलाबारी की. तुर्की ने कहा है कि उसने सीरियाई सरकार समर्थक लड़ाकों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया है.

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